भक्ति चालक
पुणे जैसे बड़े मेट्रो शहर में अक्सर लोगों के पास अपने पड़ोसियों का हाल-चाल पूछने का भी वक्त नहीं होता। लेकिन इसी भाग-दौड़ वाले शहर में एक सामाजिक कार्यकर्ता ऐसा भी है जो दिन-रात काम कर रहा है। वह इमरजेंसी में फंसे बीमारों तक सही वक्त पर मुफ्त ऑक्सीजन मशीन पहुंचाता है और दूर-दराज़ के गांवों से आंखों में तालीम के सपने लेकर आए छात्रों को पुणे में बसने में मदद करता है।
इस कार्यकर्ता का नाम खिसाल जाफरी है। मेडिकल और सामाजिक क्षेत्र में उनकी इसी लगन और दिन-रात की खिदमत को देखते हुए पुणे नगर निगम ने हाल ही में 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर उनका खास सम्मान किया। पुणे की मेयर मंजूषा नागपुरे ने खिसाल जाफरी को बेहद इज़्ज़तदार "पुणे प्रथम सम्मानचिन्ह" देकर नवाज़ा। इस मौके पर 'आवाज़ द वॉयस' को दिए गए एक इंटरव्यू में खिसाल जाफरी ने अपने सफर, समाज सेवा की पुश्तैनी विरासत और भविष्य के इरादों पर दिल खोलकर बात की।
कॉलेज के दिनों में जगी समाज सेवा की लौ
खिसाल जाफरी के दिल में समाज सेवा का यह शौक अचानक पैदा नहीं हुआ। उन्हें यह शौक विरासत में अपने बुज़ुर्गों से मिला है। खिसाल के वालिद पुणे नगर निगम में एक अफसर के तौर पर काम करते थे। इतना ही नहीं, उनके दादा भी निगम में अफसर रहकर आवाम की खिदमत कर चुके थे। इसलिए समाज सेवा का सबक उन्हें बचपन से ही घर में मिल गया था।
अपने इस सफर की शुरुआत के बारे में बात करते हुए खिसाल जाफरी बताते हैं, "मुझे छात्र जीवन से ही सामाजिक कामों में गहरी दिलचस्पी थी। जब मैं कॉलेज में था, तब कुछ छात्रों की फीस का मसला मेरे सामने आया। उस एक छात्र की फीस का मसला सुलझाने के बाद मुझे लगा कि हमें तालीम और मेडिकल के क्षेत्र में काम करना चाहिए। इसलिए 20 साल की उम्र से ही मैंने समाज सेवा का काम शुरू कर दिया।"

तालीम का हक और स्कॉलरशिप का सहारा
पुणे को पूरी दुनिया में तालीम का मरकज़ माना जाता है। राज्य के कोने-कोने से, देहातों से, दूसरे राज्यों से और यहां तक कि विदेशों से भी हज़ारों छात्र अपने भविष्य के सपने लेकर यहां आते हैं। लेकिन प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले या उच्च शिक्षा लेने वाले कई होनहार छात्रों की माली हालत बहुत कमज़ोर होती है। अक्सर पैसों की कमी या सही रहनुमाई न मिलने की वजह से ये छात्र घबरा जाते हैं। ऐसे वक्त में खिसाल जाफरी की टीम उन्हें ज़हनी और माली सहारा देने का काम करती है।
छात्रों की इन परेशानियों पर बात करते हुए खिसाल जाफरी कहते हैं, "कई बार छात्र पढ़ाई या परीक्षा देने के लिए पुणे आते हैं। उन्हें किसी तरह की कोई रहनुमाई नहीं मिलती। गांव या दूसरे राज्य से आया कोई छात्र पुणे आने पर डरा हुआ होता है, हम उसे सेटल करने की कोशिश करते हैं। खास तौर पर गरीब और होनहार छात्रों को पैसों की कमी की वजह से कोई प्लेटफॉर्म नहीं मिल पाता, उन्हें हम स्कॉलरशिप के ज़रिए मदद करते हैं।" संविधान के अनुच्छेद 29 और 30 के तहत अल्पसंख्यक समाज को जो शैक्षणिक और दूसरे बुनियादी हक दिए गए हैं, वे उन्हें लागू करवाकर ज़रूरतमंद छात्रों तक तालीमी सहूलियतें पहुंचाने का काम करते हैं।
सेहत की फिक्र ही असली खिदमत
तेज़ी से बढ़ते शहरीकरण और बिगड़ते पर्यावरण की वजह से आज के वक्त में शहरों में सांस और दूसरी गंभीर बीमारियां बहुत तेज़ी से बढ़ रही हैं। ऐसे हालात में अस्पतालों के भारी-भरकम बिल और महंगे मेडिकल उपकरण आम इंसान की पहुंच से बाहर हो जाते हैं। खिसाल जाफरी ने पिछले 10 सालों से एक खास पहल शुरू की है। वह ज़रूरतमंद बीमारों को मेडिकल इलाज के लिए ज़रूरी ऑक्सीजन मशीनें, बेड और दूसरे जदीद मेडिकल उपकरण बिल्कुल मुफ्त मुहैया कराते हैं।
अपने इस मेडिकल काम के बारे में खिसाल बताते हैं, "मेट्रो शहर में रहते हुए पर्यावरण का बैलेंस नहीं रह पाता। इस वजह से बीमारों को वक्त पर ऑक्सीजन नहीं मिल पाती। ऐसे बीमारों को या जिन्हें मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर की ज़रूरत है, उन्हें ऑक्सीजन मशीन हो, बेड हो या दूसरी मेडिकल मशीनें, हम यह सब मुफ्त देने का काम पिछले 10 सालों से कर रहे हैं। हर बीमार को अच्छा इलाज मिले, यह उसका संवैधानिक हक है।"
सरकार की 'महात्मा ज्योतिराव फुले जन आरोग्य योजना' और 'आईपी' जैसी दूसरी फायदेमंद स्वास्थ्य योजनाओं का फायदा ज़मीनी स्तर पर और असली ज़रूरतमंद बीमारों तक कैसे पहुंचाया जाए, इसके लिए वह और उनकी टीम दिन-रात एक मध्यस्थ का काम करती है। खिसाल को शुरू में ही एहसास हो गया था कि यह सब काम अकेले करना नामुमकिन है। इसलिए उन्होंने 'यूनिक फाउंडेशन' और 'गाइडेंस फाउंडेशन' जैसी सामाजिक और शैक्षणिक संस्थाओं को एक साथ जोड़ा। राष्ट्रीय स्तर पर काम कर रहीं ऐसी 4 से 5 संस्थाओं के ज़रिए उनकी खिदमत का यह जाल आज पुणे शहर और उसके आस-पास के इलाकों में फैल चुका है।

'पुणे प्रथम सम्मानचिन्ह' बना मेहनत का इनाम
पिछले 20 सालों से लगातार सामाजिक, शैक्षणिक, सेहत और नागरिकों के हक की हिफाज़त के लिए काम कर रहे इस कार्यकर्ता के काम को आखिरकार पुणे नगर निगम ने सलाम किया। 80वें स्वतंत्रता दिवस के खास मौके पर पुणे शहर की मेयर मंजूषा नागपुरे ने खिसाल जाफरी को "पुणे प्रथम सम्मानचिन्ह" देकर सम्मानित किया। इस बड़े सम्मान पर खुशी ज़ाहिर करते हुए खिसाल जाफरी कहते हैं, "मेरे काम को, खास तौर पर ऑक्सीजन और मेडिकल सामान मुफ्त बांटने के काम को पुणे नगर निगम ने पहचाना। नगर निगम ने शहर के नागरिकों और समाज सेवा को सबसे ऊपर रखने के लिए मुझे यह सम्मान दिया है। इस सम्मान से मुझे आगे के काम के लिए और ज़्यादा ताकत मिली है।" शहर का तेज़ी से बदलता कल्चर, सेहत की बढ़ती परेशानियां और तालीम में बढ़ते कंपटीशन के बीच, खिसाल जाफरी जैसे सामाजिक सोच रखने वाले कार्यकर्ता पुणे शहर की असली ताकत साबित हो रहे हैं।