नई दिल्ली
कई लोगों को भोजन करते समय या खाना खाने के तुरंत बाद पसीना आने की समस्या होती है। अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या यह सामान्य शारीरिक प्रतिक्रिया है या फिर किसी गंभीर बीमारी, खासकर मधुमेह (डायबिटीज) का संकेत हो सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि हर बार ऐसा होना मधुमेह का लक्षण नहीं होता, लेकिन कुछ परिस्थितियों में इसे नजरअंदाज भी नहीं किया जाना चाहिए।
भोजन के दौरान या बाद में आने वाले पसीने को चिकित्सा भाषा में स्वादजन्य पसीना (Gustatory Sweating) कहा जाता है। यह स्थिति पूरी तरह स्वस्थ लोगों में भी देखी जा सकती है, विशेष रूप से जब वे बहुत गर्म, मसालेदार या अधिक मात्रा में भोजन करते हैं। ऐसे मामलों में पसीना आना शरीर की सामान्य प्रतिक्रिया माना जाता है और आमतौर पर चिंता का विषय नहीं होता।
विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ मामलों में खाना खाने के बाद अत्यधिक पसीना आना मधुमेह से जुड़ी जटिलताओं का संकेत हो सकता है। जर्नल ऑफ क्लिनिकल एंड ट्रांसलेशनल एंडोक्रिनोलॉजी में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, मधुमेह से पीड़ित लगभग 11 प्रतिशत मरीजों में भोजन के दौरान या बाद में अत्यधिक पसीना आने की समस्या देखी गई।
विशेष रूप से टाइप-2 मधुमेह के लंबे समय से मरीजों में यह समस्या ऑटोनॉमिक न्यूरोपैथी (स्वायत्त तंत्रिकाओं की क्षति) से जुड़ी हो सकती है। इस स्थिति में चेहरे, सिर, गर्दन या शरीर के ऊपरी हिस्से में अधिक पसीना आने लगता है। 45 वर्ष से अधिक आयु के मरीजों में इसका जोखिम अपेक्षाकृत अधिक पाया गया है।
यदि कोई व्यक्ति इंसुलिन या मधुमेह की कुछ विशेष दवाओं का सेवन कर रहा है, तो रक्त शर्करा का स्तर बहुत कम (हाइपोग्लाइसीमिया) होने पर भी पसीना आ सकता है। इसके साथ चक्कर आना, कमजोरी, घबराहट और हाथ कांपने जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना आवश्यक है।
मधुमेह के अलावा कई अन्य कारण भी इस समस्या के पीछे हो सकते हैं, जैसे—
यदि केवल मसालेदार या गर्म भोजन के बाद हल्का पसीना आता है, तो यह सामान्य माना जा सकता है। लेकिन यदि लगभग हर बार भोजन करने के बाद अत्यधिक पसीना आने लगे, या इसके साथ कमजोरी, चक्कर, बार-बार ब्लड शुगर कम होना या अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।
विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार होने वाला भोजन संबंधी पसीना कभी-कभी मधुमेह, ऑटोनॉमिक न्यूरोपैथी, हाइपोग्लाइसीमिया या हाइपरथायरायडिज्म जैसी समस्याओं का संकेत हो सकता है। इसलिए समय पर जांच और सही उपचार से संभावित जटिलताओं से बचा जा सकता है।