आरिफुल इस्लाम / गुवाहाटी
असम के लोगों ने इस साल अपना सबसे प्यारा त्यौहार रोंगाली बिहू एक भारी मन के साथ मनाया। असमिया दिलों की धड़कन कहे जाने वाले जुबीन गर्ग के बिना इस बार बिहू की रौनक फीकी रही। रोंगाली उत्सव में वह जोश और उमंग नजर नहीं आई जो हर साल होती थी। इसी बीच दुनिया भर के मुसलमानों के लिए पवित्र हज यात्रा शुरू हो गई है। असम से हज यात्रियों का पहला जत्था रविवार को रवाना हुआ।

इस साल असम के हज यात्री रोंगाली बिहू पर जुबीन गर्ग को श्रद्धांजलि देने के साथ-साथ उनके लिए मक्का में पवित्र काबा के सामने विशेष दुआ भी करेंगे। अल्लाह के घर में ये जायरीन हाथ उठाकर जुबीन की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करेंगे। साथ ही वे उनकी हत्या में शामिल दोषियों को कड़ी सजा मिलने की भी मन्नत मांगेंगे।
पूर्वोत्तर हज यात्री स्वागत समिति ने शुक्रवार को हाजी मुसाफिर खाना में यात्रियों के लिए एक सम्मान और विदाई समारोह आयोजित किया। इस कार्यक्रम में जुबीन गर्ग को बड़े सम्मान के साथ याद किया गया। समारोह की शुरुआत में उन्हें श्रद्धांजलि दी गई और अंत में सामूहिक प्रार्थना के दौरान उनकी आत्मा की शांति के लिए दुआ मांगी गई।
पूर्वोत्तर हज यात्री स्वागत समिति के अध्यक्ष नेकीबुर जमान ने कहा कि जाति, धर्म, समुदाय और भाषा से ऊपर उठकर असम और पूरे देश के लोग जुबीन गर्ग को बेहद प्यार करते हैं। उन्होंने बताया कि हाजी मुसाफिर खाना के चारों ओर जुबीन की तस्वीरें लगाई गई हैं। कार्यक्रम में एक मिनट का मौन रखकर उन्हें याद किया गया। जमान ने कहा कि हमारे तीर्थयात्री मक्का और मदीना की पवित्र धरती पर भी उनके लिए दुआ करेंगे।
Saudi Arab launches first ever air taxi service for Haj pilgrims#hajj #saudiarabia #hajjpilgrims pic.twitter.com/zrXbRkXoBE
— Awaz The Voice Assam (@AssamAwaz) June 13, 2024
विदाई समारोह में मौजूद एक यात्री ने भावुक होकर कहा कि जुबीन गर्ग असम का गौरव और इस मिट्टी के सच्चे सपूत थे। उन्होंने कहा कि हम अपनी यात्रा के दौरान उन्हें जरूर याद करेंगे। हम वहां अलग-अलग देशों से आए लोगों को भी जुबीन के बारे में बताएंगे। वह एक विशाल हृदय वाले इंसान थे जो किसी भी तरह के भेदभाव को नहीं मानते थे।
मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में चल रहे तनाव और हज यात्रा पर इसके असर के बारे में पूछे जाने पर जमान ने स्पष्ट किया कि शुरू में कुछ चिंताएं जरूर थीं। लेकिन अब यह साफ है कि युद्ध की वजह से हज यात्रा में कोई बाधा नहीं आएगी। वहां के हालात सुरक्षित हैं। अगर कोई खतरा होता तो सऊदी अरब और भारत सरकार अनुमति नहीं देती। सभी यात्री सरकार की देखरेख में सुरक्षित सफर करेंगे।

इस साल असम से लगभग 3,500तीर्थयात्री हज पर जा रहे हैं। प्रस्थान केंद्रों की संख्या बढ़ने की वजह से असम से जाने वाले यात्रियों की संख्या में थोड़ी कमी आई है। राज्य हज समिति ने यात्रियों के लिए वीजा, टीकाकरण, मेडिकल चेकअप और विदेशी मुद्रा जैसी तमाम व्यवस्थाएं समय पर पूरी कर ली हैं। हर साल की तरह इस बार भी यात्रियों को असमिया पहचान के प्रतीक के रूप में 'गमोचा' दिया गया है।
It’s hard to believe we lost Zubeen Garg, the legendary voice behind “Ya Ali.” One more legend gone too soon, but his music will forever echo in our hearts.
— Rɪsʜᴀʙʜʜ (@ChordVoyager) September 19, 2025
🙏 Om Shanti 🕉️#ZubeenGarg #RestInPeacepic.twitter.com/8WoVx6KZSK
सऊदी अरब सरकार ने इस बार यात्रा को सुगम बनाने के लिए एक डिजिटल कलाई घड़ी (स्मार्ट वॉच) की शुरुआत की है। यह घड़ी यात्रियों के ब्लड प्रेशर और सेहत पर नजर रखेगी। अगर कोई यात्री भीड़ में खो जाता है तो यह डिवाइस अधिकारियों को तुरंत अलर्ट कर देगी। पिछली यात्राओं में होने वाली मौतों और पहचान की समस्याओं को देखते हुए इस घड़ी में यात्री की पूरी जानकारी स्टोर रहेगी।

शुक्रवार को आयोजित इस विदाई समारोह में असम साहित्य सभा के अध्यक्ष डॉ. बसंत गोस्वामी, भारतीय सेना के पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल राणा प्रताप कलिता और वरिष्ठ पत्रकार पराग मणि आदित्य समेत कई गणमान्य लोग शामिल हुए। इस मौके पर समिति की वार्षिक पत्रिका 'लब्बयका' का भी विमोचन किया गया।