मलिक असगर हाशमी / नई दिल्ली
दक्षिण भारतीय सिनेमा से लेकर हिंदी फिल्मों तक अपनी अलग पहचान बनाने वाले कमल हासन इन दिनों एक पुराने सवाल को लेकर फिर चर्चा में हैं। सवाल यह है कि आखिर उनके नाम में “हासन” कैसे जुड़ा। क्या इसका संबंध स्वतंत्रता सेनानी याकूब हसन से है ? सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो ने इस बहस को फिर हवा दे दी है। वीडियो में एक सार्वजनिक कार्यक्रम के दौरान मंच से एक वक्ता कमल हासन के परिवार का रिश्ता याकूब हसन से जोड़ता है। उस समय कमल हासन मुस्कराते हुए दिखाई देते हैं। इसके बाद सोशल मीडिया पर दावे और चर्चाएं तेज हो गईं।
हालांकि, इस पूरे मामले पर कमल हासन ने कभी विस्तार से सार्वजनिक बयान नहीं दिया। कई बार इंटरव्यू में उनसे पूछा गया कि उनके परिवार का मूल उपनाम “अयंगर” था, फिर “हासन” कैसे जुड़ गया। मगर उन्होंने इस विषय पर खुलकर चर्चा करने से हमेशा परहेज किया।
पिता की प्रतिमा के साथ कमल हासन
कमल हासन का जन्म 7 नवंबर 1954 को तमिलनाडु के परमकुडी में हुआ था। वे एक तमिल ब्राह्मण थेंगलई अयंगर परिवार से आते हैं। उनके पिता डी. श्रीनिवासन अयंगर पेशे से वकील और स्वतंत्रता सेनानी थे। मां राजलक्ष्मी गृहिणी थीं।
मीडिया रिपोर्ट्स और उपलब्ध जीवनी संबंधी जानकारियों के अनुसार, कमल हासन का शुरुआती नाम “पार्थसारथी” रखा गया था। बाद में उनके पिता ने उनका नाम बदलकर “कमल हासन” कर दिया।यहीं से यह कहानी दिलचस्प हो जाती है।
बताया जाता है कि श्रीनिवासन अयंगर के एक बेहद करीबी मुस्लिम मित्र थे जिनका उपनाम “हसन” था। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान उनकी मृत्यु हो गई थी। अपने मित्र की याद में श्रीनिवासन अयंगर ने अपने बेटे के नाम के साथ “हसन” जोड़ दिया। बाद में तमिल उच्चारण और बोलचाल में यह “हासन” बन गया।कमल हासन के बड़े भाई Charuhasan और Chandrahasan के नामों में भी “हासन” जुड़ा हुआ दिखाई देता है। परिवार की यह पहचान बाद में स्थायी बन गई।
अब सवाल उठता है कि क्या यह मुस्लिम मित्र वास्तव में याकूब हसन थे?
इतिहास के पन्नों में याकूब हसन का नाम मद्रास प्रेसीडेंसी के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानियों में दर्ज है। वे महात्मा गांधी के करीबी माने जाते थे। जब गांधी दक्षिण अफ्रीका से भारत लौटे थे, तब उनके स्वागत के लिए जो समिति बनी थी, उसके अध्यक्ष याकूब हसन बताए जाते हैं। उन्होंने खिलाफत आंदोलन में भी सक्रिय भूमिका निभाई थी। उस दौर में हिंदू मुस्लिम एकता को मजबूत करने के लिए वे लगातार काम करते रहे।
मद्रास में उन्होंने कई सामाजिक और राजनीतिक कार्यक्रम आयोजित किए। कहा जाता है कि इन्हीं गतिविधियों के दौरान उनकी मुलाकात अधिवक्ता श्रीनिवासन अयंगर से हुई। दोनों के बीच गहरी दोस्ती हो गई। उस समय स्वतंत्रता आंदोलन केवल अंग्रेजों के खिलाफ संघर्ष नहीं था बल्कि समाज के अलग अलग वर्गों को साथ लाने का अभियान भी था। दक्षिण भारत में कई ऐसे उदाहरण मिलते हैं जहां हिंदू और मुस्लिम नेताओं ने मिलकर आंदोलन चलाए।
कुछ इतिहासकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का दावा है कि श्रीनिवासन अयंगर ने इसी दोस्ती की याद में अपने बच्चों के नामों के साथ “हसन” जोड़ दिया था। हालांकि, इसका कोई आधिकारिक दस्तावेज सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। यही कारण है कि यह दावा पूरी तरह इतिहास का प्रमाणित तथ्य नहीं माना जाता।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में भी इसी कहानी का जिक्र किया गया है। मंच से वक्ता कहते हैं कि कमल हासन का परिवार याकूब हसन के बेहद करीब था और उसी रिश्ते की याद में उनके नाम में “हासन” जुड़ा। वीडियो में कमल हासन मुस्कराते नजर आते हैं। मगर उन्होंने वहां भी इस दावे की पुष्टि या खंडन नहीं किया।
दरअसल, कमल हासन की छवि हमेशा एक उदार और प्रगतिशील कलाकार की रही है। उन्होंने कई बार धर्म, जाति और सामाजिक विभाजन के खिलाफ खुलकर विचार रखे हैं। उनकी फिल्मों में भी सामाजिक समानता और इंसानी रिश्तों की झलक दिखाई देती है। संभव है कि इसी कारण उन्होंने अपने नाम को लेकर चल रही चर्चाओं पर कभी ज्यादा जोर नहीं दिया।
कमल हासन केवल अभिनेता नहीं हैं। वे निर्देशक, लेखक, निर्माता और राजनेता भी हैं। उन्होंने 250 से ज्यादा फिल्मों में काम किया है। तमिल, तेलुगु, मलयालम, हिंदी और बंगाली सिनेमा में उनकी अलग पहचान है। उन्हें पद्मश्री, पद्म भूषण और फ्रांस सरकार के प्रतिष्ठित सम्मान से भी नवाजा जा चुका है। वर्ष 2018 में उन्होंने अपनी राजनीतिक पार्टी “मक्कल नीधि मय्यम” की स्थापना की। फिलहाल वे राज्यसभा सदस्य भी हैं।
उनकी लोकप्रियता इतनी बड़ी है कि उनके जीवन से जुड़ी छोटी बातें भी चर्चा का विषय बन जाती हैं। यही वजह है कि उनके नाम का इतिहास भी लोगों की दिलचस्पी का केंद्र बना हुआ है।इतिहासकारों का मानना है कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में कई परिवारों ने धर्म और जाति से ऊपर उठकर रिश्ते बनाए थे। उस दौर में दोस्ती और वैचारिक संबंध इतने मजबूत होते थे कि लोग एक दूसरे की याद को अपने नाम और परिवार तक में शामिल कर लेते थे। संभव है कि कमल हासन के परिवार की कहानी भी उसी दौर की एक मिसाल हो।
अप कमिंग फिल्म का ट्रेलर ----
फिलहाल सच यही है कि कमल हासन ने कभी आधिकारिक रूप से यह नहीं कहा कि उनका परिवार सीधे तौर पर याकूब हसन से जुड़ा था। लेकिन यह भी सच है कि उनके पिता के एक मुस्लिम मित्र की याद में “हासन” नाम अपनाने की बात कई जगह दर्ज मिलती है। अब वह मित्र याकूब हसन ही थे या कोई और, यह सवाल आज भी पूरी तरह साफ नहीं हो पाया है।फिर भी यह कहानी केवल एक नाम की नहीं है। यह उस दौर की याद दिलाती है जब आजादी की लड़ाई में रिश्ते मजहब से बड़े हुआ करते थे।