'Super El Nino' report: Co-author explains methodology for estimating '4.51 lakh excess deaths'
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
भारत में ‘सुपर अल नीनो’ के कारण अगले छह महीनों में गर्मी के कारण करीब 15,800 अतिरिक्त मौतें होने का दावा करने वाली अध्ययन रिपोर्ट की सह-लेखिका ने बताया कि है कि यह अनुमान दो प्रमुख आधारों -मौसमी तापमान पूर्वानुमान और तापमान तथा मृत्यु-दर के बीच संबंध, पर तैयार किया गया है। यह रिपोर्ट शिकागो विश्वविद्यालय के ‘एनर्जी पॉलिसी इंस्टीट्यूट’ की ओर से जारी की गई हैं
बुधवार को जारी इस अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार, मौजूदा 'सुपर अल नीनो' की वजह से अगले छह महीनों में दुनिया भर में सामान्य वर्ष की तुलना में लगभग 4,51,000 अतिरिक्त मौतें होने का अनुमान है।
अध्ययन की सह-लेखिका एमिली ग्रोवर-कोपेक ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि तापमान और मृत्यु-दर के संबंध का आकलन ‘यूरोपियन सेंटर फॉर मीडियम-रेंज वेदर फोरकास्ट्स’ (ईसीएमडब्ल्यूएफ एसईएएस) के मौसमी पूर्वानुमान का इस्तेमाल करके किया गया, जिसे व्यापक रूप से संदर्भित मौसमी पूर्वानुमानों में से एक माना जाता है।
इस रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जलवायु परिवर्तन के कारण आने वाले महीनों में दुनिया भर में धरती का तापमान सामान्य से 1.2 डिग्री सेल्सियस अधिक हो सकता है। यह उस तरह के अधिक तापमान के समान होगा, जिसकी जलवायु परिवर्तन के कारण अगले 20 वर्षों में संभावना जताई जा रही है।
ग्रोवर-कोपेक ने कहा, ‘‘ उपलब्ध मौसमी पूर्वानुमानों की विस्तृत श्रृंखला को देखने पर तापमान में अनुमानित बदलाव के मामले में ईसीएमडब्ल्यूएफ एसईएएस बीच में आता है। इसलिए यह अपेक्षाकृत मध्यम अनुमान प्रस्तुत करता है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ हमने तापमान और मृत्यु-दर के बीच संबंध से जुड़े ऐसे आंकड़ों/अध्ययनों का भी इस्तेमाल किया, जिनका ‘पियर रिव्यू’ हो चुका है और जिन्हें नवंबर 2022 में अर्थशास्त्र की सबसे प्रतिष्ठित शोध पत्रिकाओं में से एक, ‘ क्वाटर्ली जरनल ऑफ इकोनॉमिक्स’, में प्रकाशित किया गया था।’’
‘पियर रिव्यू’ एक ऐसी मूल्यांकन प्रक्रिया है जिसमें किसी लेखक के शोध, वैज्ञानिक कार्य या विचारों की उसी क्षेत्र के स्वतंत्र विशेषज्ञों द्वारा गहन जांच और मूल्यांकन किया जाता है। यह प्रक्रिया आमतौर पर किसी शोध को प्रकाशित या स्वीकृत किए जाने से पहले की जाती है।