रोज़े से जुड़ी गलतफहमियाँ और उनकी हक़ीक़त

Story by  फिरदौस खान | Published by  [email protected] | Date 24-02-2026
Misconceptions about fasting and their reality
Misconceptions about fasting and their reality

 

-डॉ. फ़िरदौस ख़ान   
 
माहे रमज़ान में रोज़े से वाबस्ता बहुत-सी ग़लत फ़हमियों पर चर्चा होती है, जैसे रोज़ा किन चीज़ों से टूटता है और किन चीज़ों से रोज़ा नहीं टूटता। बहुत से लोगों को इस बारे में ज़्यादा इल्म नहीं होता। जो बच्चे मदरसों में पढ़ते हैं, उन्हें दीनी मामलों का अच्छा ख़ासा इल्म होता है, लेकिन जिन्होंने कभी मदरसे का मुंह नहीं देखा और वे दीनी माहौल से भी दूर रहे या फिर दीनी मामलों में उनकी दिलचस्पी नहीं रही, तो उन्हें सबसे ज़्यादा परेशानी होती है।
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आज इन ग़लत फ़हमियों के बारे में बात करते हैं। रोज़ा जिन चीज़ों से टूटता है, उसके बारे में शरीयत ने नियम तय किए हुये हैं। मुख़तलिफ़ हदीसों में इनका ज़िक्र मिलता है।  
 
सवाल : सहरी में आँख न खुलने की वजह से सहरी खाना छूट जाए, तो क्या रोज़ा नहीं होगा?  

जवाब : सहरी खाना रोज़े के लिए लाज़िमी नहीं है। हाँ, सहरी खाना सुन्नत ज़रूर है। हज़रत अनस बिन मालिक रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया- "सहरी खाया करो, क्योंकि सहरी खाने में बरकत है।" (सहीह बुख़ारी : 1923, सहीह मुस्लिम : 1095)
 
अगर किसी की रोज़ा रखने की नीयत थी, लेकिन किसी वजह से सहरी में उसकी आँख नहीं खुली और जब आँख खुली तो उसकी नीयत रोज़े की हो, तो उसका रोज़ा हो जाएगा। ख़ास बात ये भी है कि उसने दोपहर होने से पहले रोज़े की नीयत की हो और नींद खुलने के बाद कुछ खाया-पिया न हो।    
 
सवाल : क्या रोज़े में भूल से कुछ खाने या पीने से रोज़ा टूट जाता है? 

जवाब : अगर कोई शख़्स जानबूझ कर रोज़े के दौरान कुछ खा या पी लेता है, तो इससे उसका रोज़ा टूट जाता है। लेकिन उसने अनजाने में कुछ खा या पी लिया, तो इससे उसका रोज़ा नहीं टूटेगा।  हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया- "अगर कोई भूल से कुछ खा या पी ले तो उसे अपना रोज़ा पूरा करना चाहिए, क्योंकि जो कुछ उसने खाया या पिया है, वह अल्लाह की तरफ़ से उसे दिया गया है।"(सहीह बुखारी : 1933)
इससे पता चलता है कि जानबूझकर खाने-पीने से ही रोज़ा टूटता है, भूल में खाने या खाने से रोज़ा नहीं टूटता।
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सवाल : क्या उल्टी होने से रोज़ा टूट जाता है?

जवाब : उल्टी होना किसी के अपने बस में नहीं है, इसलिए उल्टी होने से रोज़ा नहीं टूटता। हाँ, अगर कोई जानबूझ कर रोज़े ही हालत में मुंह में अंगुली डालकर उल्टी करता है, तो इससे रोज़ा टूट जाता है।
हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया- "जो कोई उल्टी से बेहाल हो जाए, उसे रोज़ा क़ज़ा करने की ज़रूरत नहीं है, और जो कोई जानबूझ कर उल्टी करे, उसे क़ज़ा करनी होगी।" (सुनन तिरमिज़ी: 720)
 
कहने का मतलब ये है कि जिसे ख़ुद-ब-ख़ुद उल्टी हो जाए, तो वह अपना रोज़ा जारी रखे, लेकिन जिसने जानबूझ कर उल्टी की है, उसे रमज़ान के बाद शव्वाल के महीने में इसके बदले में रोज़ा रखना होगा।  
 
सवाल : क्या एहतलाम से रोज़ा टूट जाता है?
 
जवाब : ये भी इंसान के अपने बस में नहीं है, इसलिए रोज़ा नहीं टूटता। हाँ, अगर जानबूझ कर कुछ ऐसा किया जाए, जिससे एहतलाम हो तो रोज़ा टूट जाता है।   
 
सवाल : क्या संबंध बनाने से रोज़ा टूट जाता है? 

जवाब : रोज़े की हालत में संबंध बनाने से न सिर्फ़ रोज़ा टूटता है, बल्कि इसके लिए भारी कफ़्फ़ारा भी अदा करना पड़ता है।हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि जब हम अल्लाह के रसूल हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के साथ बैठे थे, तभी एक शख़्स आया और बोला- “ऐ अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम! मैं बर्बाद हो गया हूं।”
 
अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया- “क्या बात है।“ उसने जवाब दिया- “मैंने रोज़ा रखते हुए अपनी बीवी के साथ संबंध बनाया।” अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया- “क्या तुम एक ग़ुलाम को आज़ाद कर सकते हो?” उसने इनकार कर दिया।
 
अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया- “क्या तुम लगातार दो महीने रोज़े रख सकते हो?” उसने इनकार कर दिया। अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया- “क्या तुम साठ ग़रीबों को खाना खिला सकते हो?” उसने इनकार कर दिया। रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ख़ामोश रहे और जब हम इस हालत में थे, तभी रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास खजूर से भरी एक बड़ी टोकरी लाई गयी।
 
आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया- “सवाल पूछने वाला कहां है?” उसने जवाब दिया- “मैं यहां हूं।” रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया- “यह खजूर की टोकरी ले लो और इसे ख़ैरात कर दो।” उस शख़्स ने कहा- "क्या मैं इसे अपने से भी ग़रीब को दे दूं? अल्लाह की क़सम, मदीने के इन दो पहाड़ों के बीच कोई भी परिवार मुझसे ग़रीब नहीं है।" रसूल  सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम मुस्कुराये, यहां तक कि आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के दाँत मुबारक दिखने लगे, और फिर फ़रमाया- "इससे अपने परिवार का पेट भरो।" (सहीह बुख़ारी : 1936)
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सवाल : क्या तेल, ख़ुशबू, सुरमा व काजल लगाने और नाफ़ के नीचे के बाल साफ़ करने से रोज़ा टूट जाता है?     
 
जवाब : तेल, ख़ुशबू, सुरमा व काजल लगाने और नाफ़ के नीचे के बाल साफ़ करने से रोज़ा नहीं टूटता, बल्कि इससे इंसान की शख़्सियत में निखार आता है। रोज़े की हालत में तेल, ख़ुशबू और सुरमा लगाना तो अल्लाह के रसूल हज़रत मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सुन्नत है। हज़रत आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा से रिवायत है- "अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम रमज़ान में रोज़े की हालत में आँखों में सुरमा लगाया करते थे।"
(इब्ने माजा : 1678)
 
सवाल : क्या मिस्वाक या पेस्ट करने से रोज़ा टूट जाता है?  

जवाब : मिस्वाक या पेस्ट करने से रोज़ा नहीं टूटता। हाँ, इस बात का ध्यान रखा जाना चाहिए कि मिस्वाक का रेशा या पेस्ट हलक़ में न जाए।     
  
सवाल : क्या चोट की वजह से ख़ून निकलने या रक्त जांच के लिए ख़ून निकालने से रोज़ा टूट जाता है?

जवाब : ऐसा बिल्कुल नहीं है। जिस्म से ख़ून निकलने से रोज़ा नहीं टूटता।   
 
सवाल : क्या इंजेक्शन लगवाने से रोज़ा टूट जाता है?

जवाब : कुछ उलेमा ऐसा सोचते हैं कि इंजेक्शन लगवाने से रोज़ा टूट जाता है। बहुत से मानते हैं कि इंजेक्शन लगवाने से रोज़ा नहीं टूटता। अगर किसी की हालत बहुत ख़राब है और उसने मजबूरी में इंजेक्शन लगवाया है, तो उसका रोज़ा नहीं टूटेगा। हाँ, अगर ऐसी ऐसी दवा ली है जो पेट या दिमाग़ तक पहुंचती हो या ताक़त के लिए ली जाए, तो उससे रोज़ा टूट जाता है।
 
सवाल : क्या बलग़म या थूक निग़लने से रोज़ा टूट जाता है?

जवाब : बलग़म या थूक निग़लने से रोज़ा नहीं टूटता, क्योंकि ये बाहर से मुंह में दाख़िल नहीं होता।
 
(लेखिका आलिमा हैं और उन्होंने फ़हम अल क़ुरआन लिखा है)