मलिक असगर हाशमी/ नई दिल्ली
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की राजनीतिक छवि को लेकर देश में कई तरह की बातें होती हैं। राजनीति से दूर गोरखपुर का गोरखनाथ मंदिर सांप्रदायिक सौहार्द की एक ऐसी अनूठी मिसाल पेश करता है जिसे देखकर लोग हैरान रह जाते हैं। इस ऐतिहासिक मठ और मंदिर के प्रबंधन, वित्तीय खातों और निर्माण कार्यों की कमान दशकों से मुस्लिम समाज के हाथों में सुरक्षित है। मंदिर के भीतर का माहौल पूरी तरह से आपसी भरोसे और गंगा-जमुनी तहजीब से महकता है।

गोरखनाथ मंदिर के विकास और निर्माण कार्यों की सबसे मजबूत कड़ी यासीन अंसारी हैं। करीब सत्तर साल के हो चुके यासीन अंसारी पिछले पचास वर्षों से इस मंदिर की सेवा में समर्पित हैं। साल 1977 से 1983 तक उन्होंने मंदिर के आधिकारिक कैशियर यानी खजांची के रूप में काम किया था।
वर्तमान में मंदिर परिसर के भीतर होने वाले हर छोटे-बड़े निर्माण और विकास कार्यों की निगरानी उन्हीं के जिम्मे है। वे निर्माण से जुड़े खातों, रोज के खर्चों और बड़ी परियोजनाओं के बजट का पूरा हिसाब-किताब रखते हैं।
उनकी आधी सदी की इस लंबी सेवा में आज तक वित्तीय हेराफेरी या गड़बड़ी का एक भी मामला सामने नहीं आया है। मुख्यमंत्री और मंदिर के मुख्य पुजारी योगी आदित्यनाथ जब भी गोरखपुर आते हैं तो विकास कार्यों की समीक्षा हमेशा यासीन अंसारी के साथ बैठकर ही करते हैं।
यासीन अंसारी बताते हैं कि छोटे महाराज यानी योगी आदित्यनाथ के साथ उनका रिश्ता बेहद आत्मीय है। जब भी योगी आदित्यनाथ मंदिर में होते हैं तो वे यासीन को अपने पास बुलाते हैं। वे काम की सारी जानकारी लेते हैं।
यासीन बताते हैं कि वे योगी जी के निजी आवास में रसोई से लेकर उनके बेडरूम तक बिना किसी रोक-टोक के आ-जा सकते हैं। उन्होंने कई बार महाराज के साथ बैठकर भोजन भी किया है। योगी आदित्यनाथ उनके पारिवारिक समारोहों, शादियों और त्योहारों में भी शामिल होते हैं। वे वहाँ एक-दो घंटे का समय बिताते हैं और परिवार का हालचाल लेते हैं।
पीढ़ियों से सेवा में जुटे मुस्लिम परिवार
शाही मुमताज और यासीन अंसारी का परिवार अकेला नहीं है जो इस मठ से जुड़ा है। कई मुस्लिम परिवार पीढ़ियों से गोरखनाथ मंदिर की सेवा कर रहे हैं। यासीन अंसारी के परिवार की तीन पीढ़ियाँ इस मंदिर से जुड़ी रही हैं।
उनके पिता के बड़े भाई सबसे पहले महंत दिग्विजयनाथ के समय इस मंदिर में आए थे। उन्हें मंदिर की रसोई की जिम्मेदारी मिली थी। इसके बाद यासीन की सास हमीदा बेगम ने लंबे समय तक कम्युनिटी किचन के सुपरवाइजर के रूप में काम किया। उनके ससुर मंदिर के बगीचे में माली का काम देखते थे।
मंदिर की गौशाला की जिम्मेदारी भी एक मुस्लिम युवक के पास है। तीस साल के मान मोहम्मद महज दस साल की उम्र से इस गौशाला की सेवा कर रहे हैं। मंदिर में इस समय लगभग चार सौ गायें हैं जिनकी पूरी देखभाल मान मोहम्मद ही करते हैं। मान मोहम्मद बताते हैं कि उनसे पहले उनके पिता इस गौशाला में गायों की सेवा करते थे।
मान मोहम्मद रोज सुबह तीन बजे उठ जाते हैं। वे गायों का दूध निकालते हैं और उन्हें चारा खिलाते हैं। योगी आदित्यनाथ की सबसे पसंदीदा गाय नंदिनी की देखभाल भी मान मोहम्मद ही करते हैं। मान मोहम्मद का कहना है कि यह मंदिर उनके घर जैसा है। योगी जी ने उन्हें हमेशा बहुत सम्मान और प्यार दिया है। वे जीवनभर यहीं रहकर सेवा करना चाहते हैं।
इंजीनियर निसार अहमद का अहम योगदान
गोरखनाथ मंदिर की भव्य इमारतों और उसके आधुनिक स्वरूप के पीछे इंजीनियर निसार अहमद की सोच रही है। निसार अहमद मंदिर के पहले आधिकारिक इंजीनियर थे। बाद में वे महाराणा प्रताप पॉलिटेक्निक के प्रिंसिपल पद से रिटायर हुए।
निसार अहमद बताते हैं कि मंदिर परिसर के भीतर स्थित साधना भवन, यात्री निवास, हिंदू सेवाश्रम और मंदिर की दर्जनों दुकानें उन्हीं के डिजाइन पर बनी हैं। इसके अलावा गोरखनाथ अस्पताल की नई बिल्डिंग, संस्कृति विद्यालय, राधा कृष्ण मंदिर, शंकर मंदिर, विष्णु मंदिर और हनुमान मंदिर का निर्माण भी उन्हीं की देखरेख में पूरा हुआ था।

मंदिर परिसर में आजीविका और आपसी भाईचारा
गोरखनाथ मंदिर सिर्फ आस्था का केंद्र नहीं है बल्कि यह कई मुस्लिम परिवारों की आजीविका का सहारा भी है। मंदिर परिसर के भीतर और उसके आसपास मुस्लिम समुदाय के लोग दशकों से बिना किसी डर के अपनी दुकानें चला रहे हैं। पिछले बीस साल से मंदिर के भीतर चूड़ियों की दुकान चलाने वाले मोहम्मद मुताकिम बताते हैं कि मंदिर के अंदर कई मुस्लिम परिवार रहते हैं और सम्मान से कमाते हैं।
अल्ताफ अहमद भी पिछले सोलह वर्षों से यहाँ दुकान चला रहे हैं। उनका कहना है कि गोरखनाथ मंदिर ने उनके परिवार को पालने में मदद की है। जब भी दुकानदारों को कोई समस्या आती है तो योगी जी खुद आगे आकर उसे सुलझाते हैं। मंदिर के आसपास के इलाके मुस्लिम बहुल हैं। बचपन से मंदिर परिसर में खेलने वाले स्थानीय निवासी फैयाज अहमद बताते हैं कि इस पूरे इलाके में हमेशा से सांप्रदायिक सद्भाव रहा है। यहाँ के मुसलमानों को कभी किसी तरह की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ा है।
जमीनी हकीकत और राजनीतिक छवि का अंतर
बाहरी दुनिया में योगी आदित्यनाथ की छवि चाहे जैसी भी पेश की जाती हो लेकिन मंदिर के मुस्लिम कर्मचारी उन्हें एक बेहद उदार और न्यायप्रिय इंसान मानते हैं। बीजेपी के अल्पसंख्यक विंग के स्थानीय नेता इरफान अहमद भी इस बात की पुष्टि करते हैं। इरफान के पिता इनायतुल्लाह उस समय मंदिर के स्वयंसेवक थे जब महंत दिग्विजयनाथ और महंत अवैद्यनाथ यहाँ के पुजारी हुआ करते थे।
इरफान बताते हैं कि व्यक्तिगत संबंधों के मामले में योगी जी जाति या धर्म की परवाह किए बिना हर जरूरतमंद की मदद के लिए खड़े रहते हैं। उन्होंने कभी भी धार्मिक आधार पर किसी के साथ भेदभाव नहीं किया है।
यासीन अंसारी भी कहते हैं कि योगी आदित्यनाथ सिर्फ उन लोगों का विरोध करते हैं जो देश के खिलाफ गतिविधियों में शामिल होते हैं। जो लोग ईमानदारी से रहते हैं उनका वे हमेशा सम्मान करते हैं। राजनीति में लोग उनके बारे में क्या कहते हैं उससे मंदिर के माहौल पर कोई असर नहीं पड़ता है।
गोरखनाथ मंदिर की यह ग्राउंड रिपोर्ट साफ करती है कि सोशल मीडिया और राजनीतिक बहसों से दूर जमीन पर सच कुछ और है। यहाँ का हर कोना आपसी विश्वास, सम्मान और धर्मनिरपेक्षता की कहानी कहता है। यह स्थान आज के दौर में पूरे देश के लिए गंगा-जमुनी तहजीब की सबसे बड़ी और जीवंत मिसाल है।