अब्दुल कदीर बने फोर्ब्स के ‘लीडर ऑफ टुमारो’

Story by  मलिक असगर हाशमी | Published by  [email protected] | Date 18-04-2026
Abdul Qadir Named Forbes’ ‘Leader of Tomorrow’
Abdul Qadir Named Forbes’ ‘Leader of Tomorrow’

 

मलिक असगर हाशमी /नई दिल्ली

देश की राजनीति में महिला बिल और अंतरराष्ट्रीय मंच पर ईरान अमेरिका तनाव की गूंज के बीच एक खबर चुपचाप आई, लेकिन इसका असर गहरा है। यह खबर शिक्षा, मेहनत और खामोश बदलाव की कहानी कहती है। Dr. Abdul Qadeer को Forbes India ने 2026 के लिए “लीडर्स ऑफ टुमारो” में शामिल किया है। यह सिर्फ एक सम्मान नहीं है। यह उस सोच की जीत है जो कहती है कि बदलाव बंद कमरों में नहीं, कक्षाओं में होता है।

यह खबर खास तौर पर उन लोगों के लिए अहम है जो बिना शोर किए समाज में काम कर रहे हैं। खासकर शिक्षा के क्षेत्र में। ऐसे लोग जो बच्चों का भविष्य बनाने में लगे हैं, लेकिन चर्चा में नहीं आते।

कर्नाटक के बीदर से शुरू हुआ Shaheen Group of Institutions आज एक बड़े नेटवर्क में बदल चुका है। 1989 में शुरू हुई यह पहल अब 100 से ज्यादा संस्थानों तक पहुंच चुकी है। 45 हजार से अधिक छात्र यहां पढ़ रहे हैं। यह आंकड़ा सिर्फ संख्या नहीं है। यह उन सपनों की गिनती है जिन्हें एक दिशा मिली।

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अब्दुल कदीर की कहानी साधारण पृष्ठभूमि से शुरू होती है। लेकिन उनका नजरिया असाधारण है। उन्होंने हमेशा शिक्षा को बदलाव का सबसे मजबूत हथियार माना। खासकर उन बच्चों के लिए जो किनारे पर खड़े हैं। जो संसाधनों की कमी से जूझते हैं। जो अक्सर सिस्टम से बाहर हो जाते हैं।

उनकी संस्था का एक खास मॉडल है। इसका नाम है AICU यानी एकेडमिक इंटेंसिव केयर यूनिट। यह उन बच्चों के लिए है जो पढ़ाई छोड़ चुके हैं या असफल रहे हैं। यहां उन्हें दोबारा मुख्यधारा में लाने की कोशिश होती है। यह काम आसान नहीं है। लेकिन नतीजे उम्मीद जगाते हैं।

अब्दुल कदीर का फोकस सिर्फ किताबों तक सीमित नहीं है। वह शिक्षा को जीवन से जोड़ते हैं। उनका मानना है कि आधुनिक शिक्षा और नैतिक मूल्यों का संतुलन जरूरी है। इसी सोच के साथ उन्होंने ऐसा पाठ्यक्रम तैयार किया जिसमें विज्ञान भी है और संस्कार भी।

उनकी एक और बड़ी पहल है मदरसा छात्रों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ना। उन्होंने कई बार कहा है कि शिक्षा का दायरा सीमित नहीं होना चाहिए। हर बच्चे को बराबर मौका मिलना चाहिए। चाहे वह किसी भी पृष्ठभूमि से आता हो।

वह कहते हैं कि हमारी कोशिश रहती है कि जो बच्चे आर्थिक रूप से कमजोर हैं, उन्हें भी बेहतर शिक्षा मिले। जो बच्चे असफल हो गए हैं, उन्हें नई तकनीक के साथ फिर से तैयार किया जाए। यही वजह है कि उनकी संस्था में मेडिकल शिक्षा पर खास जोर है।

शाहीन ग्रुप ने मेडिकल और प्रोफेशनल कोर्स में कई छात्रों को आगे बढ़ाया है। कई छात्रों ने देश के बड़े संस्थानों में जगह बनाई है। यह सफलता सिर्फ संस्थान की नहीं है। यह उस विश्वास की जीत है जो माता पिता अपने बच्चों के लिए रखते हैं।

अब्दुल कदीर ने लड़कियों की शिक्षा पर भी खास ध्यान दिया है। उनका मानना है कि अगर एक लड़की पढ़ती है तो पूरा परिवार आगे बढ़ता है। इसलिए उनकी संस्था में लड़कियों को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर दिया जाता है।

फोर्ब्स की इस सूची में अलग अलग क्षेत्रों के लोग शामिल हैं। टेक्नोलॉजी, मानसिक स्वास्थ्य, आध्यात्मिकता और उद्योग से जुड़े नाम इसमें हैं। लेकिन अब्दुल कदीर की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि शिक्षा भी अब नेतृत्व के केंद्र में है।

सोशल मीडिया पर भी इस खबर को लेकर काफी प्रतिक्रिया आई है। कई लोगों ने इसे प्रेरणादायक बताया। कुछ ने इसे शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रहे लोगों के लिए नई उम्मीद कहा।एक यूजर ने लिखा कि शाहीन एकेडमी की गुणवत्ता बनाए रखना जरूरी है। माता पिता अपने बच्चों का भविष्य लेकर यहां आते हैं। यह भरोसा टूटना नहीं चाहिए। यह प्रतिक्रिया सिर्फ एक टिप्पणी नहीं है। यह उस जिम्मेदारी का एहसास है जो अब्दुल कदीर जैसे लोगों पर है।

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अब्दुल कदीर सिर्फ एक शिक्षा विशेषज्ञ नहीं हैं। वह एक सामाजिक कार्यकर्ता भी हैं। उन्होंने कई सामाजिक अभियानों में हिस्सा लिया है। छात्रवृत्ति कार्यक्रम चलाए हैं। जागरूकता अभियान किए हैं। कौशल विकास पर काम किया है।

उनका मानना है कि समाज का विकास तभी संभव है जब हर वर्ग को बराबरी का मौका मिले। खासकर शिक्षा के जरिए। यही वजह है कि उनकी पहल सिर्फ क्लासरूम तक सीमित नहीं रहती।

आज जब देश में शिक्षा को लेकर कई तरह की बहस चल रही है, ऐसे में अब्दुल कदीर का मॉडल एक उदाहरण बन सकता है। यह मॉडल बताता है कि संसाधन सीमित हों तब भी बदलाव संभव है। जरूरत है सही सोच और निरंतर प्रयास की।

फोर्ब्स का यह सम्मान एक शुरुआत भी हो सकता है। इससे उन लोगों को पहचान मिलती है जो अब तक पर्दे के पीछे काम कर रहे थे। यह उन युवाओं को भी प्रेरित करता है जो समाज में कुछ करना चाहते हैं।अब्दुल कदीर की यात्रा हमें यह सिखाती है कि बदलाव के लिए बड़े मंच की जरूरत नहीं होती। एक छोटा कदम भी बड़ा असर डाल सकता है। अगर नीयत साफ हो और दिशा सही हो।

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आज जब यह खबर सामने आई है, तो यह सिर्फ एक व्यक्ति की उपलब्धि नहीं है। यह शिक्षा की ताकत का प्रमाण है। यह उस भरोसे की जीत है जो किताबों और कक्षाओं में बसता है।आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस सम्मान के बाद उनकी पहल किस दिशा में आगे बढ़ती है। लेकिन इतना तय है कि उनकी कहानी अब और लोगों तक पहुंचेगी। और शायद कुछ नए अब्दुल कदीर भी तैयार होंगे।