नई दिल्ली।
गाय का दूध पोषक तत्वों से भरपूर माना जाता है और वयस्कों के लिए यह एक महत्वपूर्ण आहार है। लेकिन जब बात एक वर्ष से कम उम्र के शिशुओं की आती है, तो विशेषज्ञ इसे उपयुक्त नहीं मानते। बाल रोग विशेषज्ञों के अनुसार, 12 महीने से कम उम्र के बच्चों को गाय का दूध नहीं देना चाहिए, क्योंकि इससे कई स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि शिशुओं की पोषण संबंधी आवश्यकताएं वयस्कों से बिल्कुल अलग होती हैं। जीवन के पहले वर्ष में बच्चों का शरीर, मस्तिष्क और प्रतिरक्षा प्रणाली तेजी से विकसित हो रही होती है। ऐसे में उन्हें ऐसे पोषण की आवश्यकता होती है, जो उनकी वृद्धि और विकास के लिए विशेष रूप से तैयार किया गया हो। यही कारण है कि जन्म से छह महीने तक केवल मां का दूध और उसके बाद पूरक आहार के साथ स्तनपान की सलाह दी जाती है।
अमेरिका के रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (CDC) सहित कई स्वास्थ्य संस्थाएं सलाह देती हैं कि एक वर्ष से पहले बच्चों को गाय का दूध नहीं पिलाना चाहिए। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि गाय का दूध शिशुओं की आवश्यक पोषण जरूरतों को पूरा नहीं कर पाता।
गाय के दूध में प्रोटीन और कुछ खनिजों की मात्रा अधिक होती है, लेकिन इसमें आयरन, विटामिन ई और स्वस्थ वसा जैसे महत्वपूर्ण पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में नहीं होते। ये पोषक तत्व शिशु के मस्तिष्क विकास, प्रतिरक्षा प्रणाली और शारीरिक वृद्धि के लिए बेहद आवश्यक हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, गाय का दूध शिशुओं में आयरन की कमी से होने वाले एनीमिया का कारण बन सकता है। हालांकि गाय के दूध में थोड़ी मात्रा में आयरन होता है, लेकिन शरीर इसे आसानी से अवशोषित नहीं कर पाता।
इसके अलावा, कुछ मामलों में गाय का दूध शिशु की आंतों में हल्की जलन पैदा कर सकता है, जिससे मल के साथ सूक्ष्म रक्तस्राव हो सकता है। लंबे समय तक ऐसा होने पर बच्चे में आयरन की कमी बढ़ सकती है।
एक वर्ष से कम उम्र के बच्चों के गुर्दे पूरी तरह विकसित नहीं होते। गाय के दूध में प्रोटीन, सोडियम, पोटेशियम और फॉस्फोरस की मात्रा अधिक होती है। इन तत्वों को संसाधित करने के लिए शिशु के अपरिपक्व गुर्दों को अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है।
इससे शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन का खतरा बढ़ सकता है, विशेषकर गर्म मौसम या बीमारी के दौरान।
कुछ शिशुओं में गाय के दूध से एलर्जी भी हो सकती है। इससे त्वचा पर चकत्ते, उल्टी, दस्त, पेट दर्द या सांस लेने में कठिनाई जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इसके अलावा, कई बच्चों का पाचन तंत्र इतनी कम उम्र में गाय के दूध को आसानी से पचा नहीं पाता।
अधिकांश बाल रोग विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि शिशु को एक वर्ष की आयु पूरी होने के बाद ही पाश्चुरीकृत फुल-फैट गाय का दूध देना शुरू करना चाहिए। इस उम्र तक बच्चे का पाचन तंत्र और गुर्दे अधिक विकसित हो जाते हैं तथा वह ठोस आहार भी लेने लगता है।
विशेषज्ञ यह भी चेतावनी देते हैं कि एक वर्ष की आयु के बाद भी बच्चों को अत्यधिक मात्रा में दूध नहीं देना चाहिए, क्योंकि अधिक दूध पीने से आयरन के अवशोषण में बाधा आ सकती है।
इसलिए, शिशु के आहार से संबंधित कोई भी निर्णय लेने से पहले बाल रोग विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लेनी चाहिए।