आवाज द आवाज द वाॅयस/ नई दिल्ली।
पवित्र रमज़ान 1447 हिजरी की शुरुआत दुनिया भर में गहरी आस्था और सादगी के साथ हो चुकी है। कई देशों में मंगलवार शाम चांद दिखाई दिया और बुधवार से रोज़े शुरू हो गए। भारत और कुछ एशियाई देशों में चांद की पुष्टि के बाद गुरुवार, 19 फरवरी से पहला रोज़ा रखा जा रहा है। मस्जिदों में ईशा और तरावीह की नमाज़ शुरू हो गई है। माहौल इबादत से भरा है। लोग दुआ में मशगूल हैं। हर तरफ सब्र और इंसानियत की बात हो रही है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रमजान के पवित्र महीने की शुरुआत के अवसर पर लोगों को शुभकामनाएं दीं। सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में श्री मोदी ने ‘रमजान मुबारक‘ कहा और आशा व्यक्त की कि यह शुभ महीना समाज में एकता की भावना को और मजबूत करेगा। उन्होंने यह भी कामना की कि सभी जगह शांति और समृद्धि बनी रहे।
भारत में इस बार चांद को लेकर लोगों में खास उत्साह था। दिल्ली और एनसीआर में बादल छाए रहे। वहां चांद साफ नजर नहीं आया। इसके बाद लोगों की निगाहें दूसरे शहरों की खबरों पर टिक गईं। बिहार और असम से सबसे पहले हिलाल दिखने की सूचना आई। पटना के फुलवारी शरीफ स्थितइमारत ए शरियाके काजी रिजवान नदवी ने अलग अलग जगहों से मिली गवाहियों की जांच की। पुष्टि होने के बाद उन्होंने रमज़ान शुरू होने का एलान किया। रांची, लोहरदगा, दरभंगा और गया से भी चांद दिखने की खबर आई।
Surat Al-Baqarah | Ayah 60 - 91 | Shaykh Al Waleed Al-Shamsaan pic.twitter.com/5UXOknCQdA
— 𝗛𝗮𝗿𝗮𝗺𝗮𝗶𝗻 (@HaramainInfo) February 18, 2026
औरंगाबाद की इदारा-ए-शरियाऔर बिहार मिल्लत परिषद ने भी चांद दिखने की तस्दीक की। काजी फैजान सरवर मिस्बाही ने बताया कि औरंगाबाद में आसमान साफ था। वहां चांद साफ दिखाई दिया। इसके बाद आधिकारिक घोषणा की गई। इस तरह देश के अलग अलग हिस्सों से मिली जानकारी के आधार पर गुरुवार को पहला रोज़ा रखा जा रहा है।
अरब देशों में रमज़ान की शुरुआत एक दिन पहले हो गई।सऊदी अरबमें मंगलवार शाम चांद नजर आया। वहां बुधवार से रोज़े शुरू हो गए। कतर, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत और बहरीन ने भी उसी दिन से रोज़ा रखने का एलान किया। फिलिस्तीन, सूडान, सोमालिया और जिबूती में भी बुधवार पहला रोज़ा रहा।
इराक में सुन्नी वक्फ बोर्ड और शिया धार्मिक प्राधिकरणों ने एक साथ शुरुआत की घोषणा की। लेबनान में सुन्नी समुदाय के लिए बुधवार से रमज़ान शुरू हुआ। इसकी घोषणा देश के ग्रैंड मुफ्ती शेख अब्दुल लतीफ दरियान ने की।
मिस्र में मंगलवार को चांद नहीं दिखा। इसलिए वहां गुरुवार से रमज़ान शुरू हुआ। जॉर्डन, सीरिया, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, ईरान, ट्यूनीशिया, अल्जीरिया और मलेशिया ने भी गुरुवार को पहला रोज़ा घोषित किया। तुर्की, ओमान, सिंगापुर और ऑस्ट्रेलिया में खगोलीय गणना के आधार पर गुरुवार से रमज़ान की शुरुआत मानी गई। अलग अलग देशों में तारीख अलग हो सकती है। वजह चांद दिखने का तरीका है। कहीं आंखों से देखने पर भरोसा किया जाता है। कहीं खगोल विज्ञान की मदद ली जाती है। लेकिन भावना एक ही है। इबादत और आत्मचिंतन।
सऊदी अरब के शाहKing Salman ने इस मौके पर देशवासियों और दुनिया भर के मुसलमानों को मुबारकबाद दी। उन्होंने कहा कि रमज़ान रहमत और मगफिरत का महीना है। इस महीने में की गई इबादत का सवाब कई गुना बढ़ जाता है। उन्होंने दो पवित्र मस्जिदों की सेवा का मौका मिलने पर अल्लाह का शुक्र अदा किया। साथ ही फिलिस्तीन समेत पूरी दुनिया में अमन की दुआ की।
मक्का में स्थितMasjid al-Haram और मदीना कीAl-Masjid an-Nabawi में पहली तरावीह के दौरान लाखों लोग मौजूद रहे। हर तरफ रौनक थी। लोग दूर दूर से आए थे। प्रशासन ने खास इंतजाम किए। जमजम पानी की पर्याप्त व्यवस्था की गई। भीड़ को संभालने के लिए अलग टीमें तैनात रहीं। कई भाषाओं में डिजिटल मार्गदर्शन उपलब्ध कराया गया। अनुवाद की सुविधा भी दी गई। कोशिश यही रही कि हर नमाजी सुकून से इबादत कर सके। दोनों पवित्र मस्जिदों के प्रबंधन ने रमज़ान के लिए विशेष योजना लागू की है। सफाई, सुरक्षा और सेवा पर खास ध्यान दिया जा रहा है।
Beautiful Imitation of Sheikh Ali Jaber (May Allah have mercy on him) in Masjid Al Aqsa, Al Quds pic.twitter.com/UpxltbySBl
— Inside the Haramain (@insharifain) April 8, 2024
यरुशलम में स्थितAl-Aqsa Mosque में भी हजारों लोगों ने पहली तरावीह अदा की। मस्जिद के अंदर और खुले आंगन में नमाजी भरे रहे। माहौल भावुक था। लेकिन सुरक्षा सख्त रही। परिसर में बड़ी संख्या में पुलिस तैनात थी। स्थानीय सूत्रों का कहना है कि वर्ष 2026 की शुरुआत से अब तक 250 से ज्यादा फिलिस्तीनियों को अल अक्सा में प्रवेश से रोका गया है। कुछ धार्मिक हस्तियों पर अस्थायी रोक भी लगाई गई है। इससे तनाव बना हुआ है। इसके बावजूद लोग नमाज़ के लिए पहुंचे। उनके चेहरों पर उम्मीद दिखाई दी।
रमज़ान के मौके पर दुनिया के कई नेताओं ने संदेश जारी किए। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपतिDonald Trump ने इसे आत्मचिंतन और आध्यात्मिक नवीकरण का महीना बताया। उन्होंने कहा कि रोज़ा इंसान को अपने अंदर झांकने का मौका देता है। यह परिवार और समाज को जोड़ता है। उन्होंने करुणा और दान के महत्व पर जोर दिया। कनाडा के प्रधानमंत्रीMark Carney ने भी रमज़ान को कृतज्ञता का महीना बताया। उन्होंने धार्मिक स्वतंत्रता और आपसी सम्मान की जरूरत पर बल दिया।
रमज़ान इस्लामी चंद्र कैलेंडर का नौवां महीना है। इस महीने में मुसलमान सूर्योदय से सूर्यास्त तक रोज़ा रखते हैं। वे खाने पीने से दूर रहते हैं। बुरी आदतों से बचने की कोशिश करते हैं। झूठ और गुस्से से दूरी बनाते हैं। जरूरतमंदों की मदद करते हैं। जकात और फित्रा अदा करते हैं। यह महीना आत्मसंयम सिखाता है। इंसान को सब्र की ताकत देता है।
शाम के वक्त इफ्तार का इंतजार खास होता है। मस्जिदों और घरों में खजूर और पानी से रोज़ा खोला जाता है। कई जगह सामूहिक इफ्तार का आयोजन होता है। अमीर और गरीब एक साथ बैठते हैं। यही रमज़ान की खूबसूरती है। यह बराबरी का एहसास कराता है। दिलों को करीब लाता है।

भारत से लेकर खाड़ी देशों तक मस्जिदों में तरावीह की आवाज गूंज रही है। बच्चे भी रोज़ा रखने की कोशिश करते हैं। बाजारों में रौनक बढ़ने लगी है। खजूर, सेवइयां और इफ्तार की चीजों की खरीदारी हो रही है। लेकिन असली मकसद इबादत है। अपने अंदर की कमियों को पहचानना है। खुद को बेहतर बनाना है।
अलग अलग देशों में शुरुआत की तारीख अलग हो सकती है। लेकिन रमज़ान का संदेश एक है। इंसानियत। सब्र। नेकी। यह महीना याद दिलाता है कि भूख और प्यास क्या होती है। यह दूसरों के दर्द को समझने का मौका देता है। यही वजह है कि रमज़ान को रहमत का महीना कहा जाता है।
इस साल भी दुनिया भर में लोग शांति की दुआ कर रहे हैं। खासकर उन इलाकों के लिए जहां हालात कठिन हैं। मस्जिदों में हाथ उठ रहे हैं। आंखें नम हैं। दिलों में उम्मीद है। रमज़ान सिर्फ एक धार्मिक महीना नहीं है। यह आत्मा को साफ करने का वक्त है। रिश्तों को मजबूत करने का समय है। और इंसान को इंसान से जोड़ने का जरिया है।