नई दिल्ली
रमज़ान का पवित्र महीना आने ही वाला है। दुनिया भर के मुसलमान इस दौरान रोज़ा रखने, आत्म-शुद्धि और आध्यात्मिक विकास की तैयारी कर रहे हैं। मगर आधुनिक विज्ञान ने भी साबित किया है कि रोज़ा शरीर और मन दोनों पर अद्भुत असर डालता है।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डायबिटीज एंड डाइजेस्टिव एंड किडनी डिजीज के एक अध्ययन के अनुसार, रमज़ान में उपवास करने से शरीर के चयापचय में बदलाव आते हैं। यह हृदय और समग्र स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी होता है।
वजन घटाने और वसा नियंत्रण
रोज़ा रखने से सेहरी और इफ्तार के समय का नियमित चक्र शरीर में प्राकृतिक कैलोरी नियंत्रण बनाता है। हार्वर्ड टी.एच. चान स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ के शोध में बताया गया है कि उपवास से पाचन तंत्र को लंबा आराम मिलता है। शरीर अपने संग्रहित पोषक तत्वों का कुशलतापूर्वक उपयोग करता है। इससे बिना किसी सख्त डाइट के वजन कम करना आसान होता है।
मधुमेह और हृदय स्वास्थ्य
उपवास इंसुलिन संवेदनशीलता बढ़ाता है। इसका असर रक्त शर्करा पर पड़ता है और टाइप-2 डायबिटीज का खतरा घटता है। साथ ही, हानिकारक कोलेस्ट्रॉल कम और लाभकारी कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है। रक्तचाप नियंत्रित रहता है, जिससे हृदय लंबे समय तक स्वस्थ रहता है।
मस्तिष्क और स्मृति के लिए फायदेमंद
रोज़ा मस्तिष्क की कार्यक्षमता भी बढ़ाता है। उपवास के दौरान 'ब्रेन-डिराइव्ड न्यूरोट्रॉफिक फैक्टर' (BDNF) नामक प्रोटीन बढ़ता है, जो मस्तिष्क कोशिकाओं को सक्रिय रखता है। इससे स्मृति और सीखने की क्षमता में सुधार होता है।
मानसिक शांति और आत्म-संयम
रमज़ान धैर्य और आत्म-नियंत्रण का महीना है। लंबे समय तक रोज़ा रखने से मानसिक स्पष्टता बढ़ती है। यह भावनात्मक संतुलन बनाए रखने और मानसिक शांति प्राप्त करने का अवसर देता है।इस तरह, रमज़ान केवल धार्मिक कर्तव्य ही नहीं, बल्कि शरीर और मन के लिए स्वास्थ्यवर्धक भी है।