बदलते कानूनों के दौर में निकाह को लेकर नई सावधानियां

Story by  मलिक असगर हाशमी | Published by  [email protected] | Date 10-07-2026
New precautions regarding Nikah amidst changing laws
New precautions regarding Nikah amidst changing laws

 

मलिक असगर हाशमी

देश में विवाह से जुड़े कानूनी नियम लगातार स्पष्ट हो रहे हैं। हाल के दिनों में तीन महत्वपूर्ण घटनाक्रमों ने विशेष रूप से मुस्लिम समाज के भीतर नई चर्चा शुरू कर दी है। पहला, अंतरधार्मिक विवाह के मामलों में कानूनी प्रक्रिया पूरी होने से पहले निकाह न कराने संबंधी छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड का निर्देश। दूसरा, केवल पंजीकृत मौलानाओं से निकाह कराने और प्रमाणित निकाहनामा लागू करने की पहल। तीसरा, बाल विवाह पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणी कि बाल विवाह निषेध कानून सभी धर्मों पर समान रूप से लागू होता है।

ये तीनों घटनाएं केवल प्रशासनिक फैसले नहीं हैं। ये संकेत देती हैं कि विवाह अब केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि एक महत्वपूर्ण कानूनी संस्था भी है। ऐसे में हर परिवार, हर धार्मिक विद्वान और हर युवा को कानून की जानकारी होना पहले से कहीं अधिक जरूरी हो गया है।

अंतरधार्मिक विवाह को लेकर पिछले कुछ वर्षों में देश के अलग अलग राज्यों में विवाद बढ़े हैं। ऐसे मामलों में अदालतें लगातार यह स्पष्ट करती रही हैं कि यदि दो अलग धर्मों के बालिग व्यक्ति विवाह करना चाहते हैं तो उन्हें भारतीय कानून के तहत निर्धारित प्रक्रिया अपनानी होगी। केवल धार्मिक रस्में भविष्य के कानूनी विवादों से सुरक्षा नहीं देतीं।

इसी संदर्भ में छत्तीसगढ़ वक्फ बोर्ड का निर्देश महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बोर्ड ने कहा है कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने से पहले किसी मौलाना को अंतरधार्मिक निकाह नहीं कराना चाहिए। इसका उद्देश्य विवाद पैदा करना नहीं बल्कि संबंधित पक्षों और निकाह कराने वाले व्यक्ति दोनों को कानूनी जोखिम से बचाना है।

दूसरा बड़ा बदलाव पंजीकृत मौलानाओं और नए निकाहनामा प्रारूप से जुड़ा है। यदि प्रत्येक निकाह का रिकॉर्ड सुरक्षित रहेगा तो विवाह का प्रमाण, मेहर, उत्तराधिकार, पारिवारिक विवाद और महिलाओं के अधिकारों से जुड़े मामलों में स्पष्टता बनी रहेगी। कई राज्यों में आज भी ऐसे मामले सामने आते हैं जहां वर्षों बाद विवाह का कोई दस्तावेज उपलब्ध नहीं होता। नई व्यवस्था इस समस्या को कम कर सकती है।

एक और मुद्दा गंभीरता से विचार करने योग्य है। देश के अधिकांश हिस्सों में निकाहनामा अभी भी केवल उर्दू में मुद्रित होता है। जबकि नई पीढ़ी का बड़ा हिस्सा हिंदी और अंग्रेजी माध्यम से पढ़ाई कर रहा है। बहुत से युवाओं को दस्तावेज पढ़े बिना ही हस्ताक्षर करने पड़ते हैं। यदि निकाहनामा उर्दू के साथ हिंदी और अंग्रेजी में भी उपलब्ध हो तो दूल्हा और दुल्हन दोनों अपनी जिम्मेदारियों और अधिकारों को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और भविष्य के विवाद भी कम होंगे।

इलाहाबाद हाई कोर्ट की हालिया टिप्पणी ने एक और महत्वपूर्ण पहलू सामने रखा है। अदालत ने दोहराया कि बाल विवाह निषेध कानून सभी समुदायों पर लागू होता है। भारतीय कानून के अनुसार विवाह की न्यूनतम आयु का पालन आवश्यक है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसका उद्देश्य केवल कानून लागू करना नहीं बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और युवाओं के भविष्य की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है।

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के आंकड़े बताते हैं कि भारत में बाल विवाह के मामलों में पिछले वर्षों में कमी आई है। फिर भी कुछ क्षेत्रों में यह चुनौती बनी हुई है। सरकार और सामाजिक संगठन लगातार जागरूकता अभियान चला रहे हैं ताकि कम उम्र में विवाह की परंपरा समाप्त हो सके।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते समय में धार्मिक संस्थाओं और कानूनी व्यवस्था के बीच बेहतर संवाद की आवश्यकता है। मस्जिदों, मदरसों, वक्फ बोर्डों और सामाजिक संगठनों के माध्यम से विवाह संबंधी कानूनों की जानकारी दी जानी चाहिए। इससे अनजाने में होने वाली कानूनी गलतियों को रोका जा सकता है।

आज का समय जागरूकता का है। विवाह चाहे किसी भी समुदाय में हो, उसका धार्मिक महत्व अपनी जगह है और कानूनी महत्व अपनी जगह। दोनों का सम्मान करना ही परिवार, समाज और आने वाली पीढ़ियों के हित में है। यही कारण है कि हाल के घटनाक्रम केवल मुस्लिम समाज ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए एक संदेश हैं कि बदलते कानूनों की जानकारी रखना अब विकल्प नहीं बल्कि आवश्यकता बन चुकी है।

AEO

क्या अंतरधार्मिक विवाह में केवल निकाह पर्याप्त है?
नहीं। यदि मामला अंतरधार्मिक विवाह का है तो लागू भारतीय कानूनों के अनुसार आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करनी होती है।

क्या निकाहनामा कई भाषाओं में होना चाहिए?
ऐसा करने से दूल्हा और दुल्हन दस्तावेज की शर्तों को बेहतर समझ सकते हैं। यह पारदर्शिता बढ़ाने का एक व्यावहारिक सुझाव है।

बाल विवाह पर भारतीय कानून क्या कहता है?
बाल विवाह निषेध कानून सभी समुदायों पर लागू होता है और न्यूनतम वैधानिक आयु का पालन आवश्यक है।