ओनिका माहेश्वरी/ नई दिल्ली
पश्चिम बंगाल की राजनीति से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जो किसी फिल्मी पटकथा जैसी लग सकती है, लेकिन यह भारतीय लोकतंत्र की सजीव और प्रेरणादायक हकीकत है। यह कहानी है कलिता माझी की, जिन्होंने अपने संघर्ष, मेहनत और जज़्बे के दम पर सामाजिक और आर्थिक सीमाओं को पार करते हुए विधानसभा तक का सफर तय किया।
कल तक जिन हाथों में दूसरों के घरों के बर्तन और झाड़ू-पोंछा हुआ करते थे, आज उन्हीं हाथों में जनता ने अपने भविष्य की जिम्मेदारी सौंप दी है। कलिता माझी पश्चिम बंगाल के औसग्राम विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी की नवनिर्वाचित विधायक हैं। उन्होंने इस सीट पर शानदार जीत दर्ज करते हुए यह साबित कर दिया कि लोकतंत्र में कोई भी व्यक्ति अपनी मेहनत और समर्पण से ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है।
— P C Mohan (@PCMohanMP) May 4, 2026
राजनीति में आने से पहले कलिता माझी पिछले करीब दो दशकों से एक घरेलू कामगार के रूप में काम कर रही थीं। वह 2 से 4 घरों में साफ-सफाई और बर्तन धोने का काम करती थीं, जिससे उन्हें हर महीने लगभग 2,500 रुपये की आय होती थी। इसी सीमित आमदनी से वह अपने परिवार का भरण-पोषण करती थीं और जीवन की कठिन परिस्थितियों का सामना करती रहीं।
इस बार के विधानसभा चुनाव में कलिता माझी ने श्यामा प्रसन्न लोहार को 12,535 वोटों के अंतर से हराकर जीत हासिल की। औसग्राम (एससी) सीट संख्या 273 पर हुए इस मुकाबले में कलिता माझी को कुल 1,07,692 वोट मिले, जबकि तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार श्यामा प्रसन्न लोहार को 95,157 वोटों से संतोष करना पड़ा।
इस चुनाव में अन्य उम्मीदवारों की बात करें तो चंचल कुमार माझी को 16,478 वोट मिले, तापस बराल को 2,082 वोट और निर्दलीय उम्मीदवार निहार कुमार हाजरा को मात्र 994 वोट प्राप्त हुए। कलिता माझी की इस जीत पर पी. सी. मोहन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह भारतीय जनता पार्टी की ताकत का उदाहरण है, जहां एक साधारण नागरिक भी आगे बढ़कर प्रेरणादायक कहानी लिख सकता है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि एक घरेलू कामगार, जो चार घरों में काम कर मात्र ₹2,500 कमाती थी, आज जनता के विश्वास से विधायक बन गई है।
कलिता माझी का राजनीतिक सफर भी बेहद प्रेरक रहा है। वह पिछले 10 वर्षों से अधिक समय से राजनीति में सक्रिय हैं। उन्होंने अपनी शुरुआत एक बूथ-स्तर की कार्यकर्ता के रूप में की थी और धीरे-धीरे पार्टी में अपनी पहचान बनाई। उन्होंने पंचायत चुनाव भी लड़ा और जमीनी स्तर पर लगातार लोगों से जुड़ी रहीं।
गौरतलब है कि भारतीय जनता पार्टी ने उन पर 2021 के विधानसभा चुनाव में भी भरोसा जताया था। उस चुनाव में उन्होंने लगभग 41 प्रतिशत वोट हासिल किए थे, हालांकि उन्हें करीब 12,000 वोटों के अंतर से हार का सामना करना पड़ा था। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार जनता के बीच काम करती रहीं, जिसका परिणाम इस बार की ऐतिहासिक जीत के रूप में सामने आया।
औसग्राम जैसे क्षेत्र में, जहां लंबे समय से पारंपरिक राजनीति का प्रभाव रहा है, वहां कलिता माझी की जीत सिर्फ एक राजनीतिक जीत नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का संकेत भी है। यह जीत उन लाखों लोगों के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने का साहस रखते हैं।
कलिता माझी की कहानी यह साबित करती है कि भारतीय लोकतंत्र में हर व्यक्ति को आगे बढ़ने का अवसर मिलता है। यह सिर्फ एक सीट की जीत नहीं, बल्कि संघर्ष, उम्मीद और बदलाव की एक सशक्त मिसाल है, जो आने वाले समय में कई लोगों को अपने सपनों को साकार करने की प्रेरणा देती रहेगी।