आवाज द वाॅयस /नई दिल्ली
जामिया मिल्लिया इस्लामिया की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. पूजा पासवान ने इटली के रोम में आयोजित यूरोपियन ग्रुप फॉर पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन यानी EGPA 2026 के 51वें वार्षिक सम्मेलन में भारत और जामिया मिल्लिया इस्लामिया का प्रतिनिधित्व किया। सम्मेलन में उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल गवर्नेंस और नागरिक शिकायत निवारण से जुड़े अपने शोध को अंतरराष्ट्रीय मंच पर रखा।
डॉ. पूजा पासवान जामिया मिल्लिया इस्लामिया के सोशल साइंसेज फैकल्टी के पॉलिटिकल साइंस डिपार्टमेंट में पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन की एसोसिएट प्रोफेसर हैं। वह स्टूडेंट्स वेलफेयर की असिस्टेंट डीन भी हैं।
EGPA 2026 का आयोजन 24 से 27 अगस्त 2026 तक इटली की प्रतिष्ठित सैपिएन्ज़ा यूनिवर्सिटी ऑफ रोम में हुआ। सम्मेलन का आयोजन इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडमिनिस्ट्रेटिव साइंसेज यानी IIAS और सैपिएन्ज़ा यूनिवर्सिटी ऑफ रोम के सहयोग से किया गया था।
इस साल सम्मेलन का मुख्य विषय था, "पब्लिक गवर्नेंस फॉर द कॉमन गुड: ह्यूमन इंटेलीजेंस सर्विंग द ग्लोबल कम्युनिटी"। इसमें दुनिया के अलग अलग देशों से पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन के विशेषज्ञ, शिक्षाविद और प्रशासनिक क्षेत्र से जुड़े लोग पहुंचे।
एआई और लोक प्रशासन पर डॉ. पासवान का शोध
डॉ. पूजा पासवान ने सम्मेलन में Permanent Study Group 1 यानी "ई गवर्नमेंट: एआई फॉर पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन" के तहत अपना रिसर्च पेपर प्रस्तुत किया।उनके शोध का शीर्षक था, "Governing Algorithmic Justice: Reimagining India’s Digital Grievances Redress Systems Through AI and Navya Theory"।
शोध का केंद्र भारत की डिजिटल शिकायत निवारण व्यवस्था है। इसमें यह समझने की कोशिश की गई है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल नागरिकों की शिकायतों के समाधान को अधिक प्रभावी, जवाबदेह और न्यायसंगत बनाने के लिए किस तरह किया जा सकता है।
डिजिटल गवर्नेंस आज प्रशासन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। सरकारी सेवाओं में ऑनलाइन व्यवस्था बढ़ रही है। नागरिक शिकायतें भी तेजी से डिजिटल माध्यम से दर्ज की जा रही हैं। ऐसे में एआई का इस्तेमाल केवल तकनीकी सुविधा तक सीमित नहीं रह जाता। इसके साथ पारदर्शिता, जवाबदेही और न्याय का सवाल भी जुड़ता है।
डॉ. पासवान के शोध में इसी पहलू पर ध्यान दिया गया है। उन्होंने भारतीय न्याय दर्शन की परंपरा के आधार पर डिजिटल प्रशासन को देखने का एक अलग दृष्टिकोण सामने रखा।
शोध में "न्याय" की भारतीय दार्शनिक परंपरा को आधुनिक डिजिटल गवर्नेंस से जोड़ने का प्रयास किया गया है। इसका उद्देश्य यह देखना है कि एआई आधारित शिकायत निवारण व्यवस्था में नागरिक के अधिकार, निष्पक्षता और न्याय को किस तरह केंद्र में रखा जा सकता है।
डिजिटल शिकायत व्यवस्था में एआई की भूमिका
भारत में सरकारी सेवाओं के डिजिटल विस्तार के साथ नागरिक शिकायतों के समाधान की प्रक्रिया भी बदल रही है। कई सेवाएं अब ऑनलाइन उपलब्ध हैं। शिकायत दर्ज करने से लेकर उसके निपटारे तक कई चरण डिजिटल हो चुके हैं।
ऐसी स्थिति में एआई प्रशासन को कई स्तरों पर मदद कर सकता है। बड़ी संख्या में आने वाली शिकायतों को व्यवस्थित करना, उनकी प्राथमिकता तय करना और संबंधित विभाग तक पहुंचाना इसके संभावित इस्तेमाल में शामिल हैं।
लेकिन तकनीक के इस्तेमाल के साथ कुछ सवाल भी सामने आते हैं। अगर किसी नागरिक की शिकायत का फैसला एल्गोरिदम के आधार पर प्रभावित होता है तो उस प्रक्रिया की पारदर्शिता कैसे सुनिश्चित होगी। किसी एआई प्रणाली में पक्षपात की स्थिति पैदा हो तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी। नागरिक को अपने मामले के फैसले पर सवाल उठाने का अधिकार कैसे मिलेगा।
डॉ. पासवान के शोध में इन्हीं सवालों को न्याय आधारित नजरिए से देखने की कोशिश की गई है। इस दृष्टिकोण में तकनीक को अंतिम लक्ष्य नहीं माना गया है। नागरिक हित को प्राथमिकता देने पर जोर है।
अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के साथ चर्चा
EGPA 2026 सम्मेलन ने डॉ. पासवान को पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन और डिजिटल गवर्नेंस के क्षेत्र में काम कर रहे अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों के साथ चर्चा का अवसर दिया।सम्मेलन में इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडमिनिस्ट्रेटिव साइंसेज के अध्यक्ष और राजस्थान सरकार के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, IAS सहित कई प्रमुख विशेषज्ञ शामिल हुए।
यूरोप के विभिन्न विश्वविद्यालयों के वरिष्ठ शिक्षाविदों ने भी सम्मेलन में हिस्सा लिया। कोरियन सोसाइटी फॉर पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन के कार्यकारी निदेशक और अमेरिकन सोसाइटी फॉर पब्लिक Administration के पूर्व अध्यक्ष भी सम्मेलन से जुड़े रहे।
इस दौरान पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की बढ़ती भूमिका पर चर्चा हुई। प्रशासनिक व्यवस्था में एआई के इस्तेमाल के साथ जुड़े अवसरों और चुनौतियों पर भी विचार हुआ।
सैपिएन्ज़ा यूनिवर्सिटी ऑफ रोम की प्रोफेसर नोएमी रॉसी भी इस आयोजन से जुड़ी थीं। वह पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन की एसोसिएट प्रोफेसर हैं। सम्मेलन में पब्लिक गवर्नेंस और प्रशासन के क्षेत्र से जुड़े कई अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ मौजूद रहे।
पोप लियो XIV से निजी मुलाकात
डॉ. पूजा पासवान की रोम यात्रा का एक और महत्वपूर्ण हिस्सा 28 अगस्त 2026 को हुआ। इस दिन उन्होंने वेटिकन सिटी के Aula della Benedizione में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
यह कार्यक्रम इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ एडमिनिस्ट्रेटिव साइंसेज की ओर से आयोजित किया गया था। यह रोम में IIAS और EGPA की बैठकों से जुड़े विशेष अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम का हिस्सा था।
कार्यक्रम के दौरान डॉ. पासवान को पोप लियो XIV से निजी मुलाकात का अवसर मिला। उन्होंने पोप से आशीर्वाद प्राप्त किया।इस मुलाकात के दौरान डॉ. पासवान ने अपनी लिखी पुस्तक की एक प्रति भी पोप लियो XIV को भेंट की। उनके लिए यह यात्रा का खास क्षण रहा।
वेटिकन सिटी में हुई यह मुलाकात उनके अकादमिक दौरे का अलग पहलू रही। एक तरफ रोम में पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन, एआई और डिजिटल गवर्नेंस पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चा हुई। दूसरी तरफ उन्हें पोप लियो XIV से मिलने और अपनी पुस्तक भेंट करने का अवसर मिला।
जामिया की अंतरराष्ट्रीय अकादमिक मौजूदगी
डॉ. पूजा पासवान की EGPA 2026 में भागीदारी जामिया मिल्लिया इस्लामिया के लिए भी महत्वपूर्ण रही। उनके शोध ने भारतीय संदर्भ में एआई और लोक प्रशासन के बीच संबंध को अंतरराष्ट्रीय चर्चा के सामने रखा।
आज सरकारी प्रशासन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। भारत में डिजिटल पब्लिक सर्विस, ई गवर्नेंस और ऑनलाइन शिकायत निवारण व्यवस्था का विस्तार हो रहा है। ऐसे समय में एआई को केवल तकनीकी बदलाव के रूप में देखना पर्याप्त नहीं है।
प्रशासन में इस्तेमाल होने वाली तकनीक का सीधा असर आम नागरिक पर पड़ता है। इसलिए उसके साथ पारदर्शिता, जवाबदेही, समानता और न्याय जैसे सवाल भी जुड़े हैं।डॉ. पासवान के शोध की खासियत यही है कि इसमें एआई आधारित प्रशासन को भारतीय दार्शनिक परंपरा के संदर्भ में समझने का प्रयास किया गया है। "न्याय" की अवधारणा को डिजिटल शिकायत निवारण व्यवस्था से जोड़ना इसी दिशा में एक अकादमिक प्रयास है।
एआई, डिजिटल गवर्नेंस और नागरिक अधिकार
आने वाले समय में एआई लोक प्रशासन का बड़ा हिस्सा बन सकता है। सरकारी विभागों में डेटा विश्लेषण, सेवा वितरण, शिकायतों की पहचान और प्रशासनिक निर्णयों में एआई की भूमिका बढ़ सकती है।
इसके साथ यह सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा कि तकनीक नागरिकों के लिए बाधा न बने। किसी व्यक्ति की शिकायत केवल इसलिए कमजोर न हो जाए क्योंकि वह किसी एल्गोरिदम की प्राथमिकता सूची में पीछे चली गई।
डिजिटल प्रशासन में मानवीय संवेदना और जवाबदेही बनाए रखना भी जरूरी है। तकनीक निर्णय लेने में मदद कर सकती है। लेकिन नागरिक के अधिकार और न्याय की कसौटी उससे ऊपर रहनी चाहिए।
EGPA 2026 में प्रस्तुत डॉ. पूजा पासवान का शोध इसी व्यापक बहस का हिस्सा है। इसमें भारत की डिजिटल शिकायत निवारण व्यवस्था को एआई और न्याय दर्शन के नजरिए से फिर से समझने की कोशिश की गई है।
उनकी भागीदारी ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया को पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन, एआई, ई गवर्नेंस और डिजिटल गवर्नेंस से जुड़े अंतरराष्ट्रीय अकादमिक विमर्श में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने का अवसर दिया।
सवाल और जवाब
डॉ. पूजा पासवान कौन हैं?
डॉ. पूजा पासवान जामिया मिल्लिया इस्लामिया के सोशल साइंसेज फैकल्टी के पॉलिटिकल साइंस डिपार्टमेंट में पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन की एसोसिएट प्रोफेसर हैं। वह स्टूडेंट्स वेलफेयर की असिस्टेंट डीन भी हैं।
EGPA 2026 में डॉ. पूजा पासवान ने क्या प्रस्तुत किया?
उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल शिकायत निवारण, एल्गोरिदमिक न्याय और भारतीय न्याय दर्शन से जुड़े अपने शोध को प्रस्तुत किया।
उनके शोध का मुख्य विषय क्या था?
शोध का मुख्य विषय एआई के माध्यम से भारत की डिजिटल नागरिक शिकायत निवारण व्यवस्था को अधिक न्यायसंगत और जवाबदेह बनाने की संभावनाएं हैं।
EGPA 2026 कहां आयोजित हुआ?
EGPA 2026 का 51वां वार्षिक सम्मेलन इटली के रोम स्थित सैपिएन्ज़ा यूनिवर्सिटी ऑफ रोम में आयोजित हुआ।
डॉ. पूजा पासवान की पोप लियो XIV से मुलाकात कब हुई?
डॉ. पासवान ने 28 अगस्त 2026 को वेटिकन सिटी के Aula della Benedizione में आयोजित कार्यक्रम में पोप लियो XIV से मुलाकात की और उन्हें अपनी पुस्तक की एक प्रति भेंट की।