A Victory for Humanity: Poor Girl's Wedding Solemnized Through Hindu-Muslim Unity in Deoria
ओनिका माहेश्वरी/ नई दिल्ली
समाज में जब कभी धर्म और जाति के नाम पर दूरियां बढ़ने की बातें सामने आती हैं, तब कुछ ऐसी कहानियां भी सामने आती हैं जो इंसानियत पर भरोसा मजबूत करती हैं। उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले से सामने आई एक शादी ऐसी ही मिसाल पेश कर रही है, जहां एक गरीब हिंदू परिवार की बेटी की शादी के लिए मुस्लिम और हिंदू समाज के लोगों ने मिलकर जिम्मेदारी उठाई।
देवरिया के बरियारपुर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले लाहिलपार मंदिर में हुई यह शादी इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। वजह सिर्फ यह नहीं कि एक गरीब बेटी की शादी हुई, बल्कि इसलिए भी कि इस शादी को सफल बनाने में अलग-अलग समुदायों के लोगों ने मिलकर योगदान दिया। यह आयोजन हिंदू-मुस्लिम एकता, सामाजिक सहयोग और मानवीय संवेदनाओं की एक सुंदर तस्वीर पेश करता है।
पिता के बिना बेटी की शादी की चिंता बनी वजह
जिस बेटी की शादी हुई, वह बेहद गरीब परिवार से आती है। उसके पिता नहीं हैं और परिवार के सामने शादी की व्यवस्था करना बड़ी चुनौती थी। जब गांव के कुछ लोगों को इस परिवार की स्थिति के बारे में पता चला तो उन्होंने मदद करने का फैसला किया। स्थानीय लोगों ने मिलकर तय किया कि आर्थिक परेशानी किसी बेटी की शादी में बाधा नहीं बनेगी। इसके बाद समाज के कई लोग आगे आए और शादी की तैयारियों में सहयोग करना शुरू किया।
इस पूरे प्रयास में क्षेत्र पंचायत सदस्य अली अंसारी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। उन्होंने न सिर्फ मदद का बीड़ा उठाया, बल्कि लोगों को जोड़कर इस शादी को सफल बनाने में योगदान दिया। "मेरे लिए पहले इंसानियत है, धर्म नहीं" अली अंसारी का कहना है कि वह गरीब और जरूरतमंद लोगों की मदद को अपना सामाजिक दायित्व मानते हैं। उनके अनुसार किसी की मदद करने से पहले यह नहीं देखा जाना चाहिए कि वह किस धर्म या जाति से जुड़ा है।
उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य केवल जरूरतमंद बेटियों की शादी में सहयोग करना है। अगर कोई लड़की आर्थिक परेशानी के कारण शादी नहीं कर पा रही है तो समाज को उसकी मदद के लिए आगे आना चाहिए। अली अंसारी बताते हैं कि अब तक वह कई गरीब बेटियों की शादी में सहयोग कर चुके हैं। वह कहते हैं कि इस काम के पीछे न कोई राजनीतिक उद्देश्य है और न ही किसी तरह का व्यक्तिगत लाभ। उनका मकसद सिर्फ जरूरतमंद परिवारों का सहारा बनना है।
हिंदू-मुस्लिम समाज ने मिलकर उठाई जिम्मेदारी
इस शादी में केवल मुस्लिम समाज के लोग ही नहीं, बल्कि हिंदू समुदाय के लोगों ने भी बढ़-चढ़कर सहयोग किया। गांव के लोगों ने मिलकर शादी की आवश्यक व्यवस्थाएं पूरी कीं। इस पहल में ग्राम प्रधान अब्दुल हसन सोनू, नंदलाल यादव, दिलीप गोंड समेत कई लोगों ने सहयोग किया। किसी ने शादी के सामान की व्यवस्था की तो किसी ने अन्य जरूरी चीजों में मदद की। दिलीप गोंड ने भी इस प्रयास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उन्होंने शादी के लिए बेड, घरेलू सामान और अन्य जरूरत की चीजों की व्यवस्था में मदद की।
गांव की कमेटी चला रही है मदद का अभियान
ग्राम प्रधान अब्दुल हसन सोनू बताते हैं कि जरूरतमंद बेटियों की शादी कराने का यह प्रयास कुछ साल पहले शुरू हुआ था। शुरुआत एक गरीब परिवार की बेटी की शादी में मदद करने से हुई थी। इसके बाद गांव के लोगों ने मिलकर एक कमेटी बनाई। इस कमेटी का उद्देश्य यह है कि अगर किसी गरीब परिवार की बेटी की शादी आर्थिक कारणों से नहीं हो पा रही है तो उसकी मदद की जाए। उन्होंने बताया कि इस पहल में गांव के कई लोग जुड़े हुए हैं और सभी अपनी क्षमता के अनुसार सहयोग करते हैं।
सेवा की भावना से जुड़ी है यह पहल
नंदलाल यादव का कहना है कि सेवा करना ही इस काम के पीछे सबसे बड़ी प्रेरणा है। उन्होंने बताया कि जब किसी जरूरतमंद परिवार की मदद होती है तो उससे मिलने वाली खुशी किसी भी आर्थिक लाभ से बड़ी होती है। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि समाज में बहुत से लोग सक्षम होते हुए भी मदद के लिए आगे नहीं आते, लेकिन थोड़ी-सी कोशिश से किसी परिवार की बड़ी परेशानी दूर की जा सकती है।
धर्म से ऊपर उठकर इंसानियत का संदेश
इस शादी की सबसे बड़ी खासियत यही रही कि यहां धर्म की पहचान पीछे रह गई और इंसानियत सबसे आगे रही। एक हिंदू बेटी की शादी में मुस्लिम समाज के लोगों ने सहयोग किया और हिंदू समाज के लोगों ने भी बराबर भागीदारी निभाई। अली अंसारी का कहना है कि समाज को बांटने वाली सोच से ऊपर उठकर जरूरतमंद लोगों की मदद करनी चाहिए। उनके अनुसार अगर कोई गरीब है, परेशान है और उसे सहायता की जरूरत है तो उसकी मदद करना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है।
समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण
देवरिया की यह शादी केवल एक पारिवारिक आयोजन नहीं रही, बल्कि सामाजिक एकता का संदेश बन गई है। यह घटना दिखाती है कि जब लोग मिलकर किसी अच्छे उद्देश्य के लिए आगे आते हैं तो बड़ी से बड़ी परेशानी आसान हो सकती है। लाहिलपार मंदिर में हुई इस शादी ने यह साबित किया कि रिश्ते केवल खून या धर्म से नहीं बनते, बल्कि प्यार, सहयोग और इंसानियत से बनते हैं। आज जब समाज में आपसी विश्वास और भाईचारे की जरूरत पहले से ज्यादा महसूस की जा रही है, तब देवरिया की यह कहानी एक सकारात्मक संदेश देती है कि इंसानियत हर पहचान से बड़ी होती है।