युद्ध की घमासान में हज

Story by  हरजिंदर साहनी | Published by  [email protected] | Date 09-03-2026
Hajj in the heat of war
Hajj in the heat of war

 

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यह बात 1914 की है। पहला विश्वयुद्ध जब शुरू हुआ तो हर तरफ से सेनाओं के हमले, बमों के धमाके और लोगों के मारे जाने की खबरें आने लगीं। ऐसे में हमेशा ही आम लोगों की तकलीफें भुला दी जाती हैं। इसलिए बहुत दिन तक पता ही नहीं चल पाया कि मलेशिया के सैकड़ों लोेग जो अपने घरों से हज के लिए सउदी अरब गए थे वहां फंस गए हैं।

उस समय तक हवाई यात्राएं नहीं हुआ करती थीं। लोग ऐसी यात्रा समुद्री जहाजों से ही करते थे। समुद्री यात्राएं सुरक्षित नहीं रह गईं थी इसलिए यात्री जहाजों का काम करने वाली कंपनियों ने अपने जहाजों को सुरक्षित जगह खड़ा कर दिया। समुद्र के रास्ते आना जाना किसी के लिए मुमकिन नहीं रह गया था। चारों तरफ से समुद्र से घिरे मलेशिया के लोगों के लिए यह मुमकिन नहीं था कि वे जमीनी रास्ते से अपने मुल्क तक पहंुच सकें। युद्ध के समय किसी भी देश के लोगों के लिए यह भारी जोखिम वाला काम था।

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हज पर गए लोगों के पास सीमित ही पैसा था। गुजारा मुश्किल हो गया। कुछ को तो जान तक गंवानी पड़ी।इस बार जब पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू हुआ है तो सौ साल से ज्यादा पुरानी वह घटना इसलिए याद आ गई क्योंकि इस समय इंडोनेशिया के 58,860 नागरिक सउदी अरब में फंसे हुए हैं। वे सब हज के लिए वहां गए थेI

हवाई यात्राएं आमतौर पर बंद हैं। यह भी एक संयोग है कि इंडोनेशिया मलेशिया का समुद्री पड़ोसी है।बेशक दुनिया 1914 से काफी आगे बढ़ चुकी है। अब खबरें भी समय पर मिल जाती हैं और इस तरह से फंसे हुए लोगों को उनकी किस्मत के भरोसे नहीं छोड़ा जाता। इसलिए उन्हें वहां से निकालने के प्रयास भी जारी हैं। जल्द ही उनके अपने मुल्क पहंुच जाने की उम्मीद  भी बन गई है।

फ्लाई-दुबई के अनुसार इस साल हज का मुख्य सीजन 18 अप्रैल से शुरू होगा जो 21 मई तक चलेगा। एयरलाईंस इस समय के लिए खास तैयारियां करती हैं जो महीनों पहले से ही शुरू हो जाती हैं। जाहिर है कि इस साल भी ये तैयारियां हुई होंगी। लेकिन अगर उड़ानें बंद हैं तो समस्या आने ही वाली है।

ऐसी ही तैयारियां ट्रैवल कंपनियां भी करती हैं। ट्रैवल एंड टूर वल्र्ड के अनुसार ये तैयारियां शुरू भी हो गई हैं। इस साल हज सीजन में 2.21 लाख लोगों के हज करने का अनुमान है। लेकिन अगर युद्ध थोड़ा सा भी लंबा खिंच गया तो इन कंपनियों को अपनी तैयारियों में बदलाव करना पड़ सकता है और ये अनुमान भी बदल सकते हैं।

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दूसरी तरफ इसका फायदा उठाने की शुरूआत भी हो चुकी है। द हिंदू की एक खबर के अनुसार बंगलुरु से जेद्दाह की फ्लाइट का टिकट जो आमतौर पर 16 से 25 हजार रुपयों में मिल जाता था, अब उसकी कीमत दो लाख रुपये से ऊपर हो चुकी है। एक ट्रैवल एजेंट ने अखबार को यह भी बताया कि हज के लिए एक औसत भारतीय का खर्च 75 हजार से डेढ़ लाख डेढ़ लाख तक होता है।

लेकिन अब तो एकतरफा टिकट ही दो लाख रुपये का हो गया है।इस बीच सउदी अरब ने हज यात्रा के लिए रजिस्ट्रेश्न शुरू कर दिए हैं। लेकिन अभी ये रजिस्ट्रेशन सिर्फ सउदी नागरिकों के ही हो रहे हैं। बाकी के लिए रजिस्ट्रेशन कब होंगे, अभी यह नहीं कहा जा सकता। 

( लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)

 

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