आवाज द वाॅयस/ नई दिल्ली/ ढाका
बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के शासन के अंतिम दिनों और 2024 के छात्र आंदोलन पर बनी अल जजीरा की खोजी डॉक्यूमेंट्री Hasina: 36 Days in July को 2026 के इंटरनेशनल एमी अवॉर्ड्स के लिए नामांकन मिला है। फिल्म को Current Affairs श्रेणी में नामांकित किया गया है।
इंटरनेशनल एकेडमी ऑफ टेलीविजन आर्ट्स एंड साइंसेज ने 23 सितंबर 2026 को नामांकन की घोषणा की। इस साल 22 देशों के 64 कार्यक्रमों को 16 श्रेणियों में नामांकन मिला है। विजेताओं की घोषणा 23 नवंबर 2026 को न्यूयॉर्क में होने वाले 54वें इंटरनेशनल एमी अवॉर्ड्स समारोह में की जाएगी।
यह डॉक्यूमेंट्री अल जजीरा की Investigative Unit ने तैयार की है। फिल्म 2024 में बांग्लादेश में हुए छात्र आंदोलन, हिंसा और शेख हसीना सरकार के अंतिम दिनों की घटनाओं की पड़ताल करती है। इसका प्रसारण पहली बार 24 जुलाई 2025 को अल जजीरा इंग्लिश पर हुआ था। अल जजीरा के अनुसार जांच में गुप्त रूप से रिकॉर्ड की गई फोन कॉल, दस्तावेज और प्रत्यक्ष गवाहों की गवाही शामिल की गई है।
इंटरनेशनल एमी में बांग्लादेश की कहानी
2026 के इंटरनेशनल एमी नामांकन में Hasina: 36 Days in July कतर का प्रतिनिधित्व कर रही है। Current Affairs श्रेणी में इसके साथ फ्रांस की Arte Reportage: My Father's Hair, ब्रिटेन की Exposure: Breaking Ranks: Inside Israel’s War और ब्राजील की Profissão Repórter: Feminice भी नामांकित हैं।
इंटरनेशनल एमी अमेरिका के बाहर निर्मित टेलीविजन कार्यक्रमों में उत्कृष्टता को सम्मानित करता है। 2026 में नामांकित कार्यक्रम अर्जेंटीना, बेल्जियम, ब्राजील, कनाडा, चिली, चीन, फ्रांस, जर्मनी, भारत, जापान, मैक्सिको, नीदरलैंड, नॉर्वे, फिलीपींस, पुर्तगाल, कतर, सिंगापुर, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, स्पेन, तुर्किये और ब्रिटेन से हैं।
क्या है हसीना 36 डेज इन जुलाई?
Hasina: 36 Days in July करीब 50 मिनट की खोजी फिल्म है। इसमें 2024 के जुलाई आंदोलन के दौरान हुई घटनाओं और शेख हसीना सरकार के अंतिम दौर की जांच की गई है। अल जजीरा की Investigative Unit का कहना है कि उसे ऐसे गुप्त फोन रिकॉर्ड हासिल हुए, जिनमें तत्कालीन प्रधानमंत्री और उनके करीबी लोगों के बीच बातचीत दर्ज थी।
फिल्म का मुख्य दावा यह है कि इन रिकॉर्डिंग से सुरक्षा बलों द्वारा प्रदर्शनकारियों के खिलाफ घातक बल के इस्तेमाल से जुड़ी जानकारी सामने आती है। अल जजीरा ने बताया कि रिकॉर्डिंग की जांच ऑडियो फॉरेंसिक विशेषज्ञों से कराई गई और आवाजों की पहचान भी की गई।
18 जुलाई 2024 की एक रिकॉर्डिंग में शेख हसीना को अपने सहयोगी और ढाका दक्षिण के तत्कालीन मेयर शेख फजले नूर तापोश से बात करते हुए दिखाया गया है। अल जजीरा के अनुसार, बातचीत में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ घातक हथियारों के इस्तेमाल और हेलीकॉप्टरों से कार्रवाई का जिक्र है। इन दावों को डॉक्यूमेंट्री में डॉक्टरों और अन्य स्रोतों की गवाही के साथ प्रस्तुत किया गया है।
हालांकि, इन आरोपों को एकतरफा तथ्य के रूप में देखना उचित नहीं होगा। अल जजीरा को दिए बयान में अवामी लीग के प्रवक्ता ने कहा कि शेख हसीना ने घातक हथियार शब्द का इस्तेमाल नहीं किया था और सुरक्षा बलों को घातक बल के इस्तेमाल का विशेष निर्देश नहीं दिया था। प्रवक्ता ने 18 जुलाई की रिकॉर्डिंग की प्रामाणिकता पर भी सवाल उठाया।
अबू सईद की मौत पर क्या दिखाती है फिल्म?
डॉक्यूमेंट्री में छात्र अबू सईद की मौत को भी महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में पेश किया गया है। 16 जुलाई 2024 को रंगपुर में पुलिस गोलीबारी में अबू सईद की मौत हुई थी। उनकी मौत के वीडियो ने बांग्लादेश के छात्र आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन दिलाने वाली महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक का रूप लिया। अल जजीरा की जांच में उनके पोस्टमार्टम से जुड़े दस्तावेजों और अधिकारियों के बीच हुई बातचीत की भी पड़ताल की गई है।
अल जजीरा के अनुसार, रंगपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल के एक डॉक्टर ने दावा किया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कई बार बदलाव करने का दबाव बनाया गया था। जांच में यह भी दावा किया गया कि रिपोर्ट से गोली लगने से संबंधित विवरण हटाने की कोशिश हुई। इन दावों के साथ फिल्म में संबंधित लोगों के बयान और दस्तावेज प्रस्तुत किए गए हैं।
डॉक्यूमेंट्री के अनुसार अबू सईद के परिवार को बाद में ढाका बुलाकर तत्कालीन प्रधानमंत्री से सरकारी टेलीविजन पर मुलाकात कराई गई। परिवार के सदस्यों ने इस मुलाकात को लेकर दबाव महसूस किए जाने की बात कही। ये दावे भी फिल्म में शामिल किए गए हैं।
इंटरनेट बंद करने और सूचना नियंत्रण का दावा
2024 के आंदोलन के दौरान बांग्लादेश में इंटरनेट और डिजिटल संचार को लेकर भी गंभीर विवाद हुआ था। अल जजीरा की Investigative Unit का कहना है कि उसे ऐसे गोपनीय दस्तावेज मिले, जिनसे इंटरनेट बंद करने और हिंसा से जुड़ी तस्वीरों के प्रसार को रोकने की सरकारी कोशिशों के बारे में जानकारी मिलती है।
पूर्व सरकार की ओर से इस मामले में अलग स्पष्टीकरण दिया गया था। अवामी लीग के प्रवक्ता ने कहा कि इंटरनेट बंद होने के पीछे प्रदर्शनकारियों की गतिविधियों से हुआ नुकसान जिम्मेदार था। इसलिए इंटरनेट शटडाउन को लेकर सरकार और जांच में सामने आए दावों के बीच अंतर बना हुआ है।
2024 का छात्र आंदोलन क्यों महत्वपूर्ण था?
बांग्लादेश में 2024 का छात्र आंदोलन सरकारी नौकरियों में कोटा व्यवस्था को लेकर शुरू हुआ था। शुरुआती प्रदर्शन बाद में व्यापक राजनीतिक आंदोलन में बदल गया। जुलाई और अगस्त 2024 में आंदोलन ने देश के कई हिस्सों को प्रभावित किया।
अल जजीरा की जांच के अनुसार, आंदोलन के दौरान बड़ी संख्या में लोग मारे गए और घायल हुए। उसकी डॉक्यूमेंट्री में करीब 1,500 मौतों और 25,000 से अधिक लोगों के घायल होने का आंकड़ा इस्तेमाल किया गया है। दूसरी ओर, बांग्लादेश के International Crimes Tribunal से जुड़े बाद के आंकड़ों में लगभग 1,400 मौतों और 20,000 से अधिक घायलों का उल्लेख किया गया है। इसलिए मृतकों और घायलों की संख्या अलग-अलग स्रोतों में अलग दिखाई देती है।
इसी आंदोलन के बाद 5 अगस्त 2024 को शेख हसीना ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दिया और बांग्लादेश छोड़कर भारत आ गईं। उनके 15 वर्ष लंबे शासन का अंत इसी राजनीतिक उथल-पुथल के बीच हुआ।
जुल्करनैन सायर की भूमिका
इस जांच में बांग्लादेशी पत्रकार जुल्करनैन सायर की महत्वपूर्ण भूमिका रही। अल जजीरा की रिपोर्टिंग में उन्हें इस खोजी परियोजना से जुड़े प्रमुख शोधकर्ताओं में शामिल किया गया है। फिल्म ने गुप्त फोन रिकॉर्डिंग, दस्तावेज, चिकित्सा गवाही और प्रत्यक्ष स्रोतों को जोड़कर 2024 के आंदोलन के अंतिम दौर की तस्वीर सामने रखने की कोशिश की है।
यह डॉक्यूमेंट्री केवल बांग्लादेश की राजनीति से जुड़ी फिल्म नहीं है। इसके केंद्र में सत्ता, प्रदर्शन, सुरक्षा बलों की कार्रवाई, सूचना नियंत्रण और जवाबदेही जैसे सवाल हैं। यही वजह है कि इसका इंटरनेशनल एमी नामांकन अंतरराष्ट्रीय टेलीविजन जगत में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
23 नवंबर को होगा फैसला
अब निगाहें 54वें इंटरनेशनल एमी अवॉर्ड्स पर हैं। समारोह 23 नवंबर 2026 को न्यूयॉर्क में होगा। उससे पहले 20 से 22 नवंबर तक इंटरनेशनल एमी वर्ल्ड टेलीविजन फेस्टिवल आयोजित किया जाएगा। इसी दौरान नामांकित कार्यक्रमों से जुड़े निर्माता और प्रतिनिधि विभिन्न प्रस्तुतियों और पैनल चर्चाओं में शामिल होंगे।
Hasina: 36 Days in July का नामांकन ऐसे समय हुआ है जब 2024 के बांग्लादेश छात्र आंदोलन और शेख हसीना सरकार के अंतिम दिनों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार चर्चा जारी है। डॉक्यूमेंट्री में लगाए गए आरोपों पर पूर्व सरकार की ओर से असहमति भी दर्ज है। इसलिए फिल्म का इंटरनेशनल एमी नामांकन एक पत्रकारिता जांच को वैश्विक टेलीविजन मंच तक पहुंचाने वाली महत्वपूर्ण घटना है। अंतिम निर्णय नवंबर में होगा।