नूरुल हक/ अगरतला
त्रिपुरा में विधानसभा उपचुनावों का शोर थम चुका है। मतदान के बाद अब सबकी नजरें नतीजों पर टिकी हैं। राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा आम है कि सत्तारूढ़ भाजपा का पलड़ा भारी है। धर्मनगर सीट से भाजपा उम्मीदवार जहर चक्रवर्ती की जीत की संभावनाएं प्रबल मानी जा रही हैं। हालांकि औपचारिक तौर पर परिणाम आने और विधायक की कुर्सी तक पहुंचने में अभी थोड़ा वक्त है। लेकिन जहर चक्रवर्ती ने साबित कर दिया है कि राजनीति से ऊपर भी कुछ संस्कार होते हैं। चुनावी जीत-हार के बीच उन्होंने जिस सामाजिक और धार्मिक शिष्टाचार का परिचय दिया है उसकी पूरे क्षेत्र में तारीफ हो रही है।
स्टेशन पर दिखा भाईचारे का नजारा
रविवार को धर्मनगर रेलवे स्टेशन का नजारा बेहद खास था। यह मौका किसी राजनीतिक रैली का नहीं बल्कि आस्था और दुआओं का था। धर्मनगर से मुस्लिम समुदाय के कुछ तीर्थयात्री पवित्र मक्का की हज यात्रा के लिए रवाना हो रहे थे। उन्हें विदा करने के लिए वहां उनके परिवार वालों के साथ भाजपा उम्मीदवार जहर चक्रवर्ती भी पहुंचे। जहर चक्रवर्ती सिर्फ एक राजनेता के तौर पर नहीं बल्कि एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में वहां मौजूद थे।
उन्होंने हज यात्रियों से मुलाकात की और उनके साथ शिष्टाचार का आदान-प्रदान किया। उन्होंने सभी यात्रियों को गले लगाकर और हाथ मिलाकर बधाई दी। उन्होंने तीर्थयात्रियों से आग्रह किया कि जब वे पवित्र मक्का पहुंचें तो वहां सबकी सलामती के लिए अल्लाह से प्रार्थना करें।
चुनाव के तुरंत बाद और नतीजों से ठीक पहले भाजपा उम्मीदवार का यह कदम मुस्लिम समुदाय के बीच काफी सकारात्मक संदेश दे गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह व्यवहार जहर चक्रवर्ती की उस छवि को पुख्ता करता है जो वे सालों से एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में बनाते आए हैं।
राजनीति से परे इंसानियत का रिश्ता
आमतौर पर चुनावों के बाद उम्मीदवार आराम करते हैं या जोड़-घटाव में व्यस्त रहते हैं। लेकिन जहर चक्रवर्ती का यह अंदाज अलग था। धर्मनगर के नागरिकों की राय है कि उन्होंने चुनाव से पहले भी और चुनाव के बाद भी अपने शिष्टाचार में कोई बदलाव नहीं किया है।
हज यात्रियों के साथ उनकी यह विशेष भेंट इस बात का प्रमाण है कि उनके लिए सांप्रदायिक सौहार्द राजनीति से बढ़कर है। इस घटना ने धर्मनगर में भाईचारे की एक नई मिसाल पेश की है। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने इस पहल का स्वागत किया है और इसे त्रिपुरा की गंगा-जमुनी तहजीब का हिस्सा बताया है।
त्रिपुरा से हज यात्रा का औपचारिक आगाज
वहीं दूसरी ओर त्रिपुरा राज्य में इस साल की हज यात्रा का आधिकारिक तौर पर शुभारंभ हो चुका है। सोमवार को राज्य से हज यात्रियों का पहला जत्था मक्का के लिए रवाना हुआ। इससे पहले रविवार शाम को अगरतला के मेला मैदान स्थित हज भवन में एक भव्य उद्घाटन समारोह का आयोजन किया गया था। यह समारोह उन सभी जायरीन के लिए था जो अपनी जिंदगी की सबसे पवित्र यात्रा पर निकल रहे हैं।
समारोह में त्रिपुरा के कई गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए। इनमें त्रिपुरा अल्पसंख्यक सहकारी विकास निगम के अध्यक्ष जसीम उद्दीन और त्रिपुरा राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष मुबाशर अली प्रमुख थे। साथ ही अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के विशेष सचिव और निदेशक निर्मल अधिकारी भी कार्यक्रम में मौजूद रहे। पूरे कार्यक्रम की अध्यक्षता त्रिपुरा राज्य हज समिति के अध्यक्ष शाह आलम ने की।
सफर की चुनौतियां और उम्मीदें
हज समिति के अध्यक्ष शाह आलम ने इस अवसर पर भावुक अपील की। उन्होंने तीर्थयात्रियों, समिति के सदस्यों और हज भवन के अधिकारियों से कहा कि इस महान आयोजन को सफल बनाने के लिए सभी का सहयोग जरूरी है। उन्होंने जायरीन को यात्रा के दौरान बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में बताया और उनके सुखद सफर की कामना की।
आंकड़ों की बात करें तो इस साल त्रिपुरा से सरकारी कोटे के तहत कुल 75हज यात्री मक्का जा रहे हैं। इसमें एक सरकारी प्रतिनिधि भी शामिल है जो पूरी यात्रा के दौरान यात्रियों की सहायता के लिए मौजूद रहेगा। इस दल में 55पुरुष और 19महिलाएं शामिल हैं। यह सभी यात्री पहले अगरतला से हवाई मार्ग के जरिए कोलकाता पहुंचेंगे। कोलकाता के बाद उनकी मुख्य हज उड़ान शुरू होगी जो उन्हें सीधे सऊदी अरब लेकर जाएगी।
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बदलता त्रिपुरा और आपसी विश्वास
त्रिपुरा जैसे राज्य में जहां विभिन्न समुदायों के लोग मिल-जुलकर रहते हैं वहां इस तरह के आयोजनों का बहुत महत्व है। हज भवन में आयोजित समारोह में मौजूद सरकारी अधिकारियों और सामाजिक नेताओं की उपस्थिति यह बताती है कि प्रशासन अल्पसंख्यकों के कल्याण और उनकी धार्मिक भावनाओं के प्रति गंभीर है। यात्रियों के चेहरों पर मक्का जाने की खुशी और आंखों में विदाई के आंसू साफ देखे जा सकते थे।
जहर चक्रवर्ती द्वारा धर्मनगर स्टेशन पर दी गई विदाई और अगरतला में हुआ यह सरकारी समारोह एक ही तस्वीर के दो पहलू हैं। एक तरफ व्यक्तिगत प्रयास है तो दूसरी तरफ संस्थागत जिम्मेदारी। यह दोनों मिलकर यह संदेश देते हैं कि चुनाव आते-जाते रहेंगे लेकिन समाज का ताना-बाना आपसी सम्मान और विश्वास पर ही टिका रहेगा। धर्मनगर और पूरे त्रिपुरा की जनता आज जहर चक्रवर्ती के इस व्यवहार की चर्चा कर रही है जो न केवल उन्हें एक नेता बल्कि एक बड़े व्यक्तित्व के रूप में स्थापित करता है।
अब जबकि नतीजों का इंतजार है जहर चक्रवर्ती के इस 'स्पोर्ट्समैन स्पिरिट' ने यह तो तय कर दिया है कि वे जनता के दिलों को जीतने में पहले ही कामयाब हो चुके हैं। हज पर जाने वाले यात्रियों ने भी उन्हें अपनी दुआओं में याद रखने का भरोसा दिया है। भाईचारे की यह सुगंध चुनाव परिणामों के शोर में कहीं दबने वाली नहीं है बल्कि यह त्रिपुरा के भविष्य के लिए एक नई उम्मीद की किरण है।