नई दिल्ली:
अक्सर बड़े-बुजुर्ग सलाह देते हैं कि यदि शरीर पर कोई घाव हो तो मीठा कम खाना चाहिए, क्योंकि अधिक चीनी घाव भरने की प्रक्रिया को धीमा कर देती है। सवाल यह है कि क्या यह केवल एक आम धारणा है या इसके पीछे वैज्ञानिक आधार भी मौजूद है? स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इसमें काफी हद तक सच्चाई है। हालांकि घाव देर से भरने का कारण सिर्फ चीनी नहीं होती, लेकिन अत्यधिक चीनी का सेवन और लंबे समय तक बढ़ा हुआ रक्त शर्करा स्तर इस प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।
घाव भरना शरीर की एक जटिल जैविक प्रक्रिया है, जिसमें प्रतिरक्षा प्रणाली, रक्त संचार और पर्याप्त पोषण की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। जब शरीर को चोट लगती है तो नई कोशिकाएं बनती हैं, क्षतिग्रस्त ऊतकों की मरम्मत होती है और संक्रमण से बचाव के लिए प्रतिरक्षा तंत्र सक्रिय हो जाता है। यदि इनमें से किसी भी प्रक्रिया में बाधा आती है तो घाव भरने में अधिक समय लग सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक चीनी का सेवन शरीर में लंबे समय तक रहने वाली सूजन यानी क्रॉनिक इंफ्लेमेशन को बढ़ा सकता है। यह स्थिति ऊतकों की मरम्मत की प्राकृतिक प्रक्रिया को बाधित करती है। परिणामस्वरूप शरीर के लिए क्षतिग्रस्त हिस्से को सामान्य स्थिति में लाना कठिन हो जाता है।
सबसे बड़ा असर तब दिखाई देता है जब लंबे समय तक रक्त में ग्लूकोज का स्तर अधिक बना रहता है, जैसा कि मधुमेह या प्री-डायबिटीज से पीड़ित लोगों में देखा जाता है। लगातार उच्च रक्त शर्करा छोटी-छोटी रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकती है, जिससे घाव वाले हिस्से तक पर्याप्त ऑक्सीजन और पोषक तत्व नहीं पहुंच पाते। यह स्थिति ऊतकों की मरम्मत की गति को धीमा कर देती है।
इसके अलावा, अधिक रक्त शर्करा श्वेत रक्त कोशिकाओं की कार्यक्षमता को भी प्रभावित करती है। यही कोशिकाएं संक्रमण से लड़ने का काम करती हैं। जब इनकी क्षमता कम हो जाती है तो घाव में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है और उपचार की अवधि लंबी हो सकती है। गंभीर मामलों में जटिलताएं भी विकसित हो सकती हैं।
वर्ष 2025 में प्रकाशित बर्न्स एंड ट्रॉमा जर्नल की एक समीक्षा के अनुसार, ग्लूकोज घाव भरने की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण ऊर्जा स्रोत है। शरीर नई कोशिकाओं के निर्माण, प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय रखने और त्वचा की मरम्मत के लिए इसका उपयोग करता है। लेकिन जब ग्लूकोज का चयापचय असंतुलित हो जाता है, विशेषकर मधुमेह में, तब यह ऑक्सीडेटिव तनाव और दीर्घकालिक सूजन को बढ़ाकर घाव भरने की प्रक्रिया को बाधित कर सकता है।
हालांकि यह भी समझना जरूरी है कि सभी प्रकार की चीनी समान नहीं होती। फलों, सब्जियों और डेयरी उत्पादों में मौजूद प्राकृतिक शर्करा के साथ विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट भी मिलते हैं, जो शरीर के लिए लाभकारी होते हैं। इसके विपरीत, कैंडी, मिठाइयों और शीतल पेय में मौजूद अतिरिक्त चीनी का अधिक सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
यदि किसी व्यक्ति को चोट लगी हो, सर्जरी हुई हो या पुराना घाव हो, तो उसके आहार में पर्याप्त प्रोटीन, साबुत अनाज, फल, सब्जियां, विटामिन और खनिज शामिल होने चाहिए। साथ ही पर्याप्त मात्रा में पानी पीना और रक्त शर्करा को संतुलित रखना भी तेजी से घाव भरने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। संतुलित आहार और स्वस्थ जीवनशैली शरीर की प्राकृतिक उपचार क्षमता को मजबूत बनाने में मदद करते हैं।