लखनऊ की ज़ेहरा ने रमजान को बनाया रोजगार का जरिया

Story by  अर्सला खान | Published by  [email protected] | Date 24-02-2026
Ramadan 2026: Zehra's art combines work and worship
Ramadan 2026: Zehra's art combines work and worship

 

अर्सला खान/नई दिल्ली

रमजान का महीना इबादत, सब्र और बरकत का महीना माना जाता है, लेकिन कुछ लोग इसे समाज के लिए नए अवसर पैदा करने का समय भी बना देते हैं। लखनऊ की रहने वाली Zehra Kaynat ने इस पवित्र महीने को सिर्फ आध्यात्मिक नहीं, बल्कि सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण का जरिया भी बनाया है। वह एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचानी जाने वाली कैलीग्राफर हैं और Zehra Calligraphy की ओनर और सीईओ हैं। अपनी कला के माध्यम से उन्होंने यह साबित किया है कि अगर इरादे मजबूत हों तो शौक को ही करियर में बदला जा सकता है।
 
 
रमजान के दौरान उनकी लिखी हुई कुरआनी आयतें, इस्लामी संदेश और खूबसूरत कैलीग्राफी फ्रेम्स की मांग बढ़ जाती है। लोग अपने घरों, मस्जिदों और दफ्तरों में आध्यात्मिक माहौल बनाने के लिए उनके आर्टवर्क खरीदते हैं। उनकी लिखावट में सादगी, गहराई और भावनात्मक जुड़ाव साफ नजर आता है। यही वजह है कि उनकी कला देश ही नहीं, बल्कि विदेशों तक पसंद की जाती है। ज़ेहरा का करियर गोल सिर्फ एक सफल कलाकार बनना नहीं है, बल्कि वह चाहती हैं कि भारतीय इस्लामी कैलीग्राफी को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिले। उनका सपना है कि आने वाले समय में वह एक बड़ा प्रशिक्षण संस्थान शुरू करें, जहां लड़कियां और महिलाएं प्रोफेशनल तरीके से कैलीग्राफी सीख सकें और उसे अपने रोजगार का जरिया बना सकें।
 
 
रमजान के मौके पर उन्होंने एक खास रमजान स्पेशल सुन्नत किट भी तैयार की है, जिसमें अफगान कैप, मिस्वाक, तस्बीह, सुरमा और प्रीमियम परफ्यूम शामिल है। इसकी कीमत सिर्फ 249 रुपये रखी गई है और पूरे भारत में मुफ्त डिलीवरी दी जा रही है। उनका उद्देश्य यह है कि लोग रमजान की शुरुआत सुन्नत के साथ करें और अपने अपनों को भी यह किट तोहफे में दें। इस पहल की खास बात यह है कि इसके निर्माण और पैकिंग के काम में कई महिलाओं को जोड़ा गया है। घर से काम करने की इच्छा रखने वाली महिलाओं को इससे रोजगार का अवसर मिल रहा है। ऑर्डर मैनेजमेंट, पैकिंग, सोशल मीडिया प्रमोशन जैसे कामों में महिलाएं सक्रिय रूप से जुड़ रही हैं।
 
 
ज़ेहरा का मानना है कि रमजान में इबादत और काम को संतुलित करना संभव है, बस समय का सही प्रबंधन जरूरी है। सहरी के बाद का समय इबादत के लिए रखा जा सकता है, दिन में जरूरी काम निपटाए जा सकते हैं और इफ्तार के बाद परिवार के साथ समय बिताया जा सकता है। वह कहती हैं कि रमजान अनुशासन सिखाता है और यही अनुशासन काम में भी सफलता दिलाता है। उनका संदेश खास तौर पर महिलाओं के लिए है कि वे अपनी क्षमताओं को पहचानें और छोटे स्तर से शुरुआत करने से न डरें।
 
 
 
 
रमजान के अलावा भी महिलाओं के लिए कई बिजनेस आइडिया हैं जिन्हें घर से शुरू किया जा सकता है। जैसे कि हैंडमेड प्रोडक्ट्स बनाना, ऑनलाइन बेकरी या कुकिंग ऑर्डर लेना, सिलाई और डिजाइनिंग का काम, डिजिटल मार्केटिंग सेवाएं देना, या सोशल मीडिया के जरिए अपने हुनर को प्रदर्शित करना। आज के दौर में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ने कारोबार शुरू करना पहले से आसान बना दिया है। अगर किसी को लिखावट या डिजाइनिंग का शौक है, तो वह पर्सनलाइज्ड गिफ्ट आइटम या वॉल फ्रेम बनाकर बेच सकती है। इसी तरह, इत्र, स्किनकेयर या हर्बल प्रोडक्ट्स का छोटा व्यवसाय भी शुरू किया जा सकता है।
 
 
ज़ेहरा कायनात की यात्रा यह दिखाती है कि आस्था और आत्मनिर्भरता साथ-साथ चल सकती हैं। उन्होंने अपने हुनर को सिर्फ कला तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उसे रोजगार और प्रेरणा का माध्यम बनाया। रमजान के इस पवित्र महीने में उनकी पहल यह संदेश देती है कि इबादत के साथ-साथ समाज के लिए कुछ सकारात्मक करना भी जरूरी है। उनकी कहानी उन महिलाओं के लिए उम्मीद की किरण है, जो घर की जिम्मेदारियों के बीच अपने सपनों को पूरा करना चाहती हैं। मेहनत, विश्वास और सही दिशा में उठाया गया छोटा कदम भी बड़ी सफलता का रास्ता खोल सकता है।
 
 

आज वह सिर्फ खुद ही कैलीग्राफी नहीं करतीं, बल्कि बच्चों और युवाओं को भी यह कला सिखाती हैं। उनके ऑनलाइन और ऑफलाइन क्लासेस में कई बच्चे जुड़ रहे हैं। वह उन्हें अक्षरों की खूबसूरती, धैर्य और रचनात्मकता का महत्व समझाती हैं। उनका मानना है कि कैलीग्राफी सिर्फ लिखावट नहीं, बल्कि एक तरह की इबादत और ध्यान है, जो मन को सुकून देता है। बच्चों को यह कला सिखाकर वह नई पीढ़ी को रचनात्मक दिशा दे रही हैं।