प्रो. डॉ. डी.के. पांडेय
भारतीय वायु सेना का प्रमुख मारक क्षमता प्रदर्शन वायु शक्ति 2026 इस बार फिर रेगिस्तान की धरती पर गूंजने वाला है। 27 फरवरी को जैसलमेर के पास स्थित Pokhran Air-to-Ground Range में इसका मुख्य आयोजन होगा। 24 फरवरी को इसकी अंतिम रिहर्सल रखी गई है। यह केवल अभ्यास नहीं है। यह तैयारी का सार्वजनिक प्रमाण है।

इस कार्यक्रम में देश के सर्वोच्च नेतृत्व की उपस्थिति की संभावना है। राष्ट्रपति Droupadi Murmu, प्रधानमंत्री Narendra Modi, रक्षा मंत्री Rajnath Singh और गृह मंत्री Amit Shah के आने की चर्चा है। विदेशी प्रतिनिधि भी मौजूद रह सकते हैं। इससे आयोजन का महत्व और बढ़ जाता है।
वायु शक्ति एक सामान्य एयर शो नहीं है। यहां केवल हवाई करतब नहीं दिखाए जाते। यहां असली हथियारों का इस्तेमाल होता है। बम गिरते हैं। मिसाइलें लक्ष्य भेदती हैं। धूल उड़ती है। और सटीक निशाना सब कुछ स्पष्ट कर देता है। यह संदेश साफ होता है कि वायु सेना हर परिस्थिति के लिए तैयार है।
इस बार 120 से अधिक विमान हिस्सा लेंगे। इनमें 77 लड़ाकू विमान और 43 हेलीकॉप्टर होंगे। लगभग 12 हजार किलोग्राम हथियारों का उपयोग किया जाएगा। दिन में भी अभ्यास होगा और रात में भी। अंधेरे में लक्ष्य भेदन आसान नहीं होता। लेकिन आधुनिक सेंसर और नाइट विजन तकनीक इसे संभव बनाते हैं। यही असली क्षमता है।
वायु सेना के उप प्रमुख एयर मार्शल नागेश कपूर ने कहा है कि यह आयोजन भविष्य के युद्ध की तैयारी को दिखाता है। आज का युद्ध केवल संख्या से नहीं जीता जाता। सटीकता और समन्वय अधिक महत्वपूर्ण हैं। लंबी दूरी से हमला करना और कम समय में असर डालना जरूरी है। वायु शक्ति इसी सोच को सामने लाता है।

इस आयोजन का एक सामाजिक पक्ष भी है। आम नागरिक जब यह प्रदर्शन देखते हैं तो उनमें भरोसा पैदा होता है। उन्हें लगता है कि देश सुरक्षित हाथों में है। युवाओं के लिए यह प्रेरणा का क्षण होता है। कई युवा ऐसे कार्यक्रम देखकर वायु सेना में जाने का निश्चय करते हैं। वर्दी का आकर्षण केवल बाहरी नहीं होता। उसके पीछे अनुशासन और समर्पण की कहानी होती है।
इस बार स्वदेशी प्लेटफॉर्म पर विशेष जोर है। तेजस हल्का लड़ाकू विमान अपनी क्षमता दिखाएगा। प्रचंड हेलीकॉप्टर ऊंचाई वाले क्षेत्रों के लिए बना है। ध्रुव बहुउद्देश्यीय हेलीकॉप्टर है। आकाश वायु रक्षा प्रणाली दुश्मन के हवाई खतरों को रोकने में सक्षम है। समर मिसाइल प्रणाली भी प्रदर्शन का हिस्सा होगी। पहली बार शॉर्ट रेंज लोइटरिंग म्यूनिशन को भी शामिल किया गया है। ये ऐसे हथियार हैं जो लक्ष्य क्षेत्र के ऊपर मंडराते हैं और सही समय पर वार करते हैं। यह आधुनिक युद्ध की नई दिशा है।
विदेशी मूल के कई प्रमुख विमान भी भाग लेंगे। राफेल अपनी सटीक मारक क्षमता के लिए जाना जाता है। सुखोई 30 एमकेआई लंबी दूरी की ताकत रखता है। मिराज 2000, जगुआर और मिग 29 भी अपने अनुभव और क्षमता के लिए पहचाने जाते हैं। अपाचे और चिनूक हेलीकॉप्टर अपनी भूमिका निभाएंगे। एमआई 17 वी5 उपयोगी और भरोसेमंद प्लेटफॉर्म है। परिवहन विमानों में सी 17 ग्लोबमास्टर और सी 130 जे सुपर हरक्यूलिस शामिल होंगे। सी 295 भी अपनी उपयोगिता दिखाएगा।
भारतीय सेना का सहयोग भी इस आयोजन का हिस्सा है। एम 777 अल्ट्रा लाइट हॉवित्जर तोपें तैनात होंगी। पैरा स्पेशल फोर्स के जवान विशेष अभियान का प्रदर्शन करेंगे। यह संयुक्त अभियान की झलक है। आधुनिक युद्ध अकेले नहीं लड़ा जाता। समन्वय ही असली ताकत है।

इस कार्यक्रम में मानवीय सहायता की झलक भी दिखाई जाएगी। आपदा के समय वायु सेना तेजी से राहत पहुंचाती है। त्वरित एयरलिफ्ट और बचाव अभियान इसकी पहचान हैं। यही कारण है कि दुनिया भर में भारतीय वायु सेना की छवि सकारात्मक रही है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। रेंज के आसपास का क्षेत्र प्रतिबंधित घोषित किया गया है। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं। जैसलमेर चांदन मार्ग पर निगरानी बढ़ा दी गई है। स्थानीय लोगों को सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं। बच्चों और मवेशियों को रेंज से दूर रखने को कहा गया है। फोटो और वीडियो बनाना सख्त मना है। यह सब जरूरी है क्योंकि यहां असली हथियारों का उपयोग होता है।
रणनीतिक दृष्टि से यह आयोजन महत्वपूर्ण है। यह बाहरी दुनिया को संकेत देता है कि भारत की वायु शक्ति तैयार है। पश्चिमी क्षेत्र में लाइव स्ट्राइक प्रदर्शन त्वरित प्रतिक्रिया की क्षमता दिखाता है। राफेल और सुखोई जैसे विमान गहरी पैठ बनाकर हमला कर सकते हैं। आज के समय में ड्रोन और मिसाइल खतरे तेजी से बढ़े हैं। रूस यूक्रेन और ईरान इजरायल जैसे संघर्षों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि हवाई सुरक्षा कितनी जरूरी है। ऐसे में परतदार वायु रक्षा प्रणाली का प्रदर्शन संदेश देता है कि भारत सतर्क है।
वायु शक्ति 2026 केवल शक्ति प्रदर्शन नहीं है। यह आत्मविश्वास का प्रदर्शन है। यह दिखाता है कि स्वदेशी और आयातित संसाधन साथ मिलकर काम कर सकते हैं। यह बताता है कि वायु सेना समय के साथ बदल रही है। नई तकनीक अपना रही है। लेकिन अपने मूल सिद्धांत नहीं छोड़ रही।

अंत में यही कहा जा सकता है कि वायु शक्ति 2026 देश की सामरिक तैयारी का जीवंत उदाहरण है। यह आयोजन बताता है कि भारतीय वायु सेना केवल शांति के समय की संस्था नहीं है। संकट के समय वही पहली प्रतिक्रिया देती है। वह तेज है। सटीक है। और अपने दायित्व के प्रति पूरी तरह समर्पित है। यही उसका असली पराक्रम है।





