आवाज द वाॅयस/ नई दिल्ली
कुछ कहानियां मैदान पर शुरू होती हैं और मैदान पर ही खत्म नहीं होतीं। मैराज अहमद खान की कहानी भी ऐसी ही है। उत्तर प्रदेश के खुर्जा से निकले इस निशानेबाज ने पहले क्रिकेट में करियर बनाने का सपना देखा। उन्होंने विश्वविद्यालय स्तर पर क्रिकेट खेला। इसी दौरान उनकी मुलाकात और साथ खेलने का मौका पूर्व भारतीय क्रिकेटर वीरेंद्र सहवाग के साथ भी आया। बाद में रास्ता बदला और मैराज ने शूटिंग को अपना जीवन बना लिया।

अब करीब 25 साल की मेहनत के बाद उनके नाम एशियन गेम्स का पदक भी दर्ज हो गया है। जापान में आयोजित एशियन गेम्स 2026 में मैराज अहमद खान ने भारत की पुरुष स्कीट टीम के साथ कांस्य पदक जीता। भारतीय टीम में उनके साथ अनंतजीत सिंह नरूका और भवतेघ सिंह गिल थे। तीनों ने 346 का स्कोर बनाया और कजाकिस्तान के साथ बराबरी के बाद शूटऑफ में जीत हासिल कर कांस्य पदक अपने नाम किया।
मैराज के लिए यह पदक इसलिए भी खास है क्योंकि एशियन गेम्स में उनका सफर करीब दो दशक पहले शुरू हुआ था। वह 2006 में पहली बार एशियन गेम्स में उतरे थे। इसके बाद 2010 और 2014 में भी उन्होंने भारत का प्रतिनिधित्व किया। 2026 में चौथी बार एशियन गेम्स में उतरने के बाद आखिरकार उनके हाथ वह पदक आया, जिसका इंतजार लंबे समय से था।
मैराज अहमद खान को आज दुनिया एक अंतरराष्ट्रीय स्कीट शूटर के रूप में जानती है। लेकिन उनके खेल जीवन का एक दिलचस्प हिस्सा क्रिकेट से जुड़ा है।
शूटिंग में आने से पहले मैराज क्रिकेट खेलते थे। उन्होंने जामिया मिल्लिया इस्लामिया की टीम के लिए क्रिकेट खेला। इसी दौरान वह वीरेंद्र सहवाग के साथ भी मैदान पर उतरे थे। दोनों ने 1990 के दशक में विश्वविद्यालय स्तर पर क्रिकेट खेला। मैराज ने विश्वविद्यालय क्रिकेट के अलावा विज्जी ट्रॉफी और सीके नायडू ट्रॉफी में भी हिस्सा लिया था।
उनका शुरुआती सपना भारतीय क्रिकेट टीम के लिए खेलना था। लेकिन जिंदगी ने उनके लिए दूसरा रास्ता चुना। शूटिंग उनके परिवार में पहले से थी। उनके पिता, भाई और चाचा ट्रैप शूटिंग से जुड़े रहे थे। इसके बावजूद युवा मैराज का मन शुरू में शूटिंग में ज्यादा नहीं लगा।
बाद में उन्होंने क्रिकेट से दूरी बनाई और शूटिंग की ओर लौट आए। यही फैसला आगे चलकर उनके खेल जीवन की सबसे बड़ी पहचान बना। इंटरनेशनल शूटिंग स्पोर्ट फेडरेशन के रिकॉर्ड के अनुसार मैराज का जन्म 2 नवंबर 1975 को खुर्जा, उत्तर प्रदेश में हुआ। उन्होंने 1998 से शूटिंग का अभ्यास शुरू किया और 2003 में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना शुरू किया।
मैराज ने शुरुआत में शूटिंग को गंभीर करियर के बजाय शौक के तौर पर देखा। क्रिकेट में आगे बढ़ने की कोशिश के बीच शूटिंग उनके जीवन में बनी रही। धीरे धीरे उन्होंने महसूस किया कि इस खेल में वह अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंच सकते हैं।
उन्होंने शॉटगन शूटिंग से शुरुआत की और बाद में स्कीट को अपना मुख्य इवेंट बनाया। इसके बाद राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उनकी भागीदारी बढ़ती गई।
मैराज ने विश्व कप, एशियन चैंपियनशिप, कॉमनवेल्थ प्रतियोगिताओं और एशियन गेम्स में भारत का प्रतिनिधित्व किया। 2016 में वह रियो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करने वाले पहले भारतीय स्कीट निशानेबाज बने। रियो में उन्होंने क्वालिफिकेशन में 121 का स्कोर किया और नौवें स्थान पर रहे। टोक्यो ओलंपिक में उन्होंने 117 के स्कोर के साथ 25वां स्थान हासिल किया।
मैराज के करियर में 2022 भी महत्वपूर्ण साल रहा। दक्षिण कोरिया के चांगवोन में आयोजित आईएसएसएफ विश्व कप में उन्होंने पुरुष स्कीट में स्वर्ण पदक जीता। आईएसएसएफ के अनुसार यह उनका 2016 के बाद विश्व कप में पहला पदक था और पुरुष स्कीट में उनका पहला विश्व कप स्वर्ण था।
यह उपलब्धि उस समय और महत्वपूर्ण थी क्योंकि इसके कुछ समय पहले उनके सामने निजी जीवन की कठिन परिस्थिति भी आई थी। इसके बावजूद उन्होंने अंतरराष्ट्रीय शूटिंग में वापसी की और विश्व कप में स्वर्ण पदक जीता।
यानी मैराज की कहानी सिर्फ एशियन गेम्स 2026 के कांस्य पदक तक सीमित नहीं है। इसके पीछे कई वर्षों का अंतरराष्ट्रीय अनुभव, ओलंपिक में भागीदारी और विश्व कप का स्वर्ण भी शामिल है।
VIDEO | Delhi: On winning Bronze Medal at Asian Games 2026, Indian skeet shooter Mairaj Ahmad Khan says, "From last 25 years I'm working. My first Asian Games was in 2006. And after two decades, I've won this medal for my country. And I'm very happy and I'm very thankful to… pic.twitter.com/EVf2DB0lks
— Press Trust of India (@PTI_News) September 25, 2026
एशियन गेम्स में आखिरकार मिला पदक
एशियन गेम्स 2026 में पुरुष स्कीट टीम इवेंट मैराज के लिए अलग महत्व रखता था। भारत की टीम ने कुल 346 अंक हासिल किए। कजाकिस्तान की टीम के साथ स्कोर बराबर रहने के बाद मुकाबला शूटऑफ तक पहुंचा। भारतीय तिकड़ी ने वहां बेहतर प्रदर्शन किया और कांस्य पदक हासिल किया। कतर ने स्वर्ण और कुवैत ने रजत पदक जीता।
मैराज के लिए यह केवल एक टीम पदक नहीं था। यह चार एशियन गेम्स में लंबे सफर का परिणाम था।
पदक जीतने के बाद मैराज ने अपनी खुशी जाहिर करते हुए कहा कि वह करीब 25 वर्षों से मेहनत कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि 2006 में उनका पहला एशियन गेम्स था और करीब दो दशक बाद देश के लिए पदक जीतना उनके लिए बेहद खुशी का पल है। उन्होंने अपने सफर में सहयोग देने वालों का आभार भी जताया।
51 वर्ष की उम्र में एशियन गेम्स पदक जीतने वाले मैराज ने प्रतियोगिता के बाद अपने खेल को लेकर आगे की योजनाएं भी स्पष्ट कीं। उन्होंने कहा कि वह रुकने वाले नहीं हैं। उनका अगला बड़ा लक्ष्य विश्व चैंपियनशिप और लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 से जुड़ा है।यह बयान उनके करियर की दिशा को भी दिखाता है। एशियन गेम्स पदक जीतने के बाद भी उनका अंतरराष्ट्रीय सफर खत्म नहीं हुआ है।

एशियन गेम्स 2026 में स्कीट शूटिंग में भारत को पुरुष और महिला दोनों टीम स्पर्धाओं में कांस्य पदक मिला। महिला टीम में राइजा ढिल्लों, परिणाज धालीवाल और महेश्वरी चौहान ने 331 का स्कोर कर कांस्य जीता। पुरुष टीम में अनंतजीत सिंह नरूका, मैराज अहमद खान और भवतेघ सिंह गिल ने 346 के स्कोर के साथ पदक हासिल किया।
मैराज की उपलब्धि इस मायने में भी उल्लेखनीय है कि उन्होंने अपने खेल जीवन में अलग अलग दौर देखे हैं। क्रिकेट से शुरुआत हुई। शूटिंग में वापसी हुई। ओलंपिक तक पहुंचे। विश्व कप में स्वर्ण जीता। और अब एशियन गेम्स में भी पदक मिल गया।
एक समय जिस खिलाड़ी का सपना क्रिकेट में भारत का प्रतिनिधित्व करना था, वही खिलाड़ी आज भारतीय शूटिंग की पहचान बन चुका है। वीरेंद्र सहवाग के साथ क्रिकेट खेलने से लेकर एशियन गेम्स में भारत के लिए कांस्य पदक जीतने तक का यह सफर मैराज अहमद खान के खेल जीवन का अनोखा अध्याय है।
उनकी कहानी यह भी बताती है कि खेल में रास्ते हमेशा सीधे नहीं होते। कभी खिलाड़ी एक खेल से दूसरे खेल की ओर जाता है। कभी वर्षों तक पदक का इंतजार करना पड़ता है। मैराज के मामले में यह इंतजार करीब दो दशक लंबा रहा।
लेकिन 23 सितंबर 2026 को जापान के एशियन गेम्स मैदान पर जब भारत की स्कीट टीम ने शूटऑफ में जीत दर्ज की, तो उस लंबे सफर को एक पदक मिल गया। मैराज अहमद खान के लिए यह सिर्फ कांस्य नहीं था। यह उनके लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर में जुड़ा वह अध्याय था, जिसका इंतजार उन्होंने वर्षों तक किया था।
मैराज अहमद खान ने एशियन गेम्स 2026 में कौन सा पदक जीता?
मैराज अहमद खान ने भारत की पुरुष स्कीट टीम के साथ कांस्य पदक जीता।
एशियन गेम्स 2026 में मैराज खान की टीम में कौन थे?
मैराज अहमद खान के साथ अनंतजीत सिंह नरूका और भवतेघ सिंह गिल भारतीय टीम का हिस्सा थे।
मैराज अहमद खान ने वीरेंद्र सहवाग के साथ क्रिकेट कब खेला था?
मैराज ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया की ओर से विश्वविद्यालय स्तर के क्रिकेट में वीरेंद्र सहवाग के साथ खेला था।
मैराज अहमद खान ने शूटिंग कब शुरू की?
ISSF के रिकॉर्ड के अनुसार उन्होंने 1998 से शूटिंग का अभ्यास शुरू किया और 2003 में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया।
मैराज अहमद खान का सबसे बड़ा शूटिंग रिकॉर्ड क्या है?
उन्होंने 2022 में चांगवोन आईएसएसएफ विश्व कप में पुरुष स्कीट का स्वर्ण पदक जीता था।
मैराज अहमद खान ने ओलंपिक में कब हिस्सा लिया?
उन्होंने रियो 2016 और टोक्यो 2020 ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। ISSF के रिकॉर्ड में रियो में उनका नौवां और टोक्यो में 25वां स्थान दर्ज है।