भारत के हित में जो है वह भारतीयों के हित में है: धार्मिक विद्वान

Story by  मलिक असगर हाशमी | Published by  [email protected] • 4 Months ago
भारत के हित में जो है वह भारतीयों के हित में है: धार्मिक विद्वान
आवाज द वॉयस /जोधपुर 

धर्म जो भी हो, लोगों को जोड़ने का काम करता है. मनुष्य ही एक दूसरे के बीच दरार पैदा करते हैं.ये विचार प्रमुख इस्लामी विद्वान प्रो अख्तर उल-वासे ने व्यक्त किए. वे मौलाना आजाद विश्वविद्यालय जोधपुर और खुसरो फाउंडेशन नई दिल्ली शीर्षक से एक दिवसीय संगोष्ठी में अपने विचार प्रस्तुत कर रहे थे, जिसका शीर्षक धर्म है जोड़ने के लिए, तोड़ने के लिए.

प्रोफेसर अख्तर उल वासे ने आगे कहा कि जो कुछ भी भारत के हित में है, वह भारतीयों के हित में है. इस्लाम हो या कोई और धर्म, वे भी इंसानों को प्यार और रहमत का पाठ पढ़ाते हैं इसलिए अपने ही हित में और भारत के समग्र हित में हम नफरत की दीवारों को तोड़ते हैं, एक-दूसरे के करीब आते हैं.
 
उन्होंने मौलाना आजाद विश्वविद्यालय, जोधपुर में संगोष्ठी आयोजित करने के लिए बधाई दी, क्योंकि मौलाना आजाद राष्ट्रीय एकता और मानवीय एकता के बड़े हिमायती थे.
 
इस संगोष्ठी की विशेषता यह थी कि इसमें इस्लाम के अलावा हिंदू धर्म, सिख धर्म, कबीर पंथ, ईसाई और जैन धर्म के धर्मगुरुओं और बुद्धिजीवियों ने भाग लिया.
 
संगोष्ठी की अध्यक्षता राजस्थान और प्रसिद्ध गांधी घाटी में सर्वोदे आंदोलन की सक्रिय नेता सुश्री आशा बुथाराने ने की और खुसरो फाउंडेशन के अध्यक्ष पद्मश्री प्रो. अख्तरुल वासे मुख्य अतिथि थे.
 
मौलाना आजाद यूनिवर्सिटी के चांसलर अलहाज मुहम्मद अतीक ने कहा कि हमें ऐसा कुछ भी नहीं करना चाहिए जिससे धर्मों को बदनाम किया जाए और इंसानों को ठेस पहुंचे.
 
उन्होंने कहा कि मौलाना आजाद विश्वविद्यालय में बिना किसी विशेषज्ञता के हम नई पीढ़ी को शिक्षित कर रहे हैं ताकि वे अपने परिवार और देश के विकास में हिस्सा ले सकें.
 
जोधपुर के कबीर पंथ के धर्मगुरु संत माधो दास ने कहा कि यह संगोष्ठी सभी धर्मों को करीब लाने का एक बहुत अच्छा प्रयास है. उन्होंने कहा कि हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि वह इनात में सबसे महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं और उनके बीच दूरी बनाने के किसी भी प्रयास को सफल नहीं होने देना चाहिए.
 
उन्होंने कहा कि कबीर के प्रेम के ढाई श्लोकों को आज सार्वजनिक करने की जरूरत है.ईसाई धर्म का प्रतिनिधित्व करते हुए फादर जितेंद्र नाथ ने कहा कि निस्संदेह धर्म बांटने के लिए नहीं, जोड़ने के लिए है. यह सच ह. और जो इसके खिलाफ काम कर रहा है वह सही नहीं है.
 
उन्होंने कहा कि बाइबिल प्रेम का संग्रह है और ईसा मसीह प्रेम के पैगंबर हैं ,इसलिए लोगों को आपस में जोड़ने का हर संभव प्रयास करना चाहिए.
 
शहर काजी सैयद वाहिद अली ने कहा कि इस्लाम के पैगंबर ने शांति और सुरक्षा का प्रतिनिधि धर्म प्रस्तुत किया और सभी मनुष्यों को प्रेम का शिक्षक बनाया और कहा कि सभी प्राणी अल्लाह का परिवार हैं.
 
सिख धर्म की ओर से बोलते हुए ग्रंथी सरदार जयपाल सिंह ने कहा कि हमें ईर्ष्या से बचना चाहिए. हमें कर्म और धर्म का ठीक से पालन करके खुद को इंसान साबित करना चाहिए.
 
हिंदू धर्म गुरु महंत रुदर गिरिजी ने कहा कि सभी धर्मों में एक बात पर जोर दिया जाता है कि हमें सत्य का पालन करना चाहिए और सभी मनुष्यों को अपनी आस्था पर अडिग रहते हुए राष्ट्र धर्म का पालन करना चाहिए. कोई भी धर्म बुरा नही.
 
पूर्व कुलपति और प्रसिद्ध जैन विद्वान प्रो. सोहन राज तातेर ने कहा कि हर धर्म ने एक चीज सिखाई है और वह है अच्छा इंसान बनना. वह एक सच्चे धार्मिक व्यक्ति भी हैं जो एक सच्चे इंसान हैं. यदि पृथ्वी एक है, आकाश एक है, सूर्य और चंद्रमा एक हैं, और इन सबको बनाने वाला ईश्वर एक है, तो मनुष्य एक क्यों नहीं हो सकता?
 
छात्रों का प्रतिनिधित्व करते हुए हयात खान ने कहा कि धर्म चरित्र का निर्माण करता ह. प्रेम सिखाता है. सच्चा धर्म सभी प्रकार के बौद्धिक दबावों और दबावों से लोगों की रक्षा करता है. धार्मिक एकता इस देश के आर्थिक विकास की गारंटी भी है.
 
मौलाना आजाद विश्वविद्यालय के शिक्षकों का प्रतिनिधित्व करने वाले अब्दुल्ला खालिद ने सभी धार्मिक समूहों की प्रशंसा की और कहा कि हमें उन ताकतों से दूर रहना चाहिए जो हमें अलग करना चाहती हैं.उन्होंने खुसर फाउंडेशन की प्रशंसा की.
 
उन्होंने यहां एक महत्वपूर्ण संगोष्ठी का आयोजन किया जहां भारत के सभी धर्मों के धर्म गुरु आए.
 
अंत में सुश्री आशा बुथराने ने पीठासीन भाषण देते हुए कहा कि आज के विषय पर आयोजित यह संगोष्ठी पूरी तरह सफल रही. जो नफरत फैला रहे हैं, दूरी बना रहे हैं, उन्हें बेकार बनाना है.
 
 कार्यक्रम का संचालन मौलाना शाहिद हुसैन नदवी ने किया और विश्वविद्यालय के उप पंजीयक मुहम्मद अमीन ने धन्यवाद ज्ञापित किया.
 
 संगोष्ठी में तब भावनात्मक माहौल बना जब खुसरो फाउंडेशन के अध्यक्ष और मौलाना आजाद विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो अख्तर उल वासे ने मंच पर मौजूद सभी धर्मगुरुओं से हाथ मिलाने और उन्हें उठने की शपथ ली.
 
प्यार के और विभिन्न धर्मों के अनुयायियों के बीच की खाई को पाटने की कोशिश करें, जिसका समर्थन विभिन्न धर्मों के सभी नेताओं और मंच पर सभी महत्वपूर्ण लोगों आदि ने किया.
 
इस कार्यक्रम में मारवाड़ मुस्लिम एजुकेशनल एंड वेलफेयर सोसाइटी के अध्यक्ष मुहम्मद अली चंद्रीगर, महासचिव निसार अहमद खलीजी, खजान हाजी मधक, सोसाइटी के सदस्य  इस्माइल कुरैशी, डीन अकादमिक इमरान खान पठान और वाणिज्य विभाग के डीन नर मौजूद थे.