वज़ीर मोहम्मद : गंभीर बीमारी के आगे नहीं झुका ढाई फीट का इन्फ्लुएंसर

Story by  फरहान इसराइली | Published by  [email protected] | Date 26-09-2026
Wazir Mohammad: The 2.5-foot-tall influencer who refused to bow down to a serious illness.
Wazir Mohammad: The 2.5-foot-tall influencer who refused to bow down to a serious illness.

 

फरहान इसराइली/जयपुर

क़द महज़ ढाई फ़ीट और वज़न 20 किलो से भी कम। शरीर में एक ऐसी दुर्लभ बीमारी, जिसका दुनिया में कोई इलाज नहीं है। लेकिन जब जयपुर के चार दरवाज़ा इलाक़े में रहने वाले वज़ीर मोहम्मद बात करते हैं, तो उनके लहजे में गज़ब का यक़ीन दिखता है।वज़ीर बेबाकी से कहते हैं,”वे खुद को सिर्फ़ शॉर्ट रील्स तक सीमित नहीं रखना चाहते, क्योंकि वे इससे कहीं ज़्यादा हासिल करने का दम रखते हैं।“

गंभीर शारीरिक सीमाओं के बावजूद वज़ीर ने खुद को कभी बेबस नहीं माना। उन्होंने किसी की दया पर जीने या मदद माँगने के बजाय अपनी हिम्मत पर भरोसा किया।इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर खुद का कंटेंट बनाना शुरू किया।आज वे अपनी लगन के दम पर एक पहचाने जाने वाले डिजिटल क्रिएटर और सेलिब्रिटी बन चुके हैं। वे अपना सारा खर्च खुद उठाते हैं और इंटरनेट के ज़रिए अच्छी कमाई कर रहे हैं।

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जब हड्डियाँ रुई की तरह पिचकने लगें

15 दिसंबर 2003 को जन्मे वज़ीर जन्म से ही ऑस्टियोजेनेसिस इम्परफेक्टा (Brittle Bone Disease) नाम की गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। इस बीमारी का हाल समझाते हुए वे कहते हैं कि जैसे रुई दबाने पर दब जाती है, उनकी हड्डियाँ भी उतनी ही नाज़ुक हैं।

हड्डी टूटने के बाद सीधी नहीं जुड़ती और बिना फ्रैक्चर के भी समय के साथ मुड़ने लगती है।डॉक्टरों के मुताबिक़ यह जेनेटिक बीमारी है और इसका कोई स्थायी इलाज नहीं है।उनकी बहन खुशनुमा भी इसी बीमारी से पीड़ित हैं।

बीमारी के डर से वज़ीर पहली से सातवीं कक्षा तक कभी स्कूल नहीं जा सके। माँ तसलीम अख़्तर को हमेशा डर रहता था कि खेलते बच्चों के बीच कहीं कोई चोट न लग जाए या हड्डी न टूट जाए। इसलिए दोनों भाई-बहन की शुरुआती पढ़ाई घर पर ही हुई। लेकिन आठवीं कक्षा में आते-आते वज़ीर ने स्कूल जाने की ज़िद की। उनका कहना था कि बेहतर नंबर लाने के लिए स्कूल जाना ज़रूरी है। माँ ने डरते हुए इजाज़त दी।

स्कूल में माहौल उम्मीद से बेहतर रहा।सहपाठियों और शिक्षकों ने वज़ीर को दिल से अपनाया।उनके घुँघराले बालों की वजह से सब उन्हें प्यार से "घबरू" कहकर बुलाते थे। वज़ीर याद करते हैं कि किसी ने कभी उनका मज़ाक नहीं उड़ाया, सब मददगार रहे।

हालाँकि आस-पड़ोस के कुछ लोग ताने देते थे कि इस हालत में पढ़कर क्या हासिल होगा, लेकिन परिवार ढाल बनकर खड़ा रहा।जवाहरात के काम से जुड़े पिता अबरार मोहम्मद और भाई आदिल मोहम्मद ने हमेशा उनका हौसला बढ़ाया।

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डॉक्टर बनने का सपना और वायरल रील्स का दौर

दसवीं की पढ़ाई के लिए वज़ीर कोटा गए और अपने मामा की कोचिंग में दाखिलालिया। दसवीं में 59 फीसदी अंक हासिल करने के बाद उन्होंने सरकारी स्कूल से 12वीं (साइंस बायो) पास की।इसके बाद नीट की परीक्षा दी, लेकिन सफलता नहीं मिली।

उसी दौरान सोशल मीडिया पर उनकी पहचान बनने लगी थी, जिससे पढ़ाई और वीडियो क्रिएशन को एक साथ संभालना मुश्किल हो गया।वज़ीर बताते हैं कि उनके दो सपने थे - एक मशहूर होना और दूसरा डॉक्टर बनना। एक सपना लगभग पूरा हो चुका है, जबकि डॉक्टर बनने की ख्वाहिश अब भी अधूरी है। वे आगे कॉलेज में दाखिला लेकर अपनी पढ़ाई पूरी करना चाहते हैं।

वीडियो बनाने का सफ़र 2016 में म्यूज़िकली ऐप से शुरू हुआ था, जो बाद में टिकटॉक बना। उस समय वज़ीर के पास अपना फ़ोन भी नहीं था। वे अपने कज़न भाई इज़हार के मोबाइल से शौकिया वीडियो बनाते थे।बाद में जब पढ़ाई के लिए स्मार्टफोन मिला, तो इंस्टाग्राम रील्स ने उनका ध्यान खींचा।

12वीं में पढ़ाई के दौरान मशहूर शायर राहत इंदौरी के एक शेर पर बनाई गई उनकी रील अचानक वायरल हो गई। उस वीडियो पर लाखों व्यूज़ आए। इसके बाद तो जैसे सिलसिला ही शुरू हो गया। उनके वीडियो रोज़ाना 10 से 30 मिलियन तक देखे जाने लगे।

सिर्फ़ आठ दिनों में उनके फ़ॉलोअर्स 4,000 से बढ़कर 75,000 हो गए। उस समय तक वे घर के अंदर ही वीडियो बनाते थे और मोहल्ले के लोग भी नहीं जानते थे कि उनके बीच एक सोशल मीडिया स्टार रह रहा है। बाद में उनके भाई और कज़न उन्हें पहली बार बाहर ले जाकर शूट कराने लगे।

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जब घमंड और स्ट्राइक ने गिरा दी रीच

अचानक मिली कामयाबी को सँभालना आसान नहीं था।वज़ीर बिना झिझक स्वीकार करते हैं कि कम उम्र में मिली शोहरत की वजह से उनमें अनजाने में घमंड आ गया था।इसी बीच एक प्रमोशनल वीडियो पर इंस्टाग्राम की कम्युनिटी गाइडलाइंस की वजह से स्ट्राइक आ गई।अकाउंट की रीच, जो कभी 100 मिलियन छू रही थी, तेज़ी से नीचे गिर गई।

साल 2022 से 2023 का समय उनके लिए काफ़ी कठिन रहा। फ़ॉलोअर्स 75,000 से घटकर सीधे 45,000 पर आ गए। लेकिन वज़ीर ने हिम्मत नहीं हारी।उनका मानना है कि अपनी ग़लती स्वीकार करके ही इंसान ज़िंदगी में आगे बढ़ता है।उन्होंने हार मानने के बजाय लगभग डेढ़ साल तक बिना रुके काम करना जारी रखा।

पुराने दोस्तों ने भी इस मुश्किल वक़्त में उनका साथ दिया।दोस्त ज़ीशान के ज़रिए वे क्रिएटर साकिब से मिले और दोनों ने मिलकर कंटेंट बनाना शुरू किया।धीरे-धीरे अकाउंट से स्ट्राइक हटी, वीडियो फिर से वायरल होने लगे और फ़ॉलोअर्स का आँकड़ा एक लाख के पार निकल गया।

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नेशनल पहचान और वर्ल्ड रिकॉर्ड में नाम

आज वज़ीर मोहम्मद को बड़े-बड़े आयोजनों में बतौर सेलिब्रिटी बुलाया जाता है। उन्हें जयपुर के बिड़ला ऑडिटोरियम में 'जयपुर बेस्ट क्रिएटर अवॉर्ड 2023' से नवाज़ा गया।इसके बाद 'इन्फ़्लुएंसर बुक ऑफ़ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स' में उनका नाम दर्ज हुआ।

हाल ही में अगस्त 2026 में गाज़ियाबाद में आयोजित एक एनर्जी ड्रिंक इवेंट में वे मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जहाँ उन्होंने डांस प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित किया।इसके अलावा वे जयपुर में हुए स्नैपचैट के आधिकारिक क्रिएटर मीटअप का भी हिस्सा रहे।

वर्तमान में इंस्टाग्राम पर वज़ीर के 3.5 लाख से ज़्यादा फ़ॉलोअर्स हैं।फ़ेसबुक पर करीब 1 लाख लोग उन्हें फॉलो करते हैं और यूट्यूब पर भी 13 हज़ार से अधिक सब्सक्राइबर्स जुड़ चुके हैं। वे अब तक 500 से 600 वीडियो बना चुके हैं, जिन पर औसतन 5 लाख से 10 लाख व्यूज़ आते हैं।

वे एक्शन, ड्रामा, कॉमेडी और इमोशनल स्टोरीटेलिंग हर तरह का कंटेंट बनाते हैं।शूटिंग मोबाइल से होती है और एडिटिंग भी वे खुद करते हैं, क्योंकि वे अपने काम में क्रिएटिविटी से समझौता नहीं करना चाहते।घर पर वीडियो शूट करने में उनकी भाभी फ़हरीन मदद करती हैं।

वज़ीर का मानना है कि वे अपनी मेहनत के ज़रिए दूसरों के लिए एक मिसाल बन रहे हैं। अब उनकी नज़रें बिग बॉस जैसे बड़े रियलिटी शो और बॉलीवुड की बड़ी स्क्रीन पर हैं। उनका कहना साफ़ है.."खुद के लिए जितना बड़ा सोचोगे, उतना बड़ा हासिल करोगे। कभी यह मत सोचो कि बस सफर यहीं तक था।"