पुस्तकालय बचेंगे तभी AI से ज्ञान सब तक पहुंचेगा

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 12-08-2026
Only if libraries survive will knowledge from AI reach everyone.
Only if libraries survive will knowledge from AI reach everyone.

 

gggडॉ. प्रितम भि. गेडाम

शिक्षा को उन्नत बनाने में पुस्तकालयों का मुख्य योगदान होता है, क्योंकि पुस्तकालय ज्ञान रूपी केंद्र के रूप में सतत प्रज्वलित रहते हैं। देश में तो नालंदा, तक्षशिला जैसे समृद्ध विश्वविद्यालय हुआ करते थे, जहां के पुस्तकालय अपनी विशाल समृद्धता और भव्यता के लिए विश्वविख्यात थे और दुनियाभर से विद्यार्थी यहां ज्ञान प्राप्ति के लिए आते थे।

आज के आधुनिक युग में तकनीक का उपयोग किये बिना कोई भी क्षेत्र विकास नहीं कर सकता, सभी को उन्नत सुविधाजनक कार्यप्रणाली चाहिए।  विश्वस्तर पर हर ओर तेजी से सूचनाओं का विस्फोट हो रहा है, वह सूचनाएं योग्य स्तर पर सटीक रूप में उसके उपयोक्ता तक कम समय में पहुंचाना बहुत आवश्यक होता है, यही कार्य नई तकनीकों द्वारा उत्कृष्ट स्वरूप में पुस्तकालय करते हैं।

मुद्रित भौतिक पुस्तकों, साहित्यों की जगह अभी तेजी से डिजिटल और ऑनलाइन संग्रहन ले रहे हैं। आज दुनियाभर की सूचनाएं और पाठनसाहित्य बस एक क्लिक पर उपलब्ध है, इसलिए पारंपरिक पुस्तकालय भी डिजिटल हो रहे हैं।

परंतु आज भी देश के ज्यादातर पुस्तकालय अपनी बदहाली की कहानी बयान करते नजर आते है, अधिकतम पुस्तकालयों में कौशलपूर्ण कर्मचारियों की भारी कमी है, उचित पाठन साहित्य नहीं, योग्य रखरखाव नहीं, संसाधनों की कमी, बुनियादी सुविधाएं तक नहीं, अनेक पुस्तकालयों के भवन खंडहर बन चुके हैं। निधि का अभाव तो हमेशा की ही समस्या हैं।

ऐसे पुस्तकालयों में जो बेशकीमती साहित्य संग्रहन है, वो बुरी तरह से बर्बाद होता हैं। ऐसी स्थिति में पुस्तकालय अपने उद्देश्य पूर्ति नियम से कोसो दूर होते जा रहे है, ऐसे में सबसे बड़ी आबादी के लिए उन्नत डिजिटल पुस्तकालय तो केवल एक सपना बनकर रह जाता हैं।

देश के अनेक राज्य सरकारों द्वारा अनुदानित सार्वजनिक पुस्तकालय कर्मचारियों के अत्यंत कम वेतन की समस्या तो दशकों से बनी ही हुयी हैं। महाराष्ट्र राज्य सरकार द्वारा अनुदानित अधिकतम स्कूलों और कनिष्ठ महाविद्यालयों के पुस्तकालयों में कुशल कर्मचारी ही नहीं है, दशकों से पदभरती नहीं हुई, बहुत से वरिष्ठ महाविद्यालयों में भी यही हाल हैं। अब अगर देश में हर तरफ ऐसी समस्या नजर आएगी तो उन्नत पुस्तकालयों का सपना कितने प्रतिशत आबादी के हिस्से में हकीकत बन पायेगा?

केंद्र सरकार द्वारा संचालित शिक्षा संस्थान, विश्वविद्यालय, महंगे निजी संस्थान पुस्तकालयों को विकसित करने पर जोर दे रहे हैं। अभी कुछ राज्यों और महानगर पालिकाओं ने भी डिजिटल पुस्तकालयों के निर्माण में सहभाग दिया है, लेकिन यह ऊंट के मुँह में जीरे के रूप में हैं। सबसे बड़ी आबादी अर्थात ग्रामीण, पिछड़े इलाके और वित्तीय सहायता के अभाववाले क्षेत्र तो बहुत खराब स्थिति में हैं।

नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2017-18 से 2022-23 के बिच देश के 92 हजार सरकारी स्कूल बंद हुए। एक लाख से ज्यादा स्कूल एक शिक्षक के भरोसे है, जबकि 7993 स्कूल में एक भी विद्यार्थी नहीं हैं।

प्राथमिक स्कूल में दाखिला लेनेवाले करीब 40 प्रतिशत विद्यार्थी कक्षा 12 तक कभी पहुंचते नहीं। नई शिक्षा प्रणाली 2020 अनुसार, स्कूलों को विकसित और सुविधासंपन्न बनाने के लिए बुनियादी सुविधाएं, विज्ञान प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, संगणक कक्षा, सभी विषयतज्ञ शिक्षक व कौशलपूर्ण कर्मचारी हर स्कूल में आवश्यक माना गया हैं।

इस तरह हम देशभर में समान गुणवत्ता वाली राष्ट्रस्तरीय शिक्षा प्रणाली का योग्य प्रबंधन किस प्रकार स्थापित कर पाएंगे और कैसे हम विश्वस्तरीय शिक्षा नीति से तालमेल बिठा पाएंगे?

दुनियाभर में छोटे-छोटे देश अपनी उन्नत तकनीक के भरोसे विकसित हैं। हर नई तकनीक हमें नए कौशल, विकास रणनीति, सकारात्मक-नकारात्मक प्रभाव और उन्नति की राह दिखाती हैं। अगर तकनीक का कौशलपूर्ण योग्य प्रबंधन करे तो विश्वस्तरीय सुविधासंपन्न केंद्रों का निर्माण कर सकते हैं।

आज के समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता भी हमें यही मौका दे रही है कि, कैसे हम एआई का प्रयोग अपने कार्यक्षेत्र को बेहतर बनाने में करे, जिससे पाठकों को उत्तम सेवाओं का लाभ तुरंत मिलें। यह लाभ देश के प्रत्येक पुस्तकालय के प्रत्येक पाठक तक आसानी से पहुंचना चाहिए।

एआई तकनीक पुस्तकालय सेवाओं को अधिक प्रभावी और उपयोगकर्ता-केंद्रित बना रही हैं। एआई ग्रंथालयाध्यक्ष का प्रतिस्थापन नहीं, बल्कि उसकी कार्यकौशलता और दक्षता बढ़ाने वाला एक शक्तिशाली सहायक उपकरण हैं।

पुस्तकालय में एआई पाठकों के विषयनुसार योग्य पाठन साहित्य की खोज, मार्गदर्शन और शोध विषय का विश्लेषण कर सुझाव, शोध अंतर, साहित्य समीक्षा, उन्नत खोज प्रणाली, सूचीबद्धता में समय की बचत, मानवीय त्रुटियों में कमी, तेज सूचना पुनर्प्राप्ति, संसाधनों का बेहतर संगठन, दुर्लभ पुस्तकों का दीर्घकालीन संरक्षण, बहुभाषी सुचना सेवाएं, मांगनुसार उत्कृष्ट पाठन साहित्य संग्रह विकास, मजबूत पुस्तकालय प्रशासन, साहित्यिक चोरी की पहचान, संस्थागत ज्ञान प्रबंधन, सुचना साक्षरता को बढ़ावा, पुस्तकालय के प्रत्येक विभाग और कार्य में एआई मददगार साबित हो रहा हैं। साथ ही एआई के नकारात्मक पहलुओं को भी ध्यान में रखते हुए सकारात्मक काम करे तो समय, पैसा, पुस्तक संग्रहन, ज्ञान का सटीक उपयोग होगा और प्रत्येक पाठक तक उसका उत्कृष्ट साहित्य योग्य समय में मिलेगा और यही पुस्तकालय का उद्देश्य हैं। 

एक अनुभव साझा कर रहा हूँ, कुछ समय पहले मेरे आलेख के एक पाठक महाराष्ट्र राज्य के खानदेश क्षेत्र के ग्रामीण भाग के एक बुजुर्ग व्यक्ति जो गांव के युवाओं के लिए बरसों से एक छोटासा पुस्तकालय चला रहे है, उनका मुझे कॉल आया। उन्होंने अपनी परिस्थिति और पुस्तकालय की वास्तविकता दर्शाते हुए समस्या मुझे बताई। उन्होंने कहा कि, वे 83 वर्षीय पेंशनधारी है, पेंशन निधि के भरोसे ही पुस्तकालय चलाते है, सरकार या लोगों से भी कोई मदद नहीं मिलती।

पेंशन भी इतनी कम है कि, बड़ी मुश्किल से खुद का गुजारा करके पुस्तकालय के लिए कुछ समाचारपत्रों की खरीदी ही कर पाते हैं। पुस्तकें खरीदने के लिए कुछ भी पैसे नहीं बचते। गांव की आबादी भी गरीब तबके की है, पुस्तकालय में अध्ययनकर्ता विद्यार्थी और प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी करनेवाले युवा ही अधिक आते है, आसपास के गावों में भी अन्य पुस्तकालय नहीं हैं।

आगे उन्होंने बताया कि, गांव के युवाओं की आखिरी उम्मीद यह पुस्तकालय है, इस पुस्तकालय को सरकारी अनुदान मिल सके, इसलिए उन्होंने बहुत प्रयास किये, लेकिन उन्हें कोई सफलता नहीं मिली हैं। बात करते-करते भावुक होकर वे रोने लगे और बोले कि, "उनके देहांत पश्चात यह पुस्तकालय हमेशा के लिए बंद हो जाएगा" जो इन स्थानीय युवाओं के अध्ययन का एकमात्र सहारा हैं।

पुस्तकालयों के विकास हेतु राज्य सरकार की योजनाएं, केंद्र सरकार द्वारा संचालित योजनाएं, इसके अलावा स्थानिक प्रशासन, विधायक, सांसद और नेताओं की ओर से भी सहायता निधि प्राप्त होती हैं। कुछ सेवाभावी संस्थाएं, धनी समाजसेवी भी मदद करते हैं।

इफ्ला, यूनेस्को जैसे अनेक अंतराष्ट्रीय संघ भी पुस्तकालय विकास में सहयोग करते हैं। लेकिन गंभीरता से सोचनेवाला विषय है कि, हमारे देश, समाज, आसपास में दशकों से ऐसे असंख्य ज्ञानरूपी पुस्तकालय है, जो खत्म होने के कगार पर भी पहुंच चुके है, बहुत से खत्म भी हो गए, परंतु आज भी उन तक उचित सहायता नहीं पहुंच पायी हैं। 

उन्नत तकनीक और मजबूत शिक्षाप्रणाली का फायदा हर तबके, हर वर्ग तक बिना किसी रूकावट के पहुंचना चाहिए, तभी सर्वांगीण विकास हो पायेगा। हर पुस्तकालय के विकास में पर्याप्त निधि, उन्नत संसाधन, बेहतर पाठन संग्रहन, उत्तम रखरखाव और उच्च शिक्षित कौशलपूर्ण कर्मचारी हों। वरना शिक्षा का ज्ञान स्रोत केंद्र अर्थात पुस्तकालय के विकास में एआई तकनीकी ज्ञानरूपी सेवा सिमित पाठक वर्ग तक ही बनकर न रह जायें, जो शैक्षिक गुणवत्ता की खायी के अंतर को बढ़ाने का एक जरिया हो।