कायमखानी समाज के युवाओं ने सरकारी नौकरियों में गाड़े झंडे

Story by  अशफाक कायमखानी | Published by  [email protected] | Date 03-07-2026
Youth from the Kayamkhani community have achieved remarkable success in government jobs.
Youth from the Kayamkhani community have achieved remarkable success in government jobs.

 

अशफाक कायमखानी/जयपुर

राजस्थान के कायमखानी मुस्लिम समाज के लिए यह समय बेहद शानदार साबित हो रहा है। शिक्षा और रोजगार के मोर्चे पर इस समुदाय से लगातार सकारात्मक खबरें आ रही हैं। हाल ही में जहां इस बिरादरी के एक जांबाज पूर्व सैनिक को देश के सेना प्रमुख ने राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया, वहीं अब राजस्थान कर्मचारी चयन आयोग की भर्ती परीक्षाओं में भी इस समाज के युवाओं ने सफलता के झंडे गाड़े हैं।

सबसे सुखद बात यह है कि सरकारी नौकरियों में चयनित होने वालों में बेटियों की तादाद भी काफी अच्छी है, जो समाज में आ रहे बड़े बदलाव का संकेत है।

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धनूरी गांव के कैप्टन लियाकत अली खान को 'वेटरन अचीवर्स अवार्ड'

इस सफलता की शुरुआत भारतीय सेना से जुड़ी एक बेहद गौरवशाली खबर से होती है। राजस्थान के झुंझुनूं जिले का धनूरी गांव एक बार फिर पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है। भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने नई दिल्ली के प्रतिष्ठित माणिक शॉ सेंटर में आयोजित एक भव्य समारोह में धनूरी के लाल रिसालदार मेजर ऑनरेरी कैप्टन लियाकत अली खान (रिटायर्ड) को 'वेटरन अचीवर्स अवार्ड' से सम्मानित किया है।

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यह राष्ट्रीय सम्मान मिलने के बाद से ही पूरे राजस्थान और विशेषकर कायमखानी समाज में जश्न का माहौल है। सोशल मीडिया से लेकर जमीनी स्तर तक कैप्टन लियाकत अली को बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है।

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यह पुरस्कार भारतीय सेना की उस गौरवशाली परंपरा का हिस्सा है जो मानती है कि देश की सेवा सिर्फ वर्दी पहनने तक सीमित नहीं होती। सेना अपने उन जांबाज पूर्व सैनिकों और अधिकारियों को इस सम्मान से नवाजती है जो सेवानिवृत्ति के बाद भी समाज सेवा और राष्ट्र निर्माण के कार्यों में सक्रिय रहते हैं। कैप्टन लियाकत अली की इस उपलब्धि ने पूरे शेखावाटी क्षेत्र का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है।

युवाओं में बढ़ा जोश: सेना के बाद सरकारी नौकरियों में चमके नाम

कैप्टन लियाकत अली की इस बड़ी सफलता के बीच युवाओं के लिए रोजगार के मोर्चे से भी राहत की खबरें आई हैं। पिछले महीने ही आर्मी, नेवी और वायु सेना में इस क्षेत्र के युवाओं का अग्निवीर के रूप में चयन हुआ था। इस कामयाबी से युवाओं के बीच देश सेवा का एक नया जोश देखने को मिल रहा था।

इसी बीच राजस्थान कर्मचारी चयन आयोग द्वारा आयोजित चतुर्थ श्रेणी भर्ती परीक्षा के परिणाम घोषित किए गए। इस परीक्षा परिणाम में शेखावाटी जनपद और डीडवाना जिले के सैकड़ों युवाओं ने बाजी मारी है।

इस चयन के बाद से ग्रामीण इलाकों में एक बार फिर सरकारी नौकरियों की तरफ युवाओं का रुझान तेजी से बढ़ने लगा है। सबसे खास बात यह है कि इस सूची में बेटियों ने भी मजबूती से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है।

शिक्षा का बदलता स्तर: डॉक्टर और इंजीनियर बन रहे युवा

शेखावाटी जनपद, डीडवाना, नागौर, सीकर और चुरू जैसे जिलों से अब कायमखानी समाज के युवा सिर्फ पारंपरिक क्षेत्रों तक सीमित नहीं हैं। समाज में शिक्षा के प्रति जागरूकता का स्तर लगातार सुधर रहा है। यही वजह है कि अब इन चारों जिलों से अच्छी खासी तादाद में युवा डॉक्टर और इंजीनियर बन रहे हैं।

इसके अलावा शिक्षा विभाग में शिक्षक के पदों पर, राजस्व विभाग में पटवारी और इसके समकक्ष अन्य सरकारी सेवाओं में भी इस समाज का प्रतिनिधित्व काफी बेहतर हुआ है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि राजस्थान प्रशासनिक सेवा (आरएएस), भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) और न्यायिक सेवाओं में अभी भी इस जनपद का प्रतिनिधित्व बहुत कम है।

समाज के प्रबुद्ध लोगों का कहना है कि युवाओं को अब इस दिशा में गंभीरता से विचार करना होगा और बड़ी परीक्षाओं की तैयारी पर ध्यान केंद्रित करना होगा।

 

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परीक्षा में सफलता पाने वाले होनहार युवाओं की सूची

इस भर्ती परीक्षा में डीडवाना, नागौर, चुरू, सीकर, अजमेर और झुंझुनूं जिलों से कई युवाओं का चयन हुआ है। सफलता पाने वाले कुछ प्रमुख युवाओं के नाम इस प्रकार हैं:

  • डीडवाना जिला:बड़ी छापरी से मकसूद खान (पुत्र नथु खान), धनकोली से अनीस खान (पुत्र खुर्शीद खान), रिजवान खान (पुत्र लतिफ खान) और रहीस खान (पुत्र रजाक खान)। बेरी गांव से तीन युवाओं सद्दाम खान (पुत्र यूनुस खान), इशाक खान (पुत्र शौकत खान) और उस्मान खान (पुत्र अमीन खान) का चयन हुआ है। कुडली से रहीस खान (पुत्र इशाक खान), दाऊदसर से असलम खान (पुत्र रमजान खान), अशफाक खान, शाहीन फिजा, परवेज खान (मावा), नावा से अशफाक खान और यूनुस खान, नुवा से इंसाफ खान (पुत्र बौदु खान) और अरमान खान (छोटी छापरी)।
  • नागौर जिला:कुचेरा से हसीना (पुत्र बाबू खां), मंजूर खान और दिलशाद खान (पुत्र याकूब खां)। इसके अलावा छावटा से अली खान और शुभडण्ड से अरबाज़ खान (पुत्र सलीम खान) ने सफलता पाई है।
  • चूरू जिला:राज. पुलिस से अनवर खान (पुत्र हबीब खां), आसलसर से अकरम खान (पुत्र नवाब खां), हामुसर से आसिफ खान (पुत्र आलम खां) और चूरू से शाहिद खान (पुत्र असरार खान)।
  • झुंझुनूं जिला:हमीर खां का बास से शाहरूख खान (पुत्र शब्बीर खां), सोती से इरफान खान (पुत्र याकूब खां) और भारु से जावेद खान (पुत्र लियाकत खान)।
  • सीकर जिला:भींचरी से खलील खान (पुत्र युसुफ खां) और बेसवा से जाहीद खान (पुत्र हबीब खां)।
  • अजमेर जिला:अलीपुरा से अकरम खान (पुत्र आमीन खां) और पिंचोलियां से सद्दाम खान (पुत्र उस्मान खां)।

 

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 'उन्नीस नहीं, इक्कीस' स्तर की करनी होगी तैयारी

इस पूरी सफलता को देखते हुए यह साफ है कि युवाओं में आगे बढ़ने की ललक पैदा हो रही है। हालांकि, प्रतियोगिता के इस दौर में टिके रहने के लिए केवल सामान्य प्रयासों से काम नहीं चलेगा। युवाओं को सभी तरह की प्रतियोगी परीक्षाओं में बढ़-चढ़कर भाग लेना होगा। इसके साथ ही उन्हें अपनी तैयारी के स्तर को और अधिक मजबूत यानी 'उन्नीस की बजाय इक्कीस' करना होगा।

समाज के बुद्धिजीवियों का मानना है कि अब समय आ गया है जब समुदाय के भीतर शिक्षा और बेहतर करियर के लिए एक मजबूत माहौल तैयार किया जाए। कायमखानी बिरादरी को स्वयं आगे बढ़ते हुए समाज की अन्य पिछड़ी बिरादरियों और समुदायों को भी शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए प्रेरित करना होगा, ताकि पूरा क्षेत्र विकास के पथ पर आगे बढ़ सके।