यूनुस अलवी | मेवात, अलवर
मेवात की पहचान सिर्फ उसकी ऐतिहासिक विरासत या सांस्कृतिक विविधता से नहीं है। यह इलाका अपनी समृद्ध लोक संगीत परंपरा के लिए भी जाना जाता है। मेवात घराने का नाम देश और दुनिया में सम्मान के साथ लिया जाता है। इसी धरती ने ऐसे कलाकार दिए जिन्होंने लोक कला को सीमाओं से बाहर पहुंचाया। आज उसी परंपरा को आगे बढ़ाने वाले युवा कलाकारों में यूसुफ खान जोगी मेवाती का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है।वह फेसबुक संस्थापक मार्क जुकरबरक के समक्ष भी प्रोग्राम प्रस्तुत कर चुके हैं।

अलवर जिले के मुंगास्का गांव में 3 दिसंबर 1995 को जन्मे यूसुफ खान ऐसे परिवार से आते हैं जिसकी कई पीढ़ियां लोक संगीत और भपंग वादन से जुड़ी रही हैं। उनके दादा स्वर्गीय जहूर खान जोगी मेवाती और पिता स्वर्गीय उमर फारुख लोक कला की दुनिया के सम्मानित नाम रहे हैं। यूसुफ को संगीत विरासत में मिला। बचपन से ही उन्होंने अपने दादा को सुनते और सीखते हुए इस कला की बारीकियां समझीं।
आज जब लोक कलाएं आधुनिक मनोरंजन के बीच संघर्ष कर रही हैं, तब यूसुफ खान ने अपनी विरासत को केवल संभाला ही नहीं बल्कि उसे नए मंच भी दिए हैं।
भपंग मेवात और पूर्वी राजस्थान का एक अनूठा लोक वाद्य है। इसे एक तार वाला ताल वाद्य भी कहा जाता है। लोक मान्यता है कि इसकी प्रेरणा भगवान शिव के डमरू से जुड़ी हुई है। शिवरात्रि और धार्मिक आयोजनों में इसका विशेष महत्व माना जाता है। जब भपंग की लय लोक गायन के साथ मिलती है तो एक अलग ही संगीत संसार रचती है।

यूसुफ खान की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद भी पारंपरिक कला को ही अपना जीवन बनाया। आज के समय में जब अधिकांश युवा बेहतर नौकरी और आधुनिक करियर की तलाश में रहते हैं, तब यूसुफ का यह फैसला अपनी जड़ों से जुड़ाव का मजबूत उदाहरण बनकर सामने आता है।
उनकी प्रतिभा ने उन्हें देश ही नहीं बल्कि विदेशों तक पहुंचाया। पुर्तगाल, बेल्जियम, पोलैंड, स्विट्जरलैंड, जर्मनी, जापान और नेपाल सहित 20 से अधिक देशों में वे भपंग की प्रस्तुति दे चुके हैं। उनके कार्यक्रमों ने अंतरराष्ट्रीय दर्शकों को मेवात की लोक संस्कृति से परिचित कराया।
यूसुफ खान को उस समय भी विशेष पहचान मिली जब उन्होंने फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग के सामने अपनी कला का प्रदर्शन किया। इसके अलावा डीडी1 के लोकप्रिय कार्यक्रम "जानो अपना देश सुनो कहानी" और "इंडियाज गॉट टैलेंट" जैसे मंचों पर भी उन्होंने अपनी प्रस्तुति से दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया।

उनकी उपलब्धियां केवल मंचीय प्रस्तुतियों तक सीमित नहीं हैं। आकाशवाणी जयपुर से उन्हें बी हाई ग्रेड प्राप्त है। उन्होंने संगीत नाटक अकादमी दिल्ली, राजस्थान संगीत नाटक अकादमी जोधपुर, राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के मंचों पर भी प्रदर्शन किया है।
हाल ही में संस्कृति मंत्रालय द्वारा उन्हें जूनियर फेलोशिप 2025-26 के लिए चुना गया। यह सम्मान उनके शोध और लोक संस्कृति संरक्षण के प्रयासों की बड़ी पहचान माना जा रहा है।
पुरस्कारों की बात करें तो यूसुफ खान को वर्ष 2024 का उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा राष्ट्रीय पुरस्कार मिल चुका है। इसके अलावा राजस्थान संगीत नाटक अकादमी युवा पुरस्कार 2023 और राज्य स्तरीय सम्मान भी उनके नाम दर्ज हैं। जिला प्रशासन और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने भी उन्हें कई बार सम्मानित किया है।
लेकिन यूसुफ खान की सबसे बड़ी उपलब्धि शायद मंचों पर मिली तालियां नहीं हैं। उनका सबसे महत्वपूर्ण काम मेवात की मौखिक परंपराओं को लिखित रूप देना है।
मेवात की लोक कथाएं सदियों से लोगों की याददाश्त और लोक गायकों की आवाजों में जीवित रही हैं। इनके लुप्त होने का खतरा लगातार बढ़ रहा था। ऐसे समय में यूसुफ खान ने 17 प्रमुख लोक कथाओं का दस्तावेजीकरण किया है।

इनमें मेवाती भाषा में महाभारत पर आधारित "पांडव का कड़ा", "कृष्णलीला", "लंका चढ़ाई", "ढोला मारवन" और "जाहर पीर की बात" जैसी महत्वपूर्ण लोक गाथाएं शामिल हैं। विशेष बात यह है कि मेवाती महाभारत को पहली बार व्यवस्थित रूप से लिखित स्वरूप देने का प्रयास भी उन्होंने ही किया है।
लोक संस्कृति के जानकार मानते हैं कि यह कार्य केवल साहित्यिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक संरक्षण का भी महत्वपूर्ण प्रयास है। आने वाली पीढ़ियों के लिए यह अमूल्य धरोहर साबित हो सकती है। यूसुफ खान केवल कलाकार नहीं हैं। वे एक सांस्कृतिक संरक्षक हैं। वे अपने बच्चों को भी भपंग और लोक गायन की शिक्षा दे रहे हैं ताकि यह परंपरा आने वाले समय में भी जीवित रहे।

हाल के वर्षों में पद्मश्री से सम्मानित गफरुद्दीन जोगी मेवाती की चर्चा के साथ मेवात में यह सवाल भी उठा कि जहूर खान जोगी मेवाती और उनके परिवार के योगदान को भी उसी गंभीरता से याद किया जाना चाहिए। यूसुफ खान आज उसी विरासत के प्रतिनिधि बनकर सामने आए हैं।
उनकी यात्रा बताती है कि लोक कला केवल अतीत की धरोहर नहीं है। यदि समर्पण हो तो उसे वर्तमान और भविष्य दोनों से जोड़ा जा सकता है।मेवात की सांस्कृतिक पहचान को जीवित रखने वाले यूसुफ खान जोगी मेवाती आज उस पीढ़ी का चेहरा हैं जो आधुनिक दुनिया में रहते हुए भी अपनी मिट्टी, अपनी भाषा और अपनी लोक परंपराओं को गर्व के साथ आगे बढ़ा रही है।
प्रश्न: यूसुफ खान जोगी कौन हैं?
उत्तर: यूसुफ खान जोगी मेवात के युवा लोक कलाकार और भपंग वादक हैं, जो मेवाती लोक संस्कृति के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
प्रश्न: भपंग क्या है?
उत्तर: भपंग मेवात और पूर्वी राजस्थान का पारंपरिक एकतारी लोक वाद्य है, जिसे शिव के डमरू से प्रेरित माना जाता है।
प्रश्न: यूसुफ खान को कौन से प्रमुख सम्मान मिले हैं?
उत्तर: उस्ताद बिस्मिल्लाह खां युवा राष्ट्रीय पुरस्कार 2024, राजस्थान संगीत नाटक अकादमी युवा पुरस्कार 2023 और संस्कृति मंत्रालय की जूनियर फेलोशिप।
प्रश्न: यूसुफ खान का सबसे बड़ा सांस्कृतिक योगदान क्या है?
उत्तर: उन्होंने मेवात की 17 प्रमुख लोक कथाओं का दस्तावेजीकरण किया है, जिनमें मेवाती महाभारत भी शामिल है।