भीषण गर्मी में लू बन सकती है जानलेवा, जानें कैसे करें बचाव

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 30-06-2026
Heatwaves can be deadly during scorching heat—learn how to protect yourself.
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नई दिल्ली।

देश के कई हिस्सों में पड़ रही भीषण गर्मी और लू ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अत्यधिक गर्मी के दौरान लू या हीट स्ट्रोक गंभीर और जानलेवा साबित हो सकता है। यदि समय पर उपचार नहीं मिले तो यह स्थिति मस्तिष्क, हृदय और गुर्दों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती है।

डॉक्टरों के अनुसार, सामान्य परिस्थितियों में शरीर पसीने के माध्यम से अपने तापमान को नियंत्रित करता है। पसीने के वाष्पीकरण से शरीर ठंडा रहता है। लेकिन जब अत्यधिक गर्मी और उमस के कारण शरीर की तापमान नियंत्रित करने की क्षमता प्रभावित हो जाती है, तब हीट स्ट्रोक की स्थिति उत्पन्न होती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जब शरीर का तापमान 104 डिग्री फारेनहाइट या 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो जाता है और शरीर खुद को ठंडा नहीं कर पाता, तो यह चिकित्सकीय आपात स्थिति बन जाती है।

हीट स्ट्रोक के प्रमुख लक्षण

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार हीट स्ट्रोक के कुछ सामान्य लक्षण हैं:

  • शरीर का तापमान तेजी से बढ़कर 104 डिग्री फारेनहाइट से ऊपर पहुंच जाना।
  • त्वचा का लाल, गर्म और शुष्क हो जाना तथा पसीना बंद हो जाना।
  • तेज सिरदर्द, चक्कर आना और अत्यधिक कमजोरी महसूस होना।
  • मतली या उल्टी होना।
  • सांस और दिल की धड़कन का तेज हो जाना।
  • भ्रम, बेचैनी, प्रलाप, मानसिक स्थिति में बदलाव या बेहोशी।
  • मांसपेशियों में ऐंठन या तेज दर्द होना।

किन लोगों को सबसे अधिक खतरा?

डॉक्टरों का कहना है कि कुछ लोगों में हीट स्ट्रोक का खतरा अधिक होता है।

बच्चे और बुजुर्ग: इनकी शरीर का तापमान नियंत्रित करने की क्षमता अपेक्षाकृत कम होती है।

बाहरी श्रम करने वाले लोग: किसान, दिहाड़ी मजदूर, निर्माण श्रमिक, रिक्शा चालक और ट्रैफिक पुलिसकर्मी जैसे लोग लंबे समय तक धूप में रहने के कारण अधिक जोखिम में रहते हैं।

गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोग: हृदय रोग, उच्च रक्तचाप, मधुमेह और किडनी की बीमारी से ग्रस्त लोगों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

विशेष दवाएं लेने वाले लोग: मूत्रवर्धक, एंटीहिस्टामाइन, एस्पिरिन और बीटा ब्लॉकर जैसी दवाओं का सेवन करने वालों में भी जोखिम बढ़ सकता है।

इसके अलावा मोटापे से ग्रस्त लोगों को भी लू लगने की आशंका अधिक रहती है।

लू लगने पर क्या करें?

विशेषज्ञों के अनुसार यदि किसी व्यक्ति को हीट स्ट्रोक के लक्षण दिखाई दें तो तुरंत प्राथमिक उपचार शुरू करना चाहिए।

  • मरीज को तुरंत ठंडी, छायादार या वातानुकूलित स्थान पर ले जाएं।
  • गीले कपड़े से शरीर को पोंछें और पंखे की हवा दें।
  • सिर, गर्दन और बगल में बर्फ या ठंडी पट्टी रखें।
  • यदि मरीज होश में है और निगल सकता है तो उसे थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पानी या ओआरएस पिलाएं।
  • यदि मरीज बेहोश हो जाए, भ्रमित हो या दौरे पड़ें तो तुरंत अस्पताल ले जाएं।

कैसे करें बचाव?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का सुझाव है कि सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे के बीच अनावश्यक रूप से बाहर निकलने से बचें। पर्याप्त मात्रा में पानी, नींबू पानी, नारियल पानी और ओआरएस का सेवन करें। हल्के रंग के ढीले सूती कपड़े पहनें तथा बाहर निकलते समय टोपी, छाता और धूप के चश्मे का उपयोग करें।

विशेषज्ञ यह भी सलाह देते हैं कि अत्यधिक गर्मी के दौरान चाय, कॉफी और अत्यधिक कैफीन युक्त पेय पदार्थों का सेवन सीमित करें, क्योंकि ये शरीर में पानी की कमी बढ़ा सकते हैं।

डॉक्टरों का कहना है कि थोड़ी सी सावधानी और जागरूकता से हीट स्ट्रोक जैसी गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है।