21 साल बाद मुस्लिम बहन ने निभाया वादा, हिंदू धर्म-भाई को दिया मायरे का न्योता

Story by  ओनिका माहेश्वरी | Published by  onikamaheshwari | Date 18-04-2026
After 21 Years, Muslim Sister Fulfills Promise; Invites Hindu Brother to 'Mayra' Ceremony, AI photp hashmi
After 21 Years, Muslim Sister Fulfills Promise; Invites Hindu Brother to 'Mayra' Ceremony, AI photp hashmi

 

ओनिका माहेश्वरी /नई दिल्ली

जब दिल जुड़ जाएं, तो मजहब की दीवारें भी छोटी पड़ जाती हैं। आज के दौर में जब अक्सर समाज में धर्म और जाति के नाम पर दूरियां बढ़ने की खबरें सुर्खियां बनती हैं, वहीं राजस्थान की धरती से एक ऐसी कहानी सामने आई है जिसने यह याद दिला दिया कि इंसानियत अब भी जिंदा है। यह कहानी सिर्फ एक भाई-बहन के रिश्ते की नहीं, बल्कि उस भरोसे, सम्मान और मोहब्बत की है जो समय बीतने के साथ और मजबूत होती चली गई। 21 साल पुराने एक रिश्ते ने उस वक्त सबकी आंखें नम कर दीं, जब एक मुस्लिम बहन ने अपने हिंदू धर्म-भाई के घर पहुंचकर ऐसा कदम उठाया, जिसने पूरे गांव को भावुक कर दिया।

 
राजस्थान के बीकानेर जिले के लूणकरणसर क्षेत्र में मुस्लिम शिक्षिका नाजरा परवीन ने अपने 21 साल पुराने धर्म-भाई के रिश्ते को निभाते हुए हिंदू परंपरा के अनुसार अपने धर्म-भाई मनीराम गोदारा के घर पहुंचकर मायरे का न्योता दिया। वर्षों पहले नाजरा परवीन ने मनीराम गोदारा को अपना धर्म-भाई माना था। वक्त के साथ बहुत कुछ बदला, लेकिन दोनों के रिश्ते की मिठास और सम्मान कभी कम नहीं हुआ।
 
जब नाजरा परवीन के परिवार में शादी का शुभ अवसर आया तो उन्होंने समाज के सामने भाईचारे की ऐसी मिसाल पेश की, जिसकी हर तरफ चर्चा होने लगी। वह अपने धर्म-भाई के घर पहुंचीं, तिलक किया और पूरे सम्मान के साथ उन्हें मायरे के लिए आमंत्रित किया। इस दौरान दोनों परिवारों के चेहरों पर खुशी साफ दिखाई दे रही थी, वहीं माहौल भावुक भी हो गया।
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गांव के लोगों ने जब यह दृश्य देखा तो हर कोई इस रिश्ते की गहराई को महसूस करता नजर आया। कई लोगों की आंखें नम हो गईं। लोगों का कहना है कि यह रिश्ता केवल धर्म-बहन और भाई का नहीं, बल्कि आपसी प्रेम, विश्वास और सम्मान का प्रतीक है। पिछले 21 वर्षों से दोनों परिवारों के बीच जो अपनापन कायम है, वह समाज के लिए प्रेरणा बन गया है।
 
स्थानीय लोगों के अनुसार, ऐसे उदाहरण आज के समय में बहुत कम देखने को मिलते हैं। जहां अक्सर समाज में धर्म के नाम पर विभाजन की बातें सामने आती हैं, वहीं नाजरा परवीन और मनीराम गोदारा ने यह साबित कर दिया कि सच्चे रिश्ते किसी धर्म या जाति की सीमाओं में बंधे नहीं होते।
 
 
 
नाजरा परवीन की इस पहल ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि भारत की असली पहचान उसकी गंगा-जमुनी तहजीब, साझा संस्कृति और आपसी भाईचारे में बसती है। यह घटना सिर्फ राजस्थान ही नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए एक ऐसा संदेश बन गई है जो बताती है कि मोहब्बत और इंसानियत से बड़ा कोई धर्म नहीं होता।