हरजिंदर
नफरत की राजनीति भले ही चुनाव में हार जाए लेकिन नफरत को हराना बहुत आसान नहीं होता। यह जरूर है कि लोग अगर लगे रहें तो रास्ते भी निकलते हैं।इसे समझना हो तो हमें जापान के शहर कनागावा प्रीफैक्चर के कस्बे फूजीसावा में जाना होगा। इस छोटे से कस्बे में ज्यादातर आबादी मूल जापानी लोगों की है। समय के साथ वहां कुछ मुस्लिम भी बस गए हैं। उनकी आबादी 800 से ज्यादा नहीं होगी। ज्यादातर लोग श्रीलंका के हैं और कुछ सीरिया वगैरह देशों के हैं।
इतनी आबादी है तो लोगों को लगता है कि उनके लिए एक मस्जिद भी होनी चाहिए। अभी तक वे यहां एक बंद हो चुकी फैक्ट्री की छत पर नमाज के लिए जाते हैं। उन सबने मिलकर पैसा जमा किया और इसी फैक्ट्री जमीन का एक हिस्सा मस्जिद बनाने के लिए खरीद लिया।
तमाम औपचारिकताएं भी पूरी कर ली गई। सरकार की इजाजत भी मिल गई और नक्शा भी पास हो गया। ये सारे काम जापान में बहुत आसान नहीं थे, लेकिन इसके साथ ही कुछ लोगों ने विरोध भी शुरू कर दिया।
यह कहा जाने लगा कि मस्जिद बनी तो उसकी मीनारे इस इलाके का चरित्र बदल देंगी। फूजीसावा मस्जिद के खिलाफ लोगों के दस्तखत कराने का एक अभियान भी शुरू हो गया। फिर उसी तरह के अफवाहें फैलाने का
काम भी चल पड़ा जिसे हम इस्लामफोबिया कहते हैं। तरह-तरह के तर्क दिए जाने लगे।बात यहीं तक नहीं रही। चुनाव हुए तो उसमें भी इसे मुद्दा बना दिया गया। यह काम किया एक यू-ट्यूबर सूसुमू किकूटेक ने।
🚨 Japan’s safety has hit a shocking new low!
— 渉さん🇯🇵 (@rakuoku3) July 19, 2026
Violent brawl caught on camera at Yanagibashi Park near Warabi Station West Exit in Saitama Prefecture.
Multiple men who appear to be Vietnamese are fighting — one in a white T-shirt is clearly swinging what looks like a knife or… pic.twitter.com/VDrKynCqHq
कनागावा की सीट नंबर- 12 के लिए जब उन्होंने चुनाव का पर्चा भरा तो इसी को अपना मुुख्य मुद्दा बना दिया। उनके पोस्टर में सिर्फ उनकी फोटो होती थी और साथ में लिखा होता था- हमें मस्जिद नहीं चाहिए।
मस्जिद कमेटी के सदस्य अली अल-हकीम ने जापान टाईम्स को बताया कि अपने भाषणों में वे अर्थव्यवस्था, शिक्षा व्यवस्था और पेंशन जैसे उन मसलों पर कोई बात नहीं कर रहे थे जो इस समय जापान के लोगों की चिंता का विषय बने हुए हैं। उनका सिर्फ एक मुद्दा था फूजीसावा मस्जिद।
In Miyagi Prefecture, Japan, Bangladeshi immigrant Sayed Abdul Fattah, a representative of the local Muslim community, demanded a separate cemetery for Muslims so they could bury their dead according to Islamic tradition.
— Alpha Wolf 🐺 (@Crazyunfill94) July 18, 2026
The governor was ready to support the plan just to… pic.twitter.com/j5HfksK20d
जापान के अमन पसंद लोगों को शायद यह बात अच्छी नहीं लगी और चुनाव में किकूटेक को सिर्फ नौ फीसदी वोट ही मिले। जाहिर है कि न सिर्फ हारे बल्कि काफी पीछे भी रहे।मगर स्थानीय मुसलमान यह भी समझ रहे थे कि इस हार का मतलब यह भी नहीं है कि जो नफरत पिछले कुछ समय में यहां घोली गई वह पूरी तरह खत्म हो चुकी है। लेकिन उन्हें यह भी लगा कि मस्जिद के लिए नए सिरे से कोशिश करने का समय आ गया है।
इस बार स्थानीय बौद्ध संगठनों और अन्य धार्मिक समुदायों के लोगों से बात की जा रही है। यह माना जा रहा है कि स्थानीय आबादी को भरोसे में लेकर ही अगर यह काम शुरू किया जाए तो ही बेहतर होगा।फूजीसावा कस्बे के लिए यह पहली मस्जिद होगी लेकिन ऐसा नहीं है कि जापान के लिए इसमें कोई नई बात है।
जापान में इस समय 167 मस्जिद हैं। इनमें सबसे पहली कोबे मस्जिद 1935 में बनी थी। यानी उसे बने हुए 90 साल से ज्यादा हो चुके हैं। पर तब शायद नफरत को वह माहौल नहीं था जो अब है। हैरत की बात यह है कि शांति पसंद जापानी भी इससे नहीं बच सके हैं।
( लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)
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