Maulana Azad National Urdu University के इस्लामिक स्टडीज विभाग की ओर से 17 फरवरी 2026 को पांचवां डॉ. मोहम्मद हमीदुल्लाह यादगारी व्याख्यान आयोजित किया गया। कार्यक्रम विश्वविद्यालय के एस ए एंड एस एस परिसर के कमेटी रूम में हुआ। विषय था भारतीय सूफी संतों की सेवाएं, सहिष्णुता और सामाजिक सौहार्द।

विभागाध्यक्ष प्रोफेसर मोहम्मद हबीब ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने डॉ. हमीदुल्लाह की विद्वतापूर्ण सेवाओं को याद किया। उन्होंने कहा कि भारतीय सूफी संतों ने सेवा, नैतिकता और आपसी सम्मान के जरिए समाज को जोड़ा। उनका संदेश आज भी राष्ट्रीय एकता के लिए जरूरी है।
मुख्य अतिथि प्रोफेसर सैयद अलीम अशरफ जैसी ने कहा कि सूफियों ने तौहीद के बाद सबसे ज्यादा जोर आपसी सहिष्णुता पर दिया। उनके अनुसार सूफी परंपरा का केंद्र प्रेम और इंसानियत है। उन्होंने बताया कि सूफियों ने लोगों से जुड़ने के लिए स्थानीय भाषाएं सीखी।
उन्होंने Moinuddin Chishti और Nizamuddin Auliya का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इन संतों की खानकाहें सेवा और सद्भाव के केंद्र थीं। वहां हर धर्म और हर वर्ग के लोगों का सम्मान होता था।कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रोफेसर मोहम्मद महमूद सिद्दीकी ने की। उन्होंने कहा कि न्याय के बिना स्थायी शांति संभव नहीं है। समाज में इंसाफ होगा तभी सच्चा सौहार्द बनेगा। उन्होंने सूफी शिक्षाओं को बराबरी और शांति का मजबूत आधार बताया।

अंत में कार्यक्रम समन्वयक डॉ. आतिफ इमरान ने धन्यवाद ज्ञापित किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन सोच को दिशा देते हैं और समाज को जोड़ते हैं।कार्यक्रम की शुरुआत शोधार्थी मोहम्मद सलमान दानिश की कुरान पाठ से हुई। संचालन डॉ. मुफ्ती मोहम्मद सिराजुद्दीन ने किया।यह व्याख्यान विचार और समझ दोनों स्तर पर सफल रहा। सूफी संतों के प्रेम और सहिष्णुता के संदेश को नए संदर्भ में सामने रखा गया।





