मक्का और मदीना में इतिक़ाफ़ 2026: जानें रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया और शर्तें

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 23-02-2026
Itikaaf in Mecca and Medina 2026: Know the registration process and conditions
Itikaaf in Mecca and Medina 2026: Know the registration process and conditions

 

गुलाम कादिर

यह लेख उन भारतीय जायरीन के लिए बहुत मददगार है जो इस साल रमजान में उमरा के साथ-साथ मक्का या मदीना की मस्जिदों में इतिकाफ करने की ख्वाहिश रखते हैं। हर मुसलमान चाहता है कि उसे जीवन में एक बार हरम शरीफ के साये में इबादत का मौका मिले। लेकिन वहां इतिकाफ करना इतना भी सरल नहीं है। इसके लिए आपको वक्त रहते सही जानकारी और तैयारी की जरूरत होती है। सऊदी सरकार ने साल 2026 यानी हिजरी साल 1447 के लिए इतिकाफ के रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

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इतिकाफ एक ऐसी सुन्नत है जिसमें बंदा दुनिया के तमाम कामों को छोड़कर दस दिनों के लिए मस्जिद के कोने में खुद को अल्लाह की इबादत के लिए समर्पित कर देता है। रमजान के आखिरी दस दिनों में की जाने वाली यह इबादत रूहानी सुकून का जरिया बनती है। मक्का की मस्जिद अल-हरम और मदीना की मस्जिद-अन-नबवी में यह मौका मिलना किसी बड़ी खुशकिस्मती से कम नहीं है।

सऊदी अरब में दो पवित्र मस्जिदों के मामलों को देखने वाली जनरल प्रेसीडेंसी ने इस साल के लिए गाइडलाइंस जारी कर दी हैं। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन का काम 20 फरवरी 2026 से शुरू हो चुका है। यह तारीख हिजरी कैलेंडर के हिसाब से 3 रमजान है। सुबह 11 बजे से पोर्टल खुल गया है। अगर आप भी वहां इतिकाफ करना चाहते हैं तो आपको फौरन आवेदन करना चाहिए। वहां जगह बहुत सीमित होती है और दुनिया भर से लाखों लोग इसके लिए कोशिश करते हैं।

Itikaf 2026 at Haramain: Where and How to Register

इस साल इतिकाफ की शुरुआत 9 मार्च 2026 से होगी। यह रमजान की 20वीं तारीख होगी। इसकी समाप्ति 19 मार्च को होगी जब ईद का चांद नजर आएगा। यानी पूरे दस दिनों का यह सफर आपकी जिंदगी बदल सकता है। रजिस्ट्रेशन के लिए कुछ बुनियादी नियम तय किए गए हैं। आवेदक की उम्र कम से कम 18 साल होनी चाहिए। यह सुविधा पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए उपलब्ध है। हालांकि आवेदन करने के लिए आपके पास वैध सऊदी इकामा या जरूरी दस्तावेज होने चाहिए।

पंजीकरण की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल है। आपको हरमैन की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा। वहां इतिकाफ के लिए एक खास पेज बनाया गया है। नागरिकों और निवासियों के लिए बनाए गए "नफत" पोर्टल के जरिए आपको लॉग इन करना होगा। इसके बाद आपको यह चुनना होगा कि आप मक्का में रहना चाहते हैं या मदीना में। फॉर्म भरते समय अपनी पूरी जानकारी ध्यान से दें। फॉर्म जमा करने के बाद उसे रिव्यू किया जाएगा। अगर आपका चयन हो जाता है तो आपके मोबाइल पर एक एसएमएस आएगा। यह मैसेज ही आपका कन्फर्मेशन होगा।

वहां रहने के लिए प्रेसीडेंसी ने खास नियम बनाए हैं। वे हरम शरीफ के अंदर इतिकाफ करने वालों के लिए एक अलग हिस्सा तय कर देते हैं। आपको वहीं रहकर अपनी इबादत पूरी करनी होती है। वहां बहुत ज्यादा सामान ले जाने की इजाजत नहीं होती। आपको मशवरा दिया जाता है कि सिर्फ अपनी नमाज वाली चटाई, एक हल्की चादर, तकिया और एहराम के दो कपड़े साथ रखें। ज्यादा भारी सामान आपको इबादत में खलल डाल सकता है और वहां भीड़ भी बहुत होती है।

मक्का और मदीना में इतिकाफ करना आम मस्जिदों से अलग है। यहां का सवाब और दर्जा बहुत ऊंचा है। जैसे रमजान में उमरा करना हज के बराबर माना जाता है, वैसे ही यहां इतिकाफ करना भी रूहानियत की बुलंदियों को छूने जैसा है। पैगंबर मुहम्मद साहब की यह प्यारी सुन्नत हमें सिखाती है कि हम कुछ वक्त के लिए दुनिया की भागदौड़ भूल जाएं। अपना पूरा वक्त कुरान की तिलावत, नमाज और दुआओं में बिताएं।

जो लोग पहली बार जा रहे हैं उन्हें इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वहां अनुशासन बहुत सख्त होता है। आपको वहां के अधिकारियों के निर्देशों का पालन करना होगा। रजिस्ट्रेशन पोर्टल का सक्रिय होना इस बात का संकेत है कि अब तैयारी का समय आ गया है। देरी करने पर पोर्टल बंद हो सकता है या सीटें भर सकती हैं। इसलिए जो भी जायरीन भारत से वहां जा रहे हैं वे अपना परमिट पहले ही पक्का कर लें। बिना परमिट के वहां रहने की अनुमति नहीं मिलती है।

यह दस दिन खुद को पहचानने और खुदा से रिश्ता जोड़ने के दिन होते हैं। मस्जिद अल-हरम की भव्यता और मस्जिद-ए-नबवी का सुकून आपकी थकान मिटा देगा। सरकार ने जायरीन की सुविधा के लिए अब सब कुछ ऑनलाइन कर दिया है ताकि किसी को परेशानी न हो। आप घर बैठे अपनी अर्जी लगा सकते हैं। अगर किस्मत ने साथ दिया तो इस बार आपका रमजान मक्का या मदीना की गलियों में इबादत करते हुए बीतेगा।

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इतिकाफ की यह सुन्नत न केवल व्यक्तिगत शांति देती है बल्कि हमें सामाजिक न्याय और समानता का पाठ भी पढ़ाती है। वहां हर देश और हर रंग का इंसान एक ही कतार में बैठा होता है। न कोई छोटा होता है न कोई बड़ा। सब एक ही ईश्वर की इबादत में मगन होते हैं। यही इस्लाम की खूबसूरती है। अगर आप भी इस रूहानी सफर का हिस्सा बनना चाहते हैं तो फौरन दी गई वेबसाइट पर जाएं और अपनी प्रक्रिया पूरी करें। यह मौका साल में सिर्फ एक बार आता है। इसे हाथ से न जाने दें।