नई दिल्ली
तृणमूल कांग्रेस (TMC) की राज्यसभा सांसद सागरिका घोष ने सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के छात्र प्रदर्शनकारियों के बारे में दिए गए बयानों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने मांग की कि प्रधानमंत्री और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, प्रदर्शनकारी युवाओं को माफ़ करने की बात करने के बजाय खुद माफ़ी मांगें। यहां ANI से बात करते हुए, प्रदर्शनकारी छात्रों द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा पर प्रधानमंत्री के सुझावों की आलोचना करते हुए TMC नेता ने कहा कि सरकार को युवाओं पर की गई कार्रवाई की ज़िम्मेदारी लेनी चाहिए।
घोष ने कहा, "प्रधानमंत्री ने सुझाव दिया कि जिन प्रदर्शनकारी बच्चों ने कुछ खास भाषा का इस्तेमाल किया, उन्हें माफ़ कर दिया जाना चाहिए। लेकिन असलियत यह है कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को माफ़ी मांगनी चाहिए।" उनके ये बयान विपक्षी दलों (जिसमें INDIA गठबंधन भी शामिल है) द्वारा दिल्ली में परीक्षा में गड़बड़ी और पेपर लीक के ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस की कार्रवाई के विरोध में तेज़ किए गए प्रदर्शनों के बाद आए हैं। विपक्षी नेता लगातार इस मामले पर अमित शाह से औपचारिक बयान और माफ़ी की मांग कर रहे हैं। इससे पहले, सोमवार को विपक्ष ने संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने सदन से केंद्रीय गृह मंत्री शाह की अनुपस्थिति पर सवाल उठाए और विभिन्न मुद्दों पर उनकी जवाबदेही की मांग की।
इमारत के प्रवेश द्वार के पास इकट्ठा होकर, समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा सहित प्रदर्शनकारी सदस्यों ने एक बड़ा बैनर दिखाया जिस पर लिखा था: "अमित शाह संसद से गायब क्यों?" सांसदों ने गृह मंत्री और सत्ताधारी सरकार के ख़िलाफ़ कई नारे भी लगाए, जैसे "अमित शाह जवाब दो" और "अमित शाह कहां गायब हैं?"। विपक्ष राष्ट्रीय राजधानी में 20 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर दोनों सदनों में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से बयान की मांग भी करेगा। विपक्ष राम मंदिर दान में कथित चोरी के विवाद को भी उठाएगा।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब पिछले हफ़्ते पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने राम मंदिर दान में कथित चोरी के विवाद को लेकर सरकार की आलोचना करते हुए एक पुजारी की नकल की और दान इकट्ठा करके विवाद खड़ा कर दिया था। रविवार को राष्ट्रीय राजधानी में यादव पर हुए कथित हमले के बाद इस हफ़्ते संसद का सत्र भी महत्वपूर्ण हो गया है। यह विरोध प्रदर्शन मॉनसून सत्र के ग्यारहवें दिन हो रहा है। ऐसी अटकलें हैं कि केंद्र सरकार 'फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) एक्ट' (FCRA) संशोधन बिल पेश कर सकती है, जिससे सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस का एक और दिन देखने को मिल सकता है।