24 घंटे तक भोजन न करने पर शरीर में क्या होता है? जानिए उपवास के फायदे और जोखिम

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 03-07-2026
What happens to the body when you don't eat for 24 hours? Learn about the benefits and risks of fasting.
What happens to the body when you don't eat for 24 hours? Learn about the benefits and risks of fasting.

 

नई दिल्ली

आजकल 24 घंटे का उपवास या इंटरमिटेंट फास्टिंग एक लोकप्रिय स्वास्थ्य ट्रेंड बन चुका है। कई लोग वजन कम करने, शरीर को डिटॉक्स करने और समग्र स्वास्थ्य में सुधार के उद्देश्य से लंबे समय तक उपवास करते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, सीमित अवधि तक भोजन न करने से शरीर में कई महत्वपूर्ण जैविक और चयापचय संबंधी परिवर्तन होते हैं। हालांकि, यह हर व्यक्ति के लिए सुरक्षित नहीं होता और कुछ लोगों के लिए जोखिम भरा भी साबित हो सकता है।

जब कोई व्यक्ति 24 घंटे तक भोजन नहीं करता है, तो शरीर धीरे-धीरे ऊर्जा प्राप्त करने के अपने तरीके को बदलना शुरू कर देता है। सामान्य परिस्थितियों में शरीर भोजन से प्राप्त ग्लूकोज को ऊर्जा के रूप में इस्तेमाल करता है। लेकिन भोजन न मिलने की स्थिति में रक्त में शर्करा का स्तर धीरे-धीरे कम होने लगता है। ऐसे में शरीर सबसे पहले यकृत (लिवर) में संग्रहित ग्लूकोज, जिसे ग्लाइकोजन कहा जाता है, का उपयोग करता है ताकि रक्त शर्करा का स्तर सामान्य बना रहे।

कुछ समय बाद जब ग्लाइकोजन का भंडार कम होने लगता है, तो शरीर ऊर्जा प्राप्त करने के लिए संग्रहित वसा का इस्तेमाल शुरू कर देता है। इस प्रक्रिया के दौरान शरीर में कीटोन नामक पदार्थ बनने लगते हैं, जो मस्तिष्क और अन्य अंगों को ऊर्जा प्रदान करते हैं। इसी दौरान शरीर में ग्लूकागॉन जैसे हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जबकि इंसुलिन का स्तर कम हो जाता है। यह परिवर्तन शरीर को ऊर्जा संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं।

स्वस्थ वयस्कों में ये परिवर्तन सामान्य रूप से नियंत्रित रहते हैं, लेकिन जिन लोगों को लंबे समय तक भूखे रहने की आदत नहीं होती, उन्हें शुरुआती घंटों में कुछ असुविधाओं का सामना करना पड़ सकता है। इनमें भूख लगना, थकान, सिरदर्द, चक्कर आना, चिड़चिड़ापन, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई और हल्की कमजोरी जैसे लक्षण शामिल हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकांश स्वस्थ लोगों में 24 घंटे का उपवास रक्त शर्करा को खतरनाक स्तर तक नहीं गिराता, क्योंकि लिवर लगातार रक्त में ग्लूकोज की आपूर्ति करता रहता है। हालांकि, यह नियम सभी पर लागू नहीं होता। मधुमेह के रोगी, इंसुलिन या रक्त शर्करा कम करने वाली दवाएं लेने वाले लोग, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाएं, बच्चे तथा कमजोर या अधिक उम्र के बुजुर्गों को बिना चिकित्सकीय सलाह के लंबे समय तक उपवास नहीं करना चाहिए। ऐसा करने से हाइपोग्लाइसीमिया, निर्जलीकरण और अन्य स्वास्थ्य जटिलताओं का खतरा बढ़ सकता है।

वर्ष 2023 में नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन (NCBI) में प्रकाशित 'फिजियोलॉजी, फास्टिंग' नामक अध्ययन के अनुसार, नियंत्रित उपवास इंसुलिन संवेदनशीलता को बेहतर बना सकता है, जिससे मेटाबोलिक सिंड्रोम और मधुमेह के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा, यह शरीर की अतिरिक्त चर्बी घटाने, रक्तचाप कम करने और हानिकारक वसा को नियंत्रित करने में भी सहायक हो सकता है।

हालांकि, लंबे समय तक या बार-बार उपवास करने से कुछ जोखिम भी जुड़े हैं। शुरुआती चरणों में सिरदर्द, निर्जलीकरण और कैफीन की कमी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। अत्यधिक लंबे उपवास से कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ सकता है, जिससे मांसपेशियों का क्षय और इंसुलिन प्रतिरोध जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। इसलिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि 24 घंटे या उससे अधिक अवधि का उपवास शुरू करने से पहले चिकित्सकीय परामर्श अवश्य लेना चाहिए।