जन्मदिन पर खास: कैसे STF के जरिए सचिन तेंदुलकर बदल रहे हैं भारत के बच्चों का भविष्य

Story by  ओनिका माहेश्वरी | Published by  onikamaheshwari | Date 23-04-2026
Birthday Special: How Sachin Tendulkar is Changing the Future of India's Children Through the STF
Birthday Special: How Sachin Tendulkar is Changing the Future of India's Children Through the STF

 

ओनिका माहेश्वरी/ नई दिल्ली  

चैंपियन और रिकॉर्ड्स के बादशाह, क्रिकेट के किंग सचिन तेंदुलकर सिर्फ मैदान पर ही नहीं, बल्कि समाज में भी एक सच्चे हीरो के रूप में अपनी पहचान बना चुके हैं। आज उनके जन्मदिन के मौके पर यह कहना बिल्कुल सही होगा कि वह केवल क्रिकेट के महानायक नहीं, बल्कि लाखों ज़िंदगियों को बदलने वाले एक प्रेरणास्रोत भी हैं। सचिन तेंदुलकर आज भी अपने सामाजिक कार्यों के जरिए लगातार समाज के कमजोर वर्गों के साथ खड़े हैं। उनकी परोपकारी गतिविधियों का केंद्र है “सचिन तेंदुलकर फाउंडेशन (STF)”, जिसकी स्थापना 2019 में उन्होंने अपनी पत्नी और प्रसिद्ध बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अंजलि तेंदुलकर के साथ मिलकर की थी। इस फाउंडेशन का उद्देश्य है भारत के वंचित और जरूरतमंद बच्चों को स्वास्थ्य, शिक्षा और खेल के माध्यम से सशक्त बनाना।

यह फाउंडेशन सिर्फ एक संस्था नहीं, बल्कि एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जो लोगों, संस्थाओं और संसाधनों को जोड़कर बड़े स्तर पर सामाजिक परिवर्तन लाने का काम करता है। सचिन तेंदुलकर का मानना है कि हर बच्चे को जीवन में आगे बढ़ने का समान अवसर मिलना चाहिए, और इसी सोच के साथ STF अपने तीन मुख्य स्तंभों हेल्थ, एजुकेशन और स्पोर्ट्स पर काम करता है।

स्वास्थ्य के क्षेत्र में STF का दृष्टिकोण बेहद व्यापक और समग्र है। फाउंडेशन केवल इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि पोषण, प्रिवेंटिव केयर और बेहतर मेडिकल सुविधाओं तक पहुंच सुनिश्चित करने पर जोर देता है। अब तक 43,000 से अधिक बच्चों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की जा चुकी हैं। डॉ. अंजलि तेंदुलकर के अनुभव और मार्गदर्शन से यह पहल और मजबूत हुई है, क्योंकि उन्होंने अपने करियर में बच्चों की स्वास्थ्य चुनौतियों को बहुत करीब से देखा है।

Sara Tendulkar joins Sachin Tendulkar Foundation as Director | Off the  field News - Times of India

शिक्षा STF के मिशन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। सचिन तेंदुलकर अपने पिता प्रोफेसर रमेश तेंदुलकर से गहराई से प्रेरित रहे हैं, जो सीमित संसाधनों के बावजूद छात्रों को पढ़ाने के लिए समर्पित थे। इसी प्रेरणा के चलते STF जरूरतमंद बच्चों को स्कॉलरशिप, सप्लीमेंट्री एजुकेशन और कॉलेज के लिए तैयार करने में मदद करता है। फाउंडेशन का मानना है कि एक मजबूत शिक्षा प्रणाली ही देश के भविष्य को बदल सकती है। इसलिए यह बच्चों को न केवल स्कूल शिक्षा, बल्कि जीवन के लिए जरूरी कौशल भी प्रदान करता है।

खेल के क्षेत्र में सचिन तेंदुलकर का विज़न बेहद स्पष्ट है भारत को “स्पोर्ट्स लविंग” से “स्पोर्ट्स प्लेइंग” राष्ट्र बनाना। उनका मानना है कि हर बच्चे को प्रोफेशनल खिलाड़ी बनने की जरूरत नहीं, लेकिन खेल से मिलने वाले मूल्य अनुशासन, टीमवर्क और धैर्य—हर क्षेत्र में सफलता दिला सकते हैं। इसी सोच के तहत 2025-2026 में STF ने कई बड़े कदम उठाए हैं। छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले में 50 स्कूल प्लेग्राउंड विकसित किए जा रहे हैं, ताकि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों के बच्चों को खेल के बेहतर अवसर मिल सकें। यह पहल देश में ग्रासरूट स्पोर्ट्स को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 

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इसके अलावा, मेघालय सरकार और गेट्स फाउंडेशन के साथ मिलकर बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार के लिए साझेदारी की गई है। वहीं मध्य प्रदेश में NGO “परिवार” के माध्यम से 560 आदिवासी बच्चों को शिक्षा और देखभाल की सुविधा दी जा रही है। स्थानीय खेल प्रतिभाओं को बढ़ावा देने के लिए सचिन तेंदुलकर “मैदान कप” जैसे आयोजनों का समर्थन कर रहे हैं और ग्रामीण क्षेत्रों में स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास पर भी जोर दे रहे हैं।

सचिन तेंदुलकर का सामाजिक योगदान केवल STF तक सीमित नहीं है। वह पिछले 20 वर्षों से यूनिसेफ के साथ जुड़े हुए हैं और एक रिकॉर्ड अवधि तक ‘गुडविल एंबेसडर’ के रूप में कार्य कर रहे हैं। 2003 में उन्होंने पोलियो उन्मूलन अभियान से अपनी यात्रा शुरू की थी। इसके बाद 2008 में उन्होंने स्वच्छता और हाइजीन के प्रति जागरूकता फैलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 2013 में उन्हें दक्षिण एशिया के लिए यूनिसेफ एंबेसडर नियुक्त किया गया, जहां उन्होंने स्वच्छता और स्वास्थ्य के संदेश को व्यापक स्तर पर पहुंचाया।

स्वच्छ भारत मिशन के दौरान उन्होंने “टीम स्वच्छ भारत” अभियान का नेतृत्व किया, जो देश के कोने-कोने तक पहुंचा। उनके इन प्रयासों के लिए उन्हें 2020 में “मोस्ट इफेक्टिव स्वच्छ भारत एंबेसडर” पुरस्कार से सम्मानित किया गया। सचिन तेंदुलकर ने कई बार दूरदराज़ क्षेत्रों का दौरा कर बच्चों से सीधे संवाद किया है। महाराष्ट्र के रत्नागिरी में दृष्टिबाधित बच्चों से मुलाकात, मध्य प्रदेश के गांवों में जाकर बच्चों को प्रेरित करना और नेपाल में ‘बैट फॉर ब्रेन डेवलपमेंट’ अभियान में भाग लेना ये सभी उनके जमीनी जुड़ाव के उदाहरण हैं।

कोविड-19 महामारी के दौरान भी सचिन तेंदुलकर ने जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे आकर मिसाल पेश की। उन्होंने हजारों लोगों को राशन और आर्थिक सहायता प्रदान की। मुंबई के शिवाजी नगर और गोवंडी में NGO “अपनालय” के जरिए करीब 5,000 लोगों तक मदद पहुंचाई। इसके अलावा, 4,000 से अधिक जरूरतमंदों को वित्तीय सहायता दी गई और PM-CARES फंड तथा महाराष्ट्र मुख्यमंत्री राहत कोष में उदारतापूर्वक योगदान दिया गया।

बांद्रा ईस्ट में 6,300 झुग्गीवासियों के लिए चलाए गए राहत अभियान में भी उनका योगदान महत्वपूर्ण रहा, जहां 1,250 परिवारों को राशन और जरूरी सामान उपलब्ध कराया गया। आज सचिन तेंदुलकर फाउंडेशन की टीम में डॉ. अंजलि तेंदुलकर (डायरेक्टर और को-फाउंडर), सारा तेंदुलकर (डायरेक्टर), अथुल पिल्लई, वेंकटरमण आर और मीनल वैद्य जैसे सदस्य शामिल हैं, जो इस मिशन को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। सचिन तेंदुलकर का जीवन यह साबित करता है कि असली महानता केवल खेल के मैदान में रिकॉर्ड बनाने से नहीं आती, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव लाने से आती है। आज, उनके जन्मदिन पर, यह कहना बिल्कुल सही होगा कि उनका बल्ला भले ही शांत हो गया हो, लेकिन उनका योगदान आज भी लाखों बच्चों के सपनों को उड़ान दे रहा है।