मंसूरुद्दीन फरीदी/ नई दिल्ली
दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में फैली मेमन बिरादरी आज अपनी पहचान एक सफल, सेवा-भावी और तरक्कीपसंद समुदाय के रूप में बना चुकी है। करीब 40 लाख की आबादी वाली यह बिरादरी जहां भी बसी है, वहां उसने न केवल आर्थिक रूप से मजबूती हासिल की है, बल्कि सामाजिक और मानवीय मूल्यों को भी प्राथमिकता दी है। वर्ल्ड मेमन डे के अवसर पर इस बिरादरी की इसी विशेषता को रेखांकित किया गया।
इस मौके पर देश के प्रमुख मेमन नेता यूसुफ अब्राहानी ने मेमन समुदाय की परंपराओं, योगदान और वैश्विक उपस्थिति पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि मेमन बिरादरी की जड़ें भारत के गुजरात क्षेत्र से जुड़ी हैं, जहां से समय के साथ लोग देश-विदेश में जाकर बसे और अपनी मेहनत व ईमानदारी के बल पर अलग पहचान बनाई।
यूसुफ अब्राहानी के अनुसार, मेमन समुदाय एक प्राचीन और समृद्ध परंपरा का वाहक है। यह समुदाय अपने शांतिपूर्ण स्वभाव, सामाजिक समरसता और सेवा-भाव के लिए जाना जाता है। उन्होंने कहा कि जहां भी मेमन बसते हैं, वहां सबसे पहले शिक्षा, धर्म और समाज सेवा से जुड़े संस्थानों की स्थापना करते हैं। मस्जिद, मदरसा, जमातखाना और मेडिकल डिस्पेंसरी जैसी सुविधाएं खड़ी करना इस बिरादरी की पुरानी परंपरा रही है।
उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि पिछले छह दशकों में उन्होंने देखा है कि मेमन बिरादरी ने विशेष रूप से मुंबई जैसे महानगर में अनेक संस्थान स्थापित किए हैं। इनमें अस्पताल, शैक्षणिक संस्थान और समाजसेवी केंद्र शामिल हैं, जो न केवल मेमन समुदाय बल्कि सभी वर्गों के लोगों को सेवाएं प्रदान करते हैं।
.webp)
फराखदिल और सेवा-भाव की पहचान
यूसुफ अब्राहानी ने मेमन बिरादरी की विशेषताओं को बताते हुए कहा कि यह समुदाय अपनी दरियादिली और मददगार स्वभाव के लिए जाना जाता है। उनके शब्दों में, “अल्लाह ने इस कौम को दौलत के साथ बड़ा दिल भी दिया है।” उन्होंने कहा कि मेमन समुदाय का मूल मंत्र है—कमाना और बांटना। यही कारण है कि यह बिरादरी हर दौर में जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे रहती है।
वर्ल्ड मेमन डे: सेवा और इंसानियत का पर्व
हर साल 10 अप्रैल को मनाया जाने वाला वर्ल्ड मेमन डे इस समुदाय के लिए केवल उत्सव नहीं, बल्कि सेवा का अवसर भी होता है। इस दिन दुनिया भर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। गरीबों को राशन वितरित करना, अस्पतालों का दौरा करना, जरूरतमंदों की आर्थिक सहायता करना और सामाजिक कार्यों में भाग लेना इस दिन की खास पहचान है।
यूसुफ अब्राहानी ने बताया कि भारत के अलावा इंग्लैंड, अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड जैसे देशों में भी मेमन बिरादरी इस दिन को बड़े पैमाने पर मनाती है। विशेष रूप से दिव्यांग, विधवा, अनाथ और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों की मदद पर जोर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और समय के साथ इसमें और विस्तार हुआ है।
.webp)
तालीम और तरक्की में अग्रणी
मेमन बिरादरी भले ही संख्या में कम हो, लेकिन शिक्षा और आर्थिक प्रगति के मामले में यह समुदाय काफी आगे है। यूसुफ अब्राहानी के अनुसार, बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा से ही उनके व्यक्तित्व विकास पर विशेष ध्यान दिया जाता है। उन्हें न केवल आधुनिक शिक्षा दी जाती है, बल्कि नैतिक मूल्यों और धार्मिक शिक्षाओं से भी जोड़ा जाता है।
उन्होंने बताया कि मेमन समुदाय में व्यापार और उद्यमिता की मजबूत परंपरा रही है। कपड़ा, लकड़ी और लोहे के व्यापार में इस बिरादरी की ऐतिहासिक भूमिका रही है। कई व्यवसायिक संस्थान सौ से डेढ़ सौ वर्षों से संचालित हो रहे हैं, जो इस समुदाय की स्थिरता और दूरदर्शिता को दर्शाते हैं।
जमातों का सशक्त नेटवर्क
भारत में मेमन बिरादरी की लगभग 500 जमातें सक्रिय हैं, जो स्थानीय स्तर पर संगठित ढंग से कार्य करती हैं। इसके अलावा, एक वैश्विक संगठन भी है जो विभिन्न देशों में बसे मेमन समुदाय को जोड़ता है। यह नेटवर्क जरूरतमंदों की पहचान और उनकी सहायता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
यूसुफ अब्राहानी ने बताया कि अगर किसी व्यक्ति को मदद की जरूरत होती है, तो वह अपनी स्थानीय जमात से संपर्क करता है। जांच-पड़ताल के बाद उसे उचित सहायता प्रदान की जाती है। इसके अलावा, मेधावी छात्रों को पुरस्कार देकर प्रोत्साहित किया जाता है और शिक्षकों का भी सम्मान किया जाता है।
सामाजिक और शैक्षणिक संस्थानों में योगदान
मेमन बिरादरी ने कई महत्वपूर्ण संस्थानों के विकास में योगदान दिया है। मुंबई में स्थापित साबू सिद्दीक मुसाफिरखाना, साबू सिद्दीक अस्पताल और अंजुमन-ए-इस्लाम जैसे संस्थानों में इस समुदाय की अहम भूमिका रही है। ये संस्थान आज भी हजारों लोगों को शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान कर रहे हैं।
सियासत में भी सक्रिय भागीदारी
सामाजिक और आर्थिक क्षेत्र के अलावा मेमन बिरादरी ने राजनीतिक क्षेत्र में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। इस समुदाय से जुड़े कई लोग मेयर, विधायक, सांसद और नगरसेवक जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं। यूसुफ अब्राहानी ने कहा कि मेमन बिरादरी हमेशा देश के प्रति वफादार रही है और राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका निभाती रही है।
इंसानियत सबसे बड़ा धर्म
मेमन समुदाय की सबसे बड़ी पहचान उसका मानवता के प्रति समर्पण है। यह बिरादरी केवल अपने लोगों तक सीमित नहीं रहती, बल्कि हर जरूरतमंद की मदद के लिए आगे आती है। किसानों की आत्महत्या के समय आर्थिक सहायता देना, सूखा प्रभावित क्षेत्रों में पानी की व्यवस्था करना और अन्य सामाजिक समस्याओं में सहयोग करना इसकी मिसाल है।
यूसुफ अब्राहानी ने अंत में कहा कि मेमन बिरादरी का मूल सिद्धांत सेवा और इंसानियत है। यही कारण है कि यह समुदाय जहां भी है, वहां स्थिर, सम्मानित और लोकप्रिय है। उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले समय में भी मेमन बिरादरी इसी तरह समाज की सेवा करती रहेगी और अपनी सकारात्मक पहचान को और मजबूत बनाएगी।