स्पाइनल बीमारी से जूझते हुए भी चमका छात्र: महीनुल की मिसाल

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 18-04-2026
Hailakandi's Mahinul Overcomes Disability, Achieves Distinction in Assam Matric Exam
Hailakandi's Mahinul Overcomes Disability, Achieves Distinction in Assam Matric Exam

 

सतानंद भट्टाचार्जी / हैलाकांडी( असम)

दृढ़ इच्छाशक्ति और कुछ कर गुजरने की तमन्ना हो तो शारीरिक बाधाएं रास्ता नहीं रोक सकतीं। दक्षिण असम की बराक घाटी के हैलाकांडी जिले के रहने वाले महीनुल इस्लाम मजूमदार ने इस बात को सच कर दिखाया है। हाल ही में घोषित असम माध्यमिक शिक्षा परिषद (HSLC) परीक्षा 2026 के नतीजों में महीनुल ने शानदार सफलता हासिल की है।

हैलाकांडी शहर के पास नारायणपुर पार्ट IV गांव के निवासी महीनुल ने शहर के ही 'स्पैरो सीनियर सेकेंडरी स्कूल' से यह परीक्षा दी थी। महीनुल की शारीरिक स्थिति ऐसी है कि वह बिना सहारे के खड़े तक नहीं हो सकते, चलना तो बहुत दूर की बात है।

उनके आवागमन का एकमात्र साधन उनकी ट्राइसाइकिल (तिपहिया साइकिल) है। उनके पैरों में जान नहीं है और अब उनके हाथों की ताकत भी धीरे-धीरे कम होती जा रही है। महीनुल 'स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी' (SMA) नाम की गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। यह एक अनुवांशिक विकार है जो रीढ़ की हड्डी के उन न्यूरॉन्स को खत्म कर देता है जो मांसपेशियों को नियंत्रित करते हैं।

इसकी वजह से शरीर की मांसपेशियां बेहद कमजोर हो जाती हैं और सूखने लगती हैं।लेकिन महीनुल ने अपनी इस लाचारी को एक चुनौती के रूप में स्वीकार किया। अपनी अटूट इच्छाशक्ति और कड़ी मेहनत के दम पर उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी।

हैरानी की बात यह है कि महीनुल महज 6अंकों की मामूली कमी की वजह से प्रथम श्रेणी (फर्स्ट डिवीजन) से चूक गए। लेकिन कंप्यूटर साइंस जैसे कठिन विषय में उन्होंने 88अंक हासिल कर सबको चौंका दिया। वह भविष्य में और भी बेहतर परिणाम हासिल करने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ना चाहते हैं।

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उन्होंने उच्च माध्यमिक शिक्षा के लिए हैलाकांडी के ही एक निजी स्कूल में कला (Arts) संकाय में दाखिला ले लिया है। महीनुल का सपना भविष्य में सिविल सेवा (IAS/IPS) में शामिल होकर देश और समाज की सेवा करना है।

अपनी इस सफलता पर महीनुल ने अपने माता-पिता, शिक्षकों और उन सभी संस्थाओं का आभार जताया जिन्होंने इस मुश्किल सफर में उनका साथ दिया।महीनुल के पिता अब्दुल मुनीम मजूमदार एक स्कूल शिक्षक हैं और मां शाहनाज बेगम मजूमदार एक गृहिणी हैं।

बेटे की सफलता पर उनकी खुशी का ठिकाना नहीं है। अब्दुल मुनीम ने बताया कि शारीरिक सीमाओं के बावजूद उनके बेटे के मन में कुछ कर दिखाने की जो तड़प थी, उसी ने उसे पढ़ाई में बेहतर करने में मदद की।

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दिव्यांगों के लिए काम करने वाली संस्था 'सक्षम' की हैलाकांडी शाखा के दो अधिकारियों, शंकर चौधरी और गोविंद चंद्र नाथ ने महीनुल के घर जाकर उन्हें और उनके पिता को सम्मानित किया। शंकर चौधरी ने कहा कि भले ही अंकों के लिहाज से परिणाम बहुत बड़े न दिखें, लेकिन जिस तरह की शारीरिक स्थिति में महीनुल ने अपनी पढ़ाई जारी रखी, वह वाकई काबिले तारीफ है। उन्होंने उम्मीद जताई कि महीनुल का यह प्रयास दूसरे बच्चों के लिए प्रेरणा बनेगा।