गुलाम कादिर
आस्था का समंदर जब हकीकत की जमीन पर उतरता है, तो नजारा कैसा होता है? इसका जवाब इस वक्त सऊदी अरब के मक्का शहर में मिल रहा है। साल 2026 के रमजान ने इबादत के सारे पुराने रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। चौथे रमजान यानी शनिवार के दिन मक्का की मस्जिद-अल-हराम में रूहानियत का वो सैलाब उमड़ा, जिसकी कल्पना भी मुश्किल थी। सिर्फ एक दिन में 9 लाख 4 हजार लोगों ने उमराह किया और नमाज अदा की। यह दुनिया के इतिहास में किसी भी मस्जिद में एक दिन में जुटने वाली सबसे बड़ी तादाद है।
सफेद लिबास पहने लाखों लोग जब काबा के चारों तरफ परिक्रमा करते हैं, तो लगता है जैसे पूरी दुनिया एक ही केंद्र पर सिमट गई हो। रमजान का यह पहला हफ्ता है। पूरी दुनिया से लोग यहाँ पहुंच रहे हैं। उमराह करने वालों के साथ-साथ नमाजियों और एतकाफ में बैठने वालों की भीड़ ने हर कोने को भर दिया है। मस्जिद के भीतर का हिस्सा हो या बाहर के सहन, हर तरफ बस इबादत करने वाले ही नजर आ रहे हैं। इस भारी भीड़ के बावजूद सबसे हैरान करने वाली बात यहाँ का अनुशासन है।
✨ A historic moment at the Makkah Grand Mosque! ✨
On Saturday, 4th of Ramadan 1447 AH, 904,000 pilgrims performed Umrah in a single day, the highest number ever recorded. 🕋🌙🤍 pic.twitter.com/4LCj3rJAcV
— Saudi Expatriates (@saudiexpat) February 24, 2026
इतने बड़े जमावड़े को संभालना किसी चुनौती से कम नहीं था। सऊदी प्रशासन ने इसके लिए महीनों पहले से तैयारी की थी। भीड़ को काबू करने के लिए मस्जिद के पास वाले रास्तों को सिर्फ पैदल चलने वालों के लिए सुरक्षित कर दिया गया है। गाड़ियों की एंट्री बंद है। अगर कोई गाड़ी गलत जगह खड़ी मिलती है, तो उसे तुरंत हटा दिया जाता है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि पैदल चलने वालों की सुरक्षा सबसे पहले है। भीड़ के दौरान किसी भी अनहोनी से बचने के लिए चप्पे-चप्पे पर सुरक्षाकर्मी तैनात हैं।
मस्जिद के दरवाजों पर इस बार खास तरह की डिजिटल लाइटें लगाई गई हैं। यह तकनीक बहुत सरल और असरदार है। अगर दरवाजे पर हरी लाइट जल रही है, तो इसका मतलब है कि अंदर जगह खाली है। अगर लाइट लाल हो जाती है, तो इसका सीधा संकेत है कि अंदर जगह भर चुकी है और अब प्रवेश मना है। इससे भगदड़ जैसी स्थिति पैदा नहीं होती। सुरक्षाकर्मी बहुत ही नरमी और सलीके से लोगों को उन जगहों पर भेजते हैं जहाँ भीड़ कम होती है।

उमराह करने वालों के लिए भी खास इंतजाम किए गए हैं। काबा के ठीक पास वाले सफेद संगमरमर के हिस्से यानी 'मताफ' को इस बार पूरी तरह से सिर्फ उमराह करने वालों के लिए रखा गया है। वहाँ नमाज पढ़ने की इजाजत नहीं है ताकि लोग बिना किसी रुकावट के अपना तवाफ पूरा कर सकें। बुजुर्गों और दिव्यांगों के लिए भी अलग से इंतजाम हैं। उनके लिए पहली मंजिल पर इलेक्ट्रॉनिक गाड़ियां मौजूद हैं। प्रशासन ने अपील की है कि लोग छोटे बच्चों को बहुत ज्यादा भीड़ वाले हिस्सों में न लाएं।
मक्का पहुँचने के लिए ट्रांसपोर्ट का नेटवर्क भी कमाल का है। किंग अब्दुलअजीज एयरपोर्ट से सीधी बसें चल रही हैं। हरमैन हाई-स्पीड ट्रेन सर्विस लोगों को रुसैफह स्टेशन तक ला रही है। वहाँ से शटल बसें हर वक्त तैयार रहती हैं। जो लोग अपनी गाड़ियों से आ रहे हैं, उनके लिए शहर के बाहर 14 बड़े पार्किंग एरिया बनाए गए हैं। शहर के अंदर निजी गाड़ियों का घुसना लगभग नामुमकिन है। यह सब इसलिए किया गया है ताकि पैदल चलने वालों को कोई परेशानी न हो।
इतनी भारी भीड़ होने के बाद भी व्यवस्था एकदम सुचारू है। प्रार्थना क्षेत्र, रास्ते और आंगन अपनी पूरी क्षमता के साथ भरे हुए हैं। अधिकारियों का कहना है कि मस्जिद के विस्तार का काम रंग ला रहा है। अब पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा लोग एक साथ इबादत कर सकते हैं। रमजान का अभी शुरुआती दौर है। माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में यह आंकड़ा 10 लाख को भी पार कर सकता है। खासकर आखिरी दस दिनों में जब 'लैलातुल कद्र' की रात आती है, तब मक्का में पूरी दुनिया का संगम होता है।
The Grand Mosque on the Third Day of Ramadan: A Scene of Tranquility.#SPAGOV pic.twitter.com/dmdwUHQKzX
— SPAENG (@Spa_Eng) February 20, 2026
प्रशासन ने कुछ सख्त नियम भी लागू किए हैं। मस्जिद के अंदर या सहन में सिगरेट पीना, सामान बेचना या भीख मांगना पूरी तरह बंद है। लोगों से कहा गया है कि वे अपना सामान होटल में ही छोड़ कर आएं। मस्जिद के रास्तों या गलियारों में बैठकर रास्ता न रोकें। गर्मी को देखते हुए लोगों को सलाह दी जा रही है कि वे पानी पीते रहें और अपनी सेहत का ख्याल रखें। हर जगह मेडिकल टीमें तैनात हैं।
यह रिकॉर्ड तोड़ आंकड़े सिर्फ एक नंबर नहीं हैं। यह दिखाते हैं कि लोगों का अपनी आस्था के प्रति लगाव कितना गहरा है। इतनी भीड़ में भी एक-दूसरे की मदद करना और शांति बनाए रखना ही रमजान का असली संदेश है। मक्का और मदीना की ये तस्वीरें दुनिया को भाईचारे और सब्र का पाठ पढ़ा रही हैं। जैसे-जैसे रमजान आगे बढ़ेगा, इबादत का यह जुनून और भी परवान चढ़ेगा।