12 Rabi ul Awwal: जानिए क्यों खास है दुनिया के लिए यह दिन

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 21-08-2026
12 Rabi-ul-Awwal: Find out why this day is significant for the world.
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ईमान सकीना

इतिहास में कुछ ऐसे पल आते हैं जो इंसानियत की दिशा हमेशा के लिए बदल देते हैं। कुछ बदलाव बड़ी लड़ाइयों और साम्राज्यों के उत्थान से आते हैं। लेकिन कुछ बदलाव बेहद शांत तरीके से एक साधारण घर से शुरू होते हैं। पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब (PBUH) का इस दुनिया में आना एक ऐसा ही ऐतिहासिक मोड़ था।

हर साल 12 रबी-उल-अव्वल के मुबारक मौके पर पूरी दुनिया के मुसलमान उस शख्सियत को याद करते हैं, जिन्हें अल्लाह ने पूरी कायनात के लिए रहमत बनाकर भेजा था। उनके संदेश ने दिलों, समाजों और पूरी तहजीब की तस्वीर बदल दी।

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पैगंबर साहब के आने से पहले दुनिया की हालत

पैगंबर साहब की पैदाइश से पहले अरब का समाज आपसी कबीलाई लड़ाइयों में बंटा हुआ था। वहां कमजोरों पर जुल्म करना आम बात थी। महिलाओं को उनका हक और सम्मान नहीं मिलता था। गरीबों की सुध लेने वाला कोई नहीं था। अज्ञानता और अंधविश्वास ने समाज को जकड़ रखा था।

लेकिन यह अंधेरा सिर्फ अरब तक सीमित नहीं था। उस दौर में पूरी इंसानी दुनिया अन्याय, असमानता, आपसी संघर्ष और आध्यात्मिक भ्रम से जूझ रही थी।

इंसानियत को मिला रोशनी का पैगाम

फिर मोहम्मद साहब (PBUH) इस दुनिया में तशरीफ लाए। उनका आना महज किसी बच्चे का जन्म नहीं था। यह मानव इतिहास के नए अध्याय की शुरुआत थी।पवित्र कुरान में पैगंबर साहब के बारे में कहा गया है कि उन्हें "पूरी कायनात के लिए रहमत" बनाकर भेजा गया। इसका मतलब साफ है कि उनका संदेश किसी एक कबीले, देश या नस्ल तक सीमित नहीं था। वह पूरी मानव जाति के लिए था।

दुनिया ने पैगंबर साहब के जरिए कोई राजनीतिक ताकत या भौतिक तरक्की हासिल नहीं की। दुनिया को जो सबसे बड़ी चीज मिली, वह थी सच्ची हिदायत और रोशनी।

जिंदगी के हर सवाल का मिला जवाब

पैगंबर साहब के आने से इंसानों के उन तमाम सवालों के जवाब मिल गए, जो सदियों से उन्हें परेशान कर रहे थे।

  • हमें किसने पैदा किया?
  • हमारी जिंदगी का मकसद क्या है?
  • इंसान की असली इज्जत किस चीज में है?
  • हमारे एक-दूसरे पर क्या अधिकार हैं?
  • मौत के बाद क्या होगा?

उन्होंने सिखाया कि सब लोग एक ही ईश्वर के बंदे हैं। कोई भी इंसान धन, कबीले, नस्ल या सामाजिक रुतबे की वजह से किसी दूसरे से ऊंचा नहीं है। असली इज्जत अच्छे चरित्र और नेकी में है।

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महिलाओं को दिलाया उनका मुकाम

पैगंबर साहब ने महिलाओं को देखने और उनके साथ बर्ताव करने के तरीके को पूरी तरह बदल दिया। उन्होंने सिखाया कि बेटियां कोई बोझ नहीं हैं। पत्नियां किसी की जागीर नहीं हैं। मांओं का दर्जा सबसे ऊंचा है। उन्होंने महिलाओं को विरासत, संपत्ति, शिक्षा, शादी की रजामंदी और सामाजिक सम्मान का मुकाम दिलाया।

कुरान याद दिलाता है कि पुरुष और महिला दोनों की उत्पत्ति एक ही मूल स्रोत से हुई है।

खुद पैगंबर साहब का जीवन कोमलता और सम्मान की मिसाल था। वह घर के कामों में हाथ बंटाते थे, महिलाओं की बात सुनते थे, अपने साथियों से सलाह लेते थे और बच्चों से बेइंतहा प्यार करते थे। उन्होंने सिखाया कि झूठ बोलने से आसान सच बोलना है, गुस्से की जगह सब्र करना है और ताकत होने के बावजूद विनम्र रहना है।

आज के दौर में भी प्रासंगिक है यह पैगाम

आज की दुनिया में जहां लोगों को उनकी गलतियों के आधार पर आंका जाता है, वहां पैगंबर साहब की सीख हमें उम्मीद देती है। उनका संदेश सिर्फ एक दिन का जश्न नहीं है। उनकी विरासत वहां जिंदा है जहां सच बोला जाता है, किसी असी की देखभाल की जाती है, भूखे को खाना खिलाया जाता है और गुस्से के वक्त माफ करने का रास्ता चुना जाता है।

12 रबी-उल-अव्वल हमें यह याद दिलाता है कि अंधेरा चाहे कितना भी गहरा हो, उसका अंत तय है। रोशनी सबसे अनपेक्षित जगह से भी आ सकती है। इस रोशनी का सम्मान करने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि हम उनकी शिक्षाओं को अपने दैनिक जीवन में उतारें।

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