लकुम दीनुकुम वलिया दीन , तुम अपने रास्ते चलो, मैं अपने रास्ते: कुमार विश्वास

Story by  मलिक असगर हाशमी | Published by  [email protected] • 1 Months ago
लकुम दीनुकुम वलिया दी, तुम अपने रास्ते चलो, मैं अपने रास्ते: कुमार विश्वास
मलिक असगर हाशमी / नई दिल्ली

युवा वर्ग में बेहद चर्चित कवि और कवि सम्मेलनों की जान डॉक्टर कुमार विश्वास ने धर्म और मजहब के नाम पर देश-दुनिया में चल रहे विवाद पर गहरी चिंता प्रकट की.

उन्होंने कुरान की आयत ‘लकुम दीनुकुम वलिया दी’ सुनाते हुए कहा कि इसमें झगड़ा किस बात का, तुम अपने रास्ते चलो मैं अपने रास्ते. कुमार विश्वास ने यह बातें जश्न ए रेख्ता के आखिरी दिन ‘महफिल-खाना’ में टॉक शो में यह बातें कहीं. उनसे बात कर रहे थी टीवी एंकर सुमित अवस्थी.
कुमार विश्वास ने टॉक शो में कट्टरवाद पर जमकर प्रहार किया. उन्होंने कहा कि जाहिल दोनों तरफ हैं. उन्होंने अपनी एक गाय को लेकर पान-धतूरे का उदाहरण देते हुए कहा कि पशु तो अच्छा बुरा समझते हैं, पर इंसान नहीं. 
 
उन्हांेने युवाओं को मुखातिब करते हुए कहा कि वाट्अप पर पढ़ाए जाने वाला इतिहास पढ़ना छोड़ दें. उन्होंने कहा कि मैं ब्रह्रमण इसलिए नहीं कि ब्रह्रमण घर में पैदा हुआ. मैं राम को पढ़ता हूं तो वाल्मीकि को भी पढ़ता हूं.
 
उन्होंने कहा कि जो धर्म दूसरे धर्म को बाधा पहुंचाए वह धर्म नहीं अधर्म है. इसके साथ उन्होंने कुरान की आयत पढ़कर सुनाई और उसका अर्थ भी समझाया.
 
उन्होंने समाज में कट्टरवाद फैलाने वालों पर हमला बोलते हुए कहा कि उन्होंने दिमागों को हैंग कर रखा है. मगर रेख्ता जैसे आयोजन ऐसे वायर से लड़ने की शक्ति देते हैं. कुमार विश्वास ने कहा कि मैं वोट चाहे जिसे दूं, पर अपने दिमाग में ऐसे वायरस घुसने नहीं देता. उनके साथ ऐसी कई कोशिशें हो चुकी हैं.
 
उन्हांेने उर्दू के नाम पर लड़ने वालों पर कटाक्ष करते हुए कहा,‘‘गालिब सिर्फ तुम्हारे चचा हैं, हमारे नहीं हैं.’’ उन्हांेने आगरा के बनारसी दास जैन पर लिखी गई पुस्तक -ऑटोबाइओग्राफी ऑफ बनारसी दास जैस’ के हवाले से शहंशा अकबर का उदाहरण देते हुए कहा कि उनके जनाजे में मौलवियों सहित कुल 32 लोग थे.
 
इसलिए सत्ता में रहने वालों को अहंकार नहीं करना चाहिए. साथ ही रेख्ता में मौजूद लोगों से आह्वान किया कि यदि शेर सुनने वाले कबीले में बंट गए तो न शेर बचेगा, न शायर बचेगा और न समाज बचेगा.
 
उन्होंने  राहुल गांधी की पदयात्रा के दौरान सावरकर विवाद की भी आलोचना की. कहा कि नेहरू, गांधी, सावरकर को गाली मत दो. उन्हांेने जो किया उसपर मिट्टी डालो.
 
आप देश जोड़ने निकले हो,देश जोड़ो. कुमार विश्वास ने बातचीत में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री, गृह मंत्री और प्रियंका गांधी से अपनी दोस्ती की बात भी बताई. साथ ही उदाहरण देकर यह भी कहा कि यदि वे गलती करते हैं तो मैं उनके खिलाफ बोलने से नहीं चूकता.
उन्होंने   कहा कि अपनी इसी खासियत की वजह से वह आम आदमी पार्टी से अलग हुए.उर्दू की गंगा-जमुनी तहजीब का जिक्र करते हुए कुमार विश्वास ने कहा कि मौजूदा दौर में बसंत पंचमी पर सर्वाधिक कविताएं जिसने लिखी हैं उसका नाम जुबैर अली ताबिश है. उन्होंने कहा कि दुनिया का सबसे खूबसूरत मुल्क हिंदुस्तान है.
 
उन्होंने उर्दू मुशायरा और कवि सम्मेलन में भेद को उदाहरण देकर समझाया कि दिल्ली के एक आईपीएस शायर शुजाउद्दीन हापुड़ के एक दर्जी से अपनी शेर-ओ-शायरी की गलतियां सुधरवाने जाते थे. जबकि हिसार के एक कवि सम्मेलन में गोपाली दास नीरज जैसे महान कवि के सामने एक नवसिखिया कवि ने अपनी पहली कविता सुनाई थी-कविता कैसे पढ़ें.
 
उन्होंने   कहा कि शेर पढ़ने के बाद जब महफिल में सन्नाटा छा जाए, वही असली शायरी है.कुमार विश्वास ने उन्हें राष्ट्रीय पुरस्कार नहीं मिलने और दरबारी कवियों को लेकर भी प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से हमले किए.