वैष्णो देवी ‘नकली चांदी’ मामला: जांच अधिकारी को कोर्ट समन

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 14-07-2026
Vaishno Devi Rs.500-Crore 'fake silver' offerings row: Jammu court summons crime branch inquiry officer
Vaishno Devi Rs.500-Crore 'fake silver' offerings row: Jammu court summons crime branch inquiry officer

 

जम्मू (जम्मू और कश्मीर)
 
जम्मू की एक अदालत ने जम्मू-कश्मीर पुलिस की क्राइम ब्रांच के जांच अधिकारी को आदेश दिया है कि वे कटरा के पास त्रिकुटा पहाड़ियों में स्थित श्री माता वैष्णो देवी मंदिर में लगभग 500 करोड़ रुपये मूल्य की "नकली चांदी" चढ़ाने के कथित मामले से जुड़े रिकॉर्ड के साथ अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश हों। जम्मू के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) मुनीश कुमार मन्हास की अदालत ने क्राइम ब्रांच के जांच अधिकारी को निर्देश दिया कि वे मामले से संबंधित रिकॉर्ड के साथ अगली सुनवाई की तारीख, जो 29 जुलाई, 2026 तय की गई है, पर अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश हों।
 
यह आदेश वकील दीपक शर्मा द्वारा दायर एक आवेदन के बाद आया है। उन्होंने पहले जम्मू में क्राइम ब्रांच के इंस्पेक्टर जनरल (IG) और इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) के सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (SSP) के पास एक विस्तृत शिकायत दर्ज कराई थी। इसमें श्री माता वैष्णो देवी जी मंदिर में भक्तों द्वारा चढ़ाई गई चांदी में कथित मिलावट, उसे बदलने और संभावित हेराफेरी की FIR दर्ज करने और व्यापक जांच की मांग की गई थी। 9 मई, 2026 को दी गई शिकायत में गंभीर संज्ञेय अपराधों (cognizable offences) का आरोप लगाया गया था, जिनमें आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, हेराफेरी, रिकॉर्ड में हेरफेर और कैडमियम-युक्त सामग्री की संभावित खरीद या उपयोग शामिल है।
 
चूंकि क्राइम ब्रांच की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई, इसलिए शिकायतकर्ता ने जम्मू के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत का दरवाजा खटखटाया और कार्रवाई की रिपोर्ट (ATR) तथा FIR दर्ज करने और मामले की जांच के लिए उचित निर्देश की मांग की। अदालत के निर्देश के बाद, क्राइम ब्रांच ने एक स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की। ​​इसमें बताया गया कि शिकायत को शुरू में मंजूरी के लिए श्रीनगर स्थित क्राइम हेडक्वार्टर भेजा गया था और मंजूरी मिलने के बाद इसे "उचित कार्रवाई" के लिए जम्मू स्थित ज़ोनल पुलिस हेडक्वार्टर भेजा गया था।
 
वकील दीपक शर्मा ने स्टेटस रिपोर्ट पर विस्तृत आपत्तियां दर्ज कराईं और तर्क दिया कि शिकायत को केवल प्रशासनिक तौर पर आगे बढ़ाना संज्ञेय अपराधों की जानकारी पर कानूनी कार्रवाई नहीं मानी जा सकती। उन्होंने कहा कि जम्मू की क्राइम ब्रांच की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) खुद गृह विभाग की संबंधित अधिसूचना के तहत एक अधिसूचित पुलिस स्टेशन है, और इसके सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (SP) स्टेशन हाउस ऑफिसर (SHO) के तौर पर काम करते हैं। यह तर्क दिया गया कि क्राइम ब्रांच के लिए 'भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023' के अनुसार शिकायत पर कार्रवाई करना कानूनी रूप से ज़रूरी था, और वे सिर्फ़ शिकायत को किसी दूसरे पुलिस अधिकारी को भेजकर अपनी कानूनी ज़िम्मेदारी से बच नहीं सकते थे।
 
आपत्तियों में यह भी बताया गया कि स्टेटस रिपोर्ट में अहम सबूतों को सुरक्षित रखने के लिए उठाए गए किसी भी कदम का ज़िक्र नहीं था। इन सबूतों में इन्वेंट्री रजिस्टर, स्टॉक रिकॉर्ड, CCTV फुटेज, डिस्पैच और ट्रांसपोर्टेशन से जुड़े दस्तावेज़, जांच रिपोर्ट, टकसाल (मिंट) से हुआ पत्राचार, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और चढ़ावे की प्राप्ति, स्टोरेज, ट्रांसपोर्टेशन, टेस्टिंग और पिघलाने से जुड़े रिकॉर्ड शामिल थे। तर्क सुनने के बाद, कोर्ट ने मामले से जुड़े क्राइम ब्रांच के जांच अधिकारी को निर्देश दिया कि वे 29 जुलाई, 2026 को संबंधित रिकॉर्ड के साथ कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से मौजूद रहें।
 
यह विवाद उन रिपोर्टों से शुरू हुआ जिनमें कहा गया था कि लगभग 20 टन जमा हुआ चांदी का चढ़ावा - जिसकी कीमत करीब 550 करोड़ रुपये बताई गई थी - टेस्टिंग, पिघलाने और प्रोसेसिंग के लिए भेजा गया था। हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार, उस सामग्री का केवल पांच से छह प्रतिशत हिस्सा ही असली चांदी निकला, जबकि बाकी सामग्री कथित तौर पर 'नकली' पाई गई और उसमें कैडमियम, लोहा और अन्य घटिया धातुएं थीं।
 
शिकायत में इस बात की जांच की मांग की गई है कि क्या वेंडरों और ज्वैलर्स ने भक्तों को नकली या मिलावटी चांदी की वस्तुएं बेची थीं, या क्या असली चांदी के चढ़ावे को मिलने के बाद किसी भी चरण में - जैसे इन्वेंट्री, तोलने, स्टोरेज, ट्रांसपोर्टेशन, जांच या पिघलाने के दौरान - बदल दिया गया, उसमें मिलावट की गई, चोरी कर लिया गया या उसका गलत इस्तेमाल किया गया।
 
शिकायत में कैडमियम वाली कथित सामग्री के स्रोत, निर्माण, खरीद और सप्लाई चेन की जांच के साथ-साथ इसमें शामिल पाए जाने वाले सभी लोगों, अधिकारियों, कस्टोडियन, वेंडरों, सप्लायरों, हैंडलरों या ट्रांसपोर्टरों की ज़िम्मेदारी तय करने की भी मांग की गई है।