नई दिल्ली
Airbnb की एक रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, भारत में Gen Z ने साल में एक बार छुट्टी मनाने के पुराने तरीके को छोड़कर बार-बार वीकेंड ट्रिप और छोटी छुट्टियों पर जाना शुरू कर दिया है। 87% लोग ऐसी ट्रिप पसंद करते हैं जो एक हफ़्ते से कम समय की हों। अप्रैल 2026 में भारत के 11 शहरों में 18-29 साल के 2,012 Gen Z लोगों के सर्वे पर आधारित इस रिपोर्ट के मुताबिक, वीकेंड ट्रिप सबसे ज़्यादा पसंद की जाती हैं, इसके बाद 3 से 5 दिन की छुट्टियां आती हैं। लंबी छुट्टियां बहुत कम लोग लेते हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है, "70% लोग साल में एक लंबी छुट्टी के बजाय 3 छोटी ट्रिप पसंद करते हैं।" इस पीढ़ी के लिए यात्रा कोई पहले से तय किया गया कार्यक्रम नहीं, बल्कि तनाव, खाली वीकेंड या किसी दोस्त के 'चलो चलते हैं' कहने पर अचानक लिया गया फ़ैसला होती है। डेटा से पता चला है कि 66% लोग यात्रा से महीनों पहले नहीं, बल्कि कुछ दिनों या हफ़्तों पहले ही अपनी ट्रिप बुक करते हैं, और 67% का कहना है कि उनकी कोई भी दो ट्रिप एक जैसी नहीं रही हैं।
सर्वे में पाया गया कि Gen Z के लिए यात्रा अपनी पहचान ज़ाहिर करने का एक ज़रिया बन गई है। रिपोर्ट में कहा गया है, "87% लोग मानते हैं कि उनके यात्रा करने का तरीका यह दिखाता है कि वे असल में कैसे इंसान हैं, और 92% का कहना है कि उनके लिए यह मायने रखता है कि उनकी डेस्टिनेशन या रहने की जगह उनकी अपनी पसंद के हिसाब से हो, न कि सिर्फ़ इसलिए चुनी जाए क्योंकि वह कोई लोकप्रिय जगह है।"
यह सोच उनके फ़ैसलों पर असर डालती है; 80% लोगों का कहना है कि ट्रिप के दौरान मशहूर जगहों को देखने से ज़्यादा उनके लिए छोटे-छोटे पल मायने रखते हैं। जब वे किसी जगह पहुँचते हैं, तो उनके किसी मशहूर लैंडमार्क के बजाय स्थानीय बाज़ार या आस-पास की किराने की दुकान पर मिलने की संभावना ज़्यादा होती है। रिपोर्ट Gen Z को "एंटी-इटिनररी" (बिना तय कार्यक्रम वाली) पीढ़ी कहती है। इसमें कहा गया है, "Gen Z किसी प्लान को पूरा करने के लिए यात्रा नहीं करती। इस पीढ़ी के लिए, अक्सर बिना किसी प्लान के घूमना ही असल प्लान होता है।"
95% लोगों ने कहा कि उनके लिए यह मायने रखता है कि उनकी ट्रिप आम या पहले से तय कार्यक्रम वाली होने के बजाय निजी और अनोखी लगे, और 64% लोग जान-बूझकर अपने शेड्यूल का कुछ हिस्सा बिना प्लान किए छोड़ देते हैं ताकि वे नई चीज़ें एक्सप्लोर कर सकें। सबसे दिलचस्प बात यह है कि 3 में से 2 लोग इस इरादे से यात्रा करते हैं कि वे कुछ नहीं करेंगे -- न कोई दर्शनीय स्थल देखेंगे, न कोई ज़रूरी एक्टिविटी करेंगे, बस आराम करेंगे और सुकून भरे दिन बिताएंगे। लगभग एक-चौथाई लोग हर ट्रिप पर ऐसा ही करते हैं।
Gen Z के लिए, ठहरने की जगह ही असल डेस्टिनेशन बन गई है। 82% लोगों का कहना है कि ट्रिप प्लान करते समय ठहरने की जगह बहुत या बेहद ज़रूरी होती है, और 78% लोग अपनी ट्रिप का कम से कम आधा समय वहीं बिताते हैं। वे होटल की सुविधाओं की लिस्ट नहीं, बल्कि "घर जैसी सुविधाओं की विशलिस्ट" देखते हैं -- जैसे बालकनी या टेरेस, लोकल सड़कों और बाज़ारों के पास होना, सबके लिए काफ़ी जगह, और साथ समय बिताने के लिए एक कॉमन लिविंग एरिया।