कोच भारद्वाज ने आईपीएल के दूसरे सत्र के लिए प्रियांश को मानसिक रूप से तैयार किया

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 20-04-2026
Coach Bhardwaj mentally prepared Priyansh for the second season of the IPL.
Coach Bhardwaj mentally prepared Priyansh for the second season of the IPL.

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
 रिकी पोंटिंग उनके खेल की तकनीकी खामियों को सुधारने में मदद के लिए मौजूद हैं, लेकिन प्रियांश आर्य के लिए उनके बचपन के कोच और मार्गदर्शक संजय भारद्वाज की भूमिका उन्हें इंडियन प्रीमियर लीग के दूसरे सत्र की चुनौतियों से पार पाने के लिए मानसिक रूप से तैयार करने की रही है।
 
दिल्ली के आक्रामक बाएं हाथ के बल्लेबाज प्रियांश ने पिछले साल पंजाब किंग्स के लिए अपने पदार्पण सत्र में 475 रन बनाकर तुरंत स्टारडम हासिल कर लिया था। इस सत्र में उनके सामने और भी बड़ी चुनौती थी—यह साबित करना कि उनका पहला सत्र महज एक इत्तेफाक नहीं था।
 
आईपीएल में एक सत्र में चमक बिखेरने के बाद गुम हो जाने वाले पॉल वल्थाटी और स्वप्निल अस्नोदकर जैसे कई उदाहरण मौजूद हैं, लेकिन गौतम गंभीर को कोचिंग देने वाले भारद्वाज को हमेशा से पता था कि प्रियांश अलग मिट्टी के बने हैं।
 
मौजूदा सत्र में 11 गेंदों पर 39, 20 गेंदों पर 57 और 37 गेंदों पर 93 रन की पारियों के बाद इस बाएं हाथ के बल्लेबाज ने साबित कर दिया है कि वह क्षणिक चमक नहीं हैं और एक अच्छे सत्र के बाद उनके सिर पर सफलता का खुमार नहीं चढ़ा है।
 
भारद्वाज ने सोमवार को पीटीआई से कहा, ‘‘इस साल मैं उसे लगातार यही समझाने और उसके दिमाग में बैठाने की कोशिश कर रहा हूं कि जब तुम मैदान में उतरते हो, तो तुम्हें ‘अतीत के प्रदर्शन की यादों’ को लेकर नहीं चलना है और यह महसूस नहीं करना है कि तुमने कुछ हासिल कर लिया है या पिछले साल के प्रदर्शन के बाद तुम्हारी सामाजिक स्थिति बदल गई है।’’
 
उन्होंने कहा, ‘‘मैंने उससे कहा कि अपना ‘सोशल स्टेटस’ स्टेडियम के बाहर ही छोड़कर आओ। जो रन तुमने बनाए हैं, वे तुम्हारी मेहनत और भगवान की कृपा का परिणाम हैं।”
 
दिल्ली के मशहूर एलबी शास्त्री क्लब की आत्मा माने जाने वाले भारद्वाज ने पिछले तीन दशकों में सैकड़ों बच्चों को कोचिंग दी है और वे इस बात को भली-भांति जानते हैं कि आईपीएल के साथ अचानक आने वाला स्टारडम किसी भी युवा खिलाड़ी पर क्या असर डाल सकता है।
 
उन्होंने कहा, ‘‘आमतौर पर जिन बच्चों को आईपीएल के एक सत्र के बाद अचानक सफलता और पैसा मिलता है, वे बहुत सारा बोझ अपने साथ लेकर चलते हैं। मैदान पर अपेक्षाओं का दबाव होता है और मन के भीतर उस स्टारडम को बनाए रखने की बेचैनी भी रहती है।’’
 
प्रियांश के साथ उनका रिश्ता ‘गुरु-शिष्य’ जैसा है, और उनकी सबसे खास बात यह है कि वह हर सलाह को ध्यान से सुनते हैं