विश्व पुस्तक दिवस पर किताबों की अनोखी कहानी

Story by  अर्सला खान | Published by  [email protected] | Date 23-04-2026
From clay tablets to print, the unique story of the journey of books
From clay tablets to print, the unique story of the journey of books

 

अर्सला खान/नई दिल्ली 

जब हम आज किसी किताब को हाथ में लेते हैं, उसके पन्ने पलटते हैं, तो शायद ही यह सोचते हैं कि किताबों का यह सफर कितना लंबा और अद्भुत रहा है। विश्व पुस्तक दिवस के मौके पर यह कहानी हमें उस दौर में ले जाती है, जब न कागज था, न छपाई, फिर भी इंसान अपने विचारों को सहेजने की कोशिश कर रहा था।
 

कहानी की शुरुआत होती है प्राचीन मेसोपोटामिया से, जहां करीब चार हजार साल पहले Epic of Gilgamesh लिखा गया। इसे दुनिया की पहली साहित्यिक कृति माना जाता है। यह किसी किताब की तरह नहीं, बल्कि मिट्टी की पट्टियों पर कीलाकार लिपि में उकेरी गई थी। उन पट्टियों में एक राजा की कहानी थी, उसके डर, उसकी दोस्ती और अमरता की खोज। यह सिर्फ कहानी नहीं थी, बल्कि इंसान की पहली लिखित अभिव्यक्ति थी।
 

समय आगे बढ़ा और भारत में वेदों की रचना हुई। Rigveda को दुनिया की सबसे पुरानी धार्मिक पुस्तकों में गिना जाता है। इसे कागज पर नहीं, बल्कि भोज पत्रों पर लिखा गया। पीढ़ी दर पीढ़ी यह ज्ञान मौखिक परंपरा से भी आगे बढ़ता रहा। शब्दों को सहेजने का यह तरीका बताता है कि किताबें सिर्फ वस्तु नहीं, बल्कि संस्कृति की धरोहर हैं।
 

फिर एक और बदलाव आया। इंसान ने लिखने के तरीके को नया रूप दिया। चीन में कागज का आविष्कार हुआ और धीरे-धीरे छपाई की तकनीक विकसित हुई। साल 868 ईस्वी में Diamond Sutra छपी। इसे दुनिया की सबसे पुरानी ज्ञात मुद्रित किताब माना जाता है। यह लकड़ी के ब्लॉकों से छापी गई थी। हर पन्ना हाथ से तराशे गए ब्लॉक से तैयार होता था। यह प्रक्रिया धीमी थी, लेकिन इसने किताबों को आम लोगों तक पहुंचाने की शुरुआत कर दी।
 

इसके कुछ समय बाद कोरिया में Jikji छपी, जो धातु की चल अक्षरों से बनी दुनिया की पहली किताब मानी जाती है। यह तकनीक आधुनिक प्रिंटिंग प्रेस की नींव बनी। अब किताबें तेजी से छपने लगीं और ज्ञान का प्रसार पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया।
 

इतिहास में एक दिलचस्प पड़ाव Etruscan Gold Book भी है, जिसे लगभग 600 ईसा पूर्व की बहु-पृष्ठीय किताब माना जाता है। सोने की पतली चादरों पर लिखी यह किताब दिखाती है कि इंसान ने हर युग में अपने विचारों को स्थायी रूप देने की कोशिश की।
 
 
इन सभी पड़ावों के बीच एक बात समान रही। इंसान की जिज्ञासा। वह अपने अनुभव, अपने ज्ञान और अपनी कहानियों को सहेजना चाहता था। मिट्टी से लेकर कागज तक और हाथ से लिखी पंक्तियों से लेकर छपी किताबों तक, यह सफर सिर्फ तकनीक का नहीं, बल्कि सभ्यता के विकास का भी है।
 
 
आज जब हम डिजिटल युग में किताबें पढ़ते हैं, तो यह सफर और भी लंबा हो गया है। लेकिन किताबों की अहमियत वही है। वे हमें सोचने की ताकत देती हैं, हमें जोड़ती हैं और हमें हमारी जड़ों से परिचित कराती हैं। विश्व पुस्तक दिवस हमें यही याद दिलाता है कि किताबें सिर्फ पन्नों का संग्रह नहीं हैं। वे इंसान की आत्मा का आईना हैं। हर किताब में एक समय छिपा होता है, एक कहानी सांस लेती है और एक नई दुनिया जन्म लेती है।