मलिक असगर हाशमी/ नई दिल्ली
कला और कलाकारों की कोई सरहद नहीं होती यह बात अक्सर सांस्कृतिक मंचों पर कही जाती है ,लेकिन जब कोई मशहूर हस्ती इस सच्चाई को बयां करती है तो किस तरह का भूचाल आ सकता है इसकी बानगी इन दिनों पड़ोसी देश पाकिस्तान में देखने को मिल रही है।
अस्सी और नब्बे के दशक में अपनी सुरीली आवाज और बेहतरीन अभिनय से भारत और पाकिस्तान दोनों मुल्कों में करोड़ों दिलों पर राज करने वाली प्रसिद्ध गायिका और अभिनेत्री सलमा आगा इन दिनों पाकिस्तानी मीडिया और सोशल मीडिया के एक बड़े वर्ग के निशाने पर आ गई हैं।
हाल ही में Mawra Muattar से बातचीत में उन्होंने अपने अतीत नागरिकता और कला को लेकर कुछ ऐसी बातें कह दीं जिसके बाद वहां विवादों का एक ऐसा बवंडर उठ खड़ा हुआ जिसने उनके पूरे पारिवारिक इतिहास और चरित्र को ही कठघरे में खड़ा कर दिया है।
बेटी साशा आगा के साथ सलमा आगा
यह सारा विवाद तब शुरू हुआ जब चरचित्र बाॅलीवुड फिल्म 'निकाह' की अभिनेत्री एवं गायिका सलमा आगा ने इंटरव्यू के दौरान खुलकर बात की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा-" उनका परिवार कभी भी पाकिस्तानी नागरिकता रखता ही नहीं था। उनके मुताबिक उनका परिवार काफी पहले लंदन शिफ्ट हो चुका था और उनके परिवार के तमाम सदस्यों के पास ब्रिटेन का पासपोर्ट मौजूद है।"
उन्होंने यह भी बताया कि उनकी मां और दादी का ताल्लुक अमृतसर से रहा है और उन्होंने केवल पाकिस्तान में रहकर काम किया। उनके अनुसार-" पाकिस्तान में बिताया गया वह दौर उनकी जिंदगी का बेहद खूबसूरत और यादगार हिस्सा रहा है जहां आज भी उनके कई अच्छे दोस्त मौजूद हैं। उन्हें वहां के कलाकारों तकनीशियनों और नाटकों से बेहद लगाव है।"
उनका यह भी मानना है कि पाकिस्तानी ड्रामे भारत में भी बहुत चाव से देखे जाते हैं। उनके पास भारतीय नागरिकता नहीं होने के बावजूद एक विशेष भारतीय कार्ड और ब्रिटिश पासपोर्ट है जिसकी बदौलत उन्हें भारत में आने जाने और रहने की कानूनी अनुमति मिलती है।
जैसे ही सलमा आगा के ये विचार सार्वजनिक हुए पाकिस्तान के भीतर भूचाल आ गया। वहां के सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं ने उन्हें ट्रोल करना शुरू कर दिया और देखते ही देखते यह मामला व्यक्तिगत हमलों में तब्दील हो गया।
बात सिर्फ सोशल मीडिया तक ही सीमित नहीं रही बल्कि पाकिस्तानी मुख्यधारा के मीडिया चैनलों ने भी इस पर एक अलग ही अभियान छेड़ दिया। 'शमा' नामक एक पाकिस्तानी न्यूज चैनल ने अपनी डिबेट और डिजिटल प्रसारणों में सलमा आगा को लेकर ऐसे सनसनीखेज दावे सामने रखे जो सामान्य पत्रकारिता की मर्यादाओं को लांघते हुए सीधे तौर पर उनके चरित्रहनन की हदें पार करते नजर आए। चैनल की ओर से प्रसारित किए गए दावों ने न केवल सलमा आगा बल्कि उनके पूरे खानदान के अतीत को एक नए विवाद के केंद्र में ला दिया है।
विकिपीडिया और आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, " सलमा आगा का जन्म 25 अक्टूबर सन उन्नीस सौ छप्पन को मुंबई में हुआ था। उनके पिता लियाकत गुल आगा मूल रूप से अमृतसर के एक उर्दू भाषी पंजाबी पठान परिवार से ताल्लुक रखते थे और कालीन का व्यापार करते थे।
परिवार की पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो उनके नाना जुगल किशोर मेहरा थे जो मूल रूप से एक पंजाबी हिंदू थे जिन्होंने बाद में इस्लाम धर्म अपना लिया और अहमद सलमान के नाम से पाकिस्तान चले गए। जुगल किशोर मेहरा का संबंध सीधे तौर पर बॉलीवुड के प्रतिष्ठित कपूर परिवार से जुड़ता है क्योंकि उनकी मां रामसरनी कपूर राज कपूर शम्मी कपूर और शशि कपूर के पिता की बहन थीं।
इस तरह से सलमा आगा का रिश्ता बॉलीवुड के राज कपूर खानदान से भी खून के रिश्ते जैसा ही है। बचपन में जब राज कपूर ने उन्हें देखा था तो वे उन्हें अपनी फिल्म में लेना चाहते थे, लेकिन उनके नाना जुगल किशोर मेहरा ने इसका कड़ा विरोध किया।
बाद में लंदन में नीतू सिंह और ऋषि कपूर के विवाह समारोह के दौरान राज कपूर की मुलाकात फिल्मकार बीआर चोपड़ा से हुई और उन्होंने सलमा आगा को अपनी ब्लॉकबस्टर फिल्म 'निकाह' के लिए चुन लिया जिसमें उन्होंने जीनत अमान की जगह मुख्य भूमिका निभाई थी और उनका गाया गाना 'दिल के अरमान...' आज भी लोगों की जुबान पर है। इसके विपरीत पाकिस्तानी न्यूज चैनल 'शमा' ने अपने डिजिटल मंच पर एक बिल्कुल अलग और सनसनीखेज कहानी गढ़ी है।
चैनल का दावा है कि सलमा आगा की मां जिन्हें नसीम या जरीना कहा जाता है और उनके पिता लियाकत गुल आगा की शादी हुई थी। चैनल के अनुसार जरीना और सलमा की सौतेली मां पारो कश्मीर के तत्कालीन महाराजा हरि सिंह के दरबार में नृत्य किया करती थीं।
आरोप लगाया गया है, " उस दौर में वे लोग एक बेशकीमती हीरे समेत बत्तीस नायाब आभूषण चुराकर भाग निकले और पाकिस्तान आ बसे।' देश विभाजन के ठीक पहले या बाद की इस कहानी में यह भी जोड़ा गया है कि जब महाराजा हरि सिंह को अपने शाही खजाने से चोरी की इस घटना की भनक लगी और उन्होंने अपने जेवरात वापस मांगे तो इन महिलाओं ने यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि राजा ने उन्हें ये चीजें उपहार में दी हैं इसलिए वे इन्हें वापस नहीं लौटाएंगी।
चैनल के दावों का सिलसिला यहीं नहीं थमता। इसमें आगे कहा गया है कि जब सलमा आगा के माता पिता उन कीमती जेवरात को लेकर लंदन जाना चाहते थे तो इसके लिए एक लंबी साजिश रची गई।
पाकिस्तान से कोई भी कीमती सामान या बहुमूल्य वस्तु बाहर ले जाने के लिए स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान की कड़ी अनुमतियों और कागजी औपचारिकताओं से गुजरना पड़ता है। चूंकि इनके पास वैध दस्तावेज नहीं थे, इसलिए उन्होंने एक नायाब तरकीब निकाली। दावा किया गया कि 1967 में सिविल सेवा परीक्षा यानी सीएसएस में टॉप करने वाले और पाकिस्तानी विदेश सेवा के अधिकारी Javed Amir को इस काम के लिए फंसाया गया।
जावेद रांची के एक प्रतिष्ठित और संभ्रांत परिवार से ताल्लुक रखते थे। किसी तरह उनके परिवार को मनाकर सन 1970 में कराची में सलमा आगा का निकाह जावेद से करा दिया गया। इस शादी के तुरंत बाद Javed Amir की तैनाती ब्रिटेन के ब्रसेल्स में कर दी गई। आरोप लगाया गया है कि इस कूटनीतिक और आधिकारिक पासपोर्ट की आड़ में सलमा आगा महाराजा हरि सिंह के यहां से चुराए गए उन 32 बेशकीमती हीरों और जेवरात को अपने साथ ब्रिटेन ले जाने में कामयाब रहीं।
ब्रिटेन पहुंचने के बाद दोनों के बीच दूरियां बढ़ने लगीं। दावों के मुताबिक, " सलमा आगा ने ब्रिटिश उच्चायोग या वहां के कानूनी प्रावधानों का हवाला देते हुए पति जावेद के खिलाफ खुला के लिए अर्जी दाखिल कर दी। उन्होंने दलील दी कि Javed Amir की तनख्वाह बहुत कम है और उनके साथ अपनी जिंदगी की गाड़ी आगे बढ़ाना उनके बस की बात नहीं है।"
इस तलाक की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए पाकिस्तानी उच्चायोग को भी बीच में दखल देना पड़ा। खुला की अनुमति मिलने से पहले सलमा आगा को अपना पाकिस्तानी पासपोर्ट भी सरेंडर करना पड़ा था।
चैनल का यह भी दावा है कि तलाक की कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन बेशकीमती जेवरात को बाजार में बेचकर लंदन के हेराल्ड मार्केट कॉम्प्लेक्स में कालीन के व्यापार की नींव रखी गई। ऐसा कहा जाता है कि सलमा आगा के पिता लियाकत गुल द्वारा स्थापित वह कालीन का कारोबार आज भी लंदन में सफलतापूर्वक चल रहा है।

इन सनसनीखेज दावों के सामने आने के बाद सोशल मीडिया और मीडिया के गलियारों में बहस छिड़ गई है। एक तरफ जहां कई लोग इस बात पर ऐतराज जता रहे हैं कि किस तरह बिना पुख्ता ऐतिहासिक सबूतों के एक प्रतिष्ठित कलाकार की मां और परिवार को चोर साबित करने की कोशिश की जा रही है तो वहीं दूसरी तरफ कुछ लोग सलमा आगा के उस दावे का मजाक उड़ा रहे हैं जिसमें उन्होंने खुद को अमृतसर में पैदा होने और भारतीय संस्कृति से जुड़ा होने की बात कही थी।
इस पूरे प्रकरण में एक नया मोड़ तब और आ गया जब यह जानकारी सामने आई कि Javed Amir वर्तमान में अमेरिका में रह रहे हैं और उन्होंने 'मॉडर्न सोप' नामक एक पुस्तक भी लिखी है जिसमें उन्होंने अपने जीवन के अनुभवों और कथित व्यक्तिगत धोखाधड़ी का जिक्र किया है।
यह पूरा विवाद इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण है कि दक्षिण एशिया की राजनीति और मनोरंजन जगत में किस तरह से व्यक्तिगत इतिहास को राजनीतिक और राष्ट्रीय बहसों में घसीट लिया जाता है।
जब कोई कलाकार अपनी जड़ों या कला को सीमाओं से परे बताता है तो किस प्रकार उसे संकीर्ण राष्ट्रवाद और ट्रोलिंग का सामना करना पड़ता है। सलमा आगा जैसी अभिनेत्री जिन्होंने अपनी कला के दम पर दोनों देशों में बेइंतहा मोहब्बत और सम्मान हासिल किया आज वे जिस दौर से गुजर रही हैं वह इस बात को रेखांकित करता है कि मीडिया ट्रायल किस हद तक किसी व्यक्ति के निजी जीवन और गरिमा को प्रभावित कर सकता है।