हरजिंदर
कहावत है जैसा देश वैसा भेष। लेकिन यह कुछ हद तक ही सही है। सच यह है कि दुनिया भर के लोग और खासकर हम भारतीय जब कहीं विदेश में जाते हैं तो अपनी संस्कृति, अपनी सोच और अपने तौर तरीके भी साथ ले जाते हैं।इसमें कुछ ज्यादा बुरा भी नहीं है। एक तो अक्सर दो संस्कृतियों के मिलने जुलने से जो नई संस्कृति बनती है वह वह आमतौर पर ज्यादा स्मृद्ध होती है।
बहुत सी और अच्छी चीजें भी होती हैं। मसलन आप देख सकते हैं कि दुनिया भर में भारतीय खान-पान ने लोगों को किस तरह लुभाया है। यह भारत में भी हुआ है जहां पश्चिम एशिया से लेकर यूरोप और चीन तक के स्वाद लोगोें तक पहंुचे हैं।
लेकिन फिलहाल जो हो रहा है उसमें बहुत कुछ बुरा भी है। अब लोग दुनिया भर में अपने पूर्वाग्रह और अपनी बुराइयां भी लेकर जा रहे हैं।ब्रिटेन के अखबार टेलीग्राफ पर यकीन करें तो भारत में जो सांप्रदायिक और भाषाई दुराग्रह हैं वे भील अब भारतीयों के साथ वहां पहंुच चुके हैं।

इस अखबार ने पिछले दिनों अपने अध्यन में पाया कि इन दिनों ब्रिटेन में जो भारतीय अपने घर का एक हिस्सा किराए पर देना चाहते हैं वे किरायेदार के रूप में अपनी भाषा और अपने धर्म के लोग ही चाहते हैं।
ऐसे काम के लिए पहले लोग अखबारों मेें विज्ञापन देते थे लेकिन अब ये विज्ञापन आॅनलाइन दिए जाते हैं। अखबार ने पाया कि ऐसे ज्यादातर विज्ञापनों में हिंदू किराएदार चाहिए, मुस्लिम किराएदार चाहिए, पंजाबी, गुजराती या तमिल किराएदार चाहिए जैसी चीजें लिखी होती हैं।
Some more glimpses from yesterday's engagements with the communities.#IndiaUKPartnership #IndianDiaspora #CultureConnect #IndiansinUK #IndianCommunity #IncredibleIndia #BemisaalBharat #LivingBridge #IndiaUK@MEAIndia @IndianDiplomacy @MIB_India @getkart@PIB_India @mygovindia… pic.twitter.com/NHMiwk8aZI
— India in the UK (@HCI_London) April 21, 2026
यहां इस बात का उल्लेख जरूरी है कि ब्रिटिश कानूनों के हिसाब से यह गैरकानूनी है। आप किराएदार तो चुन सकते हैं लेकिन उसका धर्म या भाषा नहीं चुन सकते।जब तक ये विज्ञापन अखबारों में छपते थे तो अखबार ऐसी चीजों को छापने से परहेज करते थे।
लेकिन आॅनलाइन दुनिया में ऐसी चीजों का ध्यान नहीं रखा जाता। लोग भी वहां कानूनों के प्रति बेपरवाह हो जाते हैं।आॅनलाइन दुनिया से शुरू में हमने यही उम्मीद की थी कि यह हमारे आसमान को और ज्यादा खोलेगी, लेकिन यह तो उसे और संकुचित बना रही है।

ब्रिटेन का यह कानून सिर्फ ऐसे ही मामलों में इसकी छूट देता है जब किराएदार को मकान मालिक के साथ बाथरूम और किचेन शेयर करना हो। विज्ञापन देने वालों को लगता है कि वे इस कानून की आड़ में भी बच सकते हैं। इसलिए ऐसे विज्ञापन बिना किसी डर के दिए जाते हैं।इसी के साथ अब यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या हमारे ये दुराग्रह एक दिन पूरी दुनिया को ही घैटो में तब्दील कर देंगे।
( लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)
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