महरूफ और मसरूर खान: एक जैसा सपना, एक जैसी सफलता, ओडिशा के जुड़वा भाइयों ने रचा इतिहास

Story by  ओनिका माहेश्वरी | Published by  onikamaheshwari | Date 19-02-2026
"Maharuf and Masroor Ahmed Khan: Twin brothers achieve similar success in JEE Main 2026"

 

ओनिका माहेश्वरी/ नई दिल्ली  

कभी-कभी, जीवन हमें वो चुनौतियाँ देता है जो हमें तोड़ने के बजाय और भी मजबूत बना देती हैं। यह कहानी दो जुड़वा भाइयों की है, जिनकी मेहनत, समर्पण और परिवार के अटूट समर्थन ने उन्हें न केवल एक कठिन परीक्षा में सफलता दिलाई, बल्कि हर उस युवा के लिए प्रेरणा का स्रोत भी बन गई, जो अपने सपनों को साकार करने के लिए संघर्ष कर रहा है। ये दोनों भाई न केवल अपनी कठिनाइयों को पार करने में सफल रहे, बल्कि उन्होंने यह साबित कर दिया कि जब किसी का उद्देश्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो कोई भी बाधा उनसे बड़ा नहीं हो सकती।

जेईई मेन 2026 के रिजल्ट ने एक बार फिर कोटा में कोचिंग करने वाले छात्रों की सफलता को उजागर किया है। इस बार, कोटा से कई छात्रों ने शानदार प्रदर्शन किया, जिनमें से 12 छात्रों ने 100 परसेंटाइल हासिल किया। इन 12 में से 7 छात्रों ने कोटा में कोचिंग ली थी, और यह साबित कर दिया कि कोटा की कोचिंग संस्थाएं छात्रों को हर तरह से उत्कृष्ट तैयारी और परिणाम देने में सक्षम हैं। कोटा में पढ़ाई कर रहे छात्रों के बीच इस सफलता से खुशी और उत्साह का माहौल है। इस बीच, कोटा से जुड़ी एक विशेष और प्रेरणादायक कहानी सामने आई है, जो दो जुड़वा भाइयों महरूफ अहमद खान और मसरूर अहमद खान की है। इन दोनों भाइयों ने न केवल एक साथ पढ़ाई की बल्कि एक साथ जेईई मेन की परीक्षा भी दी और शानदार सफलता प्राप्त की।

JEE Main 2026 Results: Odisha Twins Achieve Identical Scores, Target IIT  Bombay - The CSR Journal

भुवनेश्वर (ओडिशा) के इन जुड़वा भाइयों का नाम आज हर जगह चर्चा में है, और इसका कारण है उनका एक जैसा प्रदर्शन। महरूफ और मसरूर दोनों ने जेईई मेन 2026 में 300 में से 285 अंक प्राप्त किए हैं। यह कोई साधारण उपलब्धि नहीं है, क्योंकि जेईई मेन जैसी कठिन परीक्षा में इतने उच्च अंक हासिल करना किसी भी छात्र के लिए गर्व की बात है। और खास बात यह है कि इन दोनों भाइयों ने एक साथ कोटा के एक ही कोचिंग संस्थान से तैयारी की और फिर एक साथ परीक्षा दी। जब रिजल्ट आया, तो दोनों के लिए यह विश्वास करना मुश्किल हो गया कि उन्होंने इतने शानदार अंक प्राप्त किए हैं। उनकी सफलता ने कोटा में कोचिंग लेने वाले छात्रों की मेहनत और समर्पण की मिसाल पेश की है।

छात्रों ने कहा कि "मैं क्लास 10 से कोटा में हूं और पिछले तीन सालों से कोचिंग के मटेरियल को फॉलो कर रहा हूं। जो टीचर्स की गाइडेंस थी, उसे भी अच्छे से फॉलो किया। रेगुलर टेस्ट होते थे, जिनके डाउट्स को मैं बार-बार देखता और रिविजिट करता था। जिनमें दिक्कत आती थी, उन्हें टीचर्स से पूछता और बार-बार देखकर उसे समझता। भाई से भी मोटिवेशन मिलता था। अप-डाउन तो होते ही रहते थे, लेकिन हमेशा मोटिवेटेड रहा और जेईई मेन में अच्छा स्कोर किया। हम दोनों ने शुरू से लेकर अंत तक साथ-साथ पढ़ाई की। हमारा पढ़ाई का टाइम भी एक जैसा था। हम दोनों एक ही स्टडी टेबल पर बैठते थे और एक-दूसरे को मोटिवेट करते थे। एक-दूसरे से ही बहुत कुछ सीखा।" 

महरूफ और मसरूर की इस सफलता के पीछे उनका परिवार विशेष रूप से उनकी मां का बहुत बड़ा योगदान है। डॉ. जीनत बेगम, जो ओडिशा में एक गायनोलॉजिस्ट के रूप में सरकारी सेवा में कार्यरत थीं, ने अपने बच्चों की शिक्षा के लिए अपनी नौकरी छोड़ दी और पिछले तीन सालों से कोटा में अपने बच्चों के साथ रहकर उनकी पढ़ाई में पूरा सहयोग किया। डॉ. जीनत ने न केवल अपने बच्चों के साथ रहकर उन्हें मानसिक और भावनात्मक समर्थन दिया, बल्कि उनका मनोबल भी बनाए रखा, खासकर जब कभी बच्चों के टेस्ट में अंक कम आते थे। उनका हमेशा यही कहना था, "कम अंक आने पर निराश मत हो, मेहनत करो और आगे बढ़ो।" इस प्रकार, उन्होंने बच्चों को हमेशा यह प्रेरित किया कि किसी भी स्थिति में हार मानने की बजाय, पूरी मेहनत और लगन से आगे बढ़ना चाहिए।

महरूफ और मसरूर ने अपनी 10वीं की पढ़ाई भी एक ही स्कूल से की थी। महरूफ के 95.2 प्रतिशत और मसरूर के 97.2 प्रतिशत अंक रहे, जो उनकी कड़ी मेहनत और शिक्षा के प्रति समर्पण को दर्शाते हैं। इसके बाद, इन दोनों भाइयों ने जेईई एडवांस्ड की तैयारी के लिए कोटा का रुख किया। उनका सपना था कि वे आईआईटी बॉम्बे में कंप्यूटर साइंस में प्रवेश करें। इसके लिए उन्होंने कोटा में पूरी मेहनत और लगन से अपनी पढ़ाई की। कोटा में बिताए गए उनके तीन सालों ने उन्हें न केवल शैक्षिक दृष्टिकोण से, बल्कि मानसिक रूप से भी सशक्त किया। उन्होंने अपने लक्ष्य के प्रति अपना ध्यान केंद्रित किया और पूरी तरह से उसे प्राप्त करने के लिए काम किया।

महरूफ और मसरूर की सफलता सिर्फ जेईई मेन तक सीमित नहीं है। इन दोनों भाइयों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय ओलंपियाड्स में भी शानदार प्रदर्शन किया है और 30 से ज्यादा गोल्ड मेडल जीते हैं। इनकी कड़ी मेहनत और समर्पण का नतीजा यह रहा कि उन्होंने शिक्षा और प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं के क्षेत्र में अपनी एक मजबूत पहचान बनाई। इनकी सफलता का श्रेय उन्होंने अपनी मां को दिया है, जो न केवल उनके लिए प्रेरणा का स्रोत थीं, बल्कि उनके जीवन के हर कदम पर उनका साथ देती रही हैं।

जेईई मेन की सफलता के बाद, अब महरूफ और मसरूर का ध्यान जेईई एडवांस्ड पर है। उनका उद्देश्य आईआईटी बॉम्बे में कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई करना है। वे मानते हैं कि यदि सही दिशा में मेहनत की जाए और लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित किया जाए, तो कोई भी सफलता प्राप्त की जा सकती है। अब उनका पूरा ध्यान अपनी आगामी परीक्षा की तैयारी पर है, और वे पूरी मेहनत से इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए तैयार हैं।

When motherhood took priority: The silent sacrifice behind success of  Odisha's JEE main twins

महरूफ और मसरूर की यह प्रेरणादायक कहानी यह साबित करती है कि अगर मेहनत, समर्पण और सही दिशा में प्रयास किया जाए, तो कोई भी सपना साकार हो सकता है। उन्होंने यह भी साबित किया है कि परिवार का समर्थन और प्रोत्साहन किसी भी लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए बेहद जरूरी है। इन दोनों भाइयों की सफलता हर युवा के लिए एक प्रेरणा है। यह कहानी यह संदेश देती है कि कोई भी कठिनाई, चाहे जैसी भी हो, समय के साथ हल हो सकती है, यदि हम अपनी मेहनत और लगन को सही दिशा में लगाते हैं।

महरूफ और मसरूर की सफलता की कहानी उन सभी छात्रों के लिए प्रेरणादायक है जो किसी भी परीक्षा या चुनौती से जूझ रहे हैं। इन दोनों भाइयों ने यह साबित किया है कि सफलता का रास्ता कभी भी सरल नहीं होता, लेकिन कठिन मेहनत, समर्पण और सही दिशा में प्रयास करने से हर बाधा को पार किया जा सकता हैI

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छात्रों को इनसे यह सिखने को मिलता है कि किसी भी लक्ष्य को हासिल करने के लिए जरूरी नहीं कि शॉर्टकट अपनाए जाएं, बल्कि लगातार मेहनत, समय का सही प्रबंधन और सकारात्मक सोच से ही हम अपनी मंजिल तक पहुंच सकते हैं। ममतामयी परिवार का समर्थन भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह हमें मानसिक ताकत और हौसला देता है। महरूफ और मसरूर जैसे छात्रों की तरह, अगर हम अपनी कठिनाइयों को एक चुनौती के रूप में लें और उन्हें अपने विकास का हिस्सा मानें, तो हम किसी भी सपने को साकार करने में सक्षम हो सकते हैं। उनकी मेहनत और संघर्ष से छात्रों को यह समझना चाहिए कि सफलता की कोई निश्चित परिभाषा नहीं होती, लेकिन सही मार्ग पर चलकर, कभी हार न मानने का जज्बा रखकर, हम किसी भी परीक्षा में सफलता प्राप्त कर सकते हैं।