अंधेरे में फोन चलाने के नुकसान, जानिए विशेषज्ञों की चेतावनी

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 13-06-2026
The downsides of using your phone in the dark: Here’s what the experts warn.
The downsides of using your phone in the dark: Here’s what the experts warn.

 

नई दिल्ली

आज के डिजिटल दौर में सोने से पहले बिस्तर पर लेटकर स्मार्टफोन चलाना करोड़ों लोगों की आदत बन चुका है। सोशल मीडिया स्क्रॉल करना, वीडियो देखना या चैट करना कई लोगों की रात की दिनचर्या का हिस्सा है। लेकिन नेत्र विशेषज्ञों का कहना है कि पूरी तरह अंधेरे कमरे में फोन का इस्तेमाल आंखों और नींद दोनों के लिए नुकसानदायक हो सकता है। हालिया अध्ययनों से यह भी संकेत मिला है कि ऐसा करने से कुछ समय के लिए दृष्टि संबंधी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

क्या है "क्षणिक स्मार्टफोन अंधापन"?

हाल ही में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति घोर अंधेरे में लगभग 15 मिनट तक लगातार तेज रोशनी वाली फोन स्क्रीन को देखता है, तो उसे अस्थायी रूप से देखने में दिक्कत हो सकती है। इस स्थिति को "क्षणिक स्मार्टफोन अंधापन" (Transient Smartphone Blindness) कहा जाता है। हालांकि यह समस्या आमतौर पर कुछ मिनटों में ठीक हो जाती है, लेकिन अचानक धुंधला दिखाई देना या एक आंख से कम दिखाई देना किसी भी व्यक्ति को डरा सकता है।

शोध क्या बताता है?

हिमालयन जर्नल ऑफ ऑप्थैल्मोलॉजी में 2024 में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, यह स्थिति तब पैदा होती है जब एक आंख तेज स्क्रीन की रोशनी के संपर्क में रहती है और दूसरी आंख अंधेरे की अभ्यस्त होती है। ऐसा अक्सर तब होता है जब व्यक्ति करवट लेकर फोन चलाता है और एक आंख तकिए से आंशिक रूप से ढकी रहती है।

इस दौरान स्क्रीन देखने वाली आंख रोशनी के अनुसार खुद को ढाल लेती है, जबकि दूसरी आंख अंधेरे के अनुसार अनुकूलित रहती है। जब अचानक फोन बंद किया जाता है, तो दोनों आंखें अलग-अलग प्रतिक्रिया देती हैं। परिणामस्वरूप कुछ समय के लिए एक आंख से धुंधला दिखाई देना या दृष्टि कमजोर महसूस होना संभव है।

क्या यह स्थायी नुकसान पहुंचाता है?

विशेषज्ञों के अनुसार, अधिकांश मामलों में यह समस्या 10 से 15 मिनट के भीतर अपने आप ठीक हो जाती है। अब तक उपलब्ध अध्ययनों में ऐसा कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं मिला है कि इस कारण आंखों को स्थायी नुकसान होता है। फिर भी डॉक्टर इसे नजरअंदाज न करने और सावधानी बरतने की सलाह देते हैं।

आंखों पर बढ़ता है अतिरिक्त दबाव

अंधेरे कमरे में चमकदार स्क्रीन देखने से आंखों को लगातार समायोजन करना पड़ता है, जिससे उन पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। लंबे समय तक ऐसा करने से आंखों में थकान, जलन, सूखापन और असहजता महसूस हो सकती है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि फोन इस्तेमाल करते समय लोग सामान्य से कम पलकें झपकाते हैं। इससे आंखों की प्राकृतिक नमी कम हो जाती है और ड्राई आई जैसी समस्या बढ़ सकती है। लगातार स्क्रीन देखने से सिरदर्द और आंखों में तनाव भी महसूस हो सकता है।

नीली रोशनी बिगाड़ सकती है नींद

स्मार्टफोन से निकलने वाली ब्लू लाइट (नीली रोशनी) सिर्फ आंखों को ही नहीं बल्कि नींद की गुणवत्ता को भी प्रभावित कर सकती है। यह शरीर में बनने वाले मेलाटोनिन हार्मोन के उत्पादन को कम कर सकती है, जो प्राकृतिक रूप से नींद आने में मदद करता है।

यदि देर रात तक फोन का इस्तेमाल किया जाए, तो सोने में अधिक समय लग सकता है, नींद बार-बार टूट सकती है और अगला दिन थकान भरा महसूस हो सकता है। लंबे समय तक खराब नींद का असर मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य दोनों पर पड़ सकता है।

आंखों की सुरक्षा के लिए अपनाएं ये आसान उपाय

  • पूरी तरह अंधेरे में फोन इस्तेमाल करने से बचें।
  • कमरे में हल्की रोशनी रखें ताकि आंखों पर दबाव कम पड़े।
  • रात के समय स्क्रीन की ब्राइटनेस कम करें या नाइट मोड का उपयोग करें।
  • सोने से कम से कम 30 से 60 मिनट पहले फोन का इस्तेमाल बंद कर दें।
  • स्क्रीन देखते समय बीच-बीच में पलकें झपकाएं और आंखों को आराम दें।

स्मार्टफोन आज हमारी जिंदगी का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, लेकिन उनका संतुलित और समझदारी से उपयोग करना जरूरी है। छोटी-छोटी सावधानियां अपनाकर न केवल आंखों की सेहत बेहतर रखी जा सकती है, बल्कि अच्छी और गहरी नींद भी सुनिश्चित की जा सकती है।