मलिक असगर हाशमी/ नई दिल्ली
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहचान आमतौर पर एक सख्त हिंदुत्ववादी नेता के रूप में की जाती है। लेकिन गोरखपुर की राजनीति में एक ऐसा मुस्लिम परिवार भी है जिसकी तारीफ करते हुए मुख्यमंत्री कभी नहीं थकते। सार्वजनिक मंचों से लेकर गोरक्षपीठ के दरबार तक इस परिवार की खास मौजूदगी देखने को मिलती है।
यह कहानी है बरकत अली और उनकी पत्नी हकीकुननिशां की। हकीकुननिशां ने गोरखपुर नगर निगम के वार्ड नंबर 5 यानी बाबा गंभीरनाथ वार्ड से भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। गोरखपुर जैसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील इलाके में किसी मुस्लिम महिला का बीजेपी के सिंबल पर चुनाव जीतना अपने आप में एक बड़ा संदेश है।
इस जीत के पीछे गोरक्षपीठ के साथ बरकत अली का दो दशकों पुराना गहरा रिश्ता और अटूट विश्वास है। यह संबंध किसी चुनावी रणनीति का हिस्सा नहीं बल्कि किसानों के हक की लड़ाई से उपजा एक मजबूत बंधन है।
बाबा गंभीरनाथ वार्ड से रचा नया राजनीतिक इतिहास
गोरखपुर नगर निगम का वार्ड संख्या 5 ऐतिहासिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यह वार्ड गोरक्षपीठ के महान संत ब्रह्मलीन बाबा गंभीरनाथ के नाम पर नामांकित है। बाबा गंभीरनाथ गोरक्षपीठ के पीठाधीश्वर रहे थे और वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दादागुरु ब्रह्मलीन महंत दिग्विजयनाथ के भी गुरु थे। ऐसे में इस वार्ड का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व काफी अधिक है।
निकाय चुनावों के दौरान जब इस सीट को महिला प्रत्याशी के लिए आरक्षित किया गया तो बीजेपी ने हकीकुननिशां पर दांव खेला। हकीकुननिशां ने अपने प्रतिद्वंद्वियों को पटखनी देकर पार्षद पद पर कब्जा जमाया। चुनाव जीतने के बाद जब वे अपने पति बरकत अली के साथ गोरक्षपीठ पहुंचीं, तो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनका भव्य स्वागत किया। योगी ने उन्हें जीत की बधाई दी और गोरखपुर के समग्र विकास के लिए प्राथमिकताएं तय करने पर चर्चा की। हकीकुननिशां का कहना है कि वे बिना किसी भेदभाव के 'सबका साथ, सबका विकास' के नारे को जमीन पर उतारने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
गोरखपुर के स्थानीय राजनीति को करीब से समझने वाले वरिष्ठ पत्रकारों के अनुसार, बरकत अली और योगी आदित्यनाथ के बीच के रिश्तों की शुरुआत वर्ष 2007-08 के आसपास हुई थी। उस समय गोरखपुर विकास प्राधिकरण यानी जीडीए ने मानबेला और आसपास के गांवों की सैकड़ों एकड़ जमीन का अधिग्रहण किया था। प्रशासन द्वारा तय किया गया मुआवजा किसानों की उम्मीदों से बेहद कम था, जिससे स्थानीय निवासियों में भारी असंतोष था।
मानबेला के आसपास स्थित फत्तेपुर और नोतन जैसे गांव मुख्य रूप से मुस्लिम बहुल आबादी वाले क्षेत्र हैं। अपनी जमीन और हक की लड़ाई लड़ने के लिए किसानों को एक मजबूत और असरदार नेतृत्व की तलाश थी। बरकत अली ने स्थानीय नेता मनोज सिंह के साथ मिलकर पीड़ित किसानों की आवाज उठाई। किसानों का प्रतिनिधिमंडल लेकर बरकत अली तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ के पास पहुंचे।
योगी आदित्यनाथ ने किसानों की समस्या को ध्यान से सुना और उनके तर्क से पूरी तरह सहमत हुए। उन्होंने किसानों को भरोसा दिलाया कि किसी भी नागरिक के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। इसके बाद योगी ने प्रशासनिक स्तर पर पैरवी की। गोरक्षपीठ के हस्तक्षेप और निरंतर प्रयासों का ही परिणाम था कि किसानों का मुआवजा कुल मिलाकर करीब 200 करोड़ रुपये बढ़ गया। इस एक घटना ने मुस्लिम बहुल मानबेला इलाके में योगी आदित्यनाथ की छवि को पूरी तरह बदल दिया और बरकत अली का मंदिर आने-जाने का सिलसिला शुरू हो गया।
साल 2014 की मोदी रैली और बरकत अली का ऐतिहासिक सहयोग
वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले देश भर में राजनीतिक माहौल गर्मा रहा था। बीजेपी ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया था और देश भर में उनकी बड़ी रैलियां आयोजित की जा रही थीं। इसी कड़ी में गोरखपुर में भी नरेंद्र मोदी की एक महारैली प्रस्तावित थी।
स्थानीय प्रशासन और बीजेपी संगठन के सामने सबसे बड़ी चुनौती रैली के लिए उपयुक्त मैदान तलाशने की थी। फर्टिलाइजर कारखाने का मैदान कानूनी अड़चनों के कारण उपलब्ध नहीं हो सका। आखिर में मानबेला के उसी उबड़-खाबड़ मैदान का चयन किया गया जो जीडीए के अधिग्रहण के तहत था। यह मैदान पूरी तरह से मुस्लिम बहुल आबादी से घिरा हुआ था और सुरक्षा के लिहाज से काफी संवेदनशील माना जा रहा था।
इसके अलावा फरवरी के महीने में लगातार बारिश होने के कारण मैदान पूरी तरह कीचड़ में तब्दील हो चुका था। मैदान को समतल करना और आसपास के लोगों का सहयोग हासिल करना एक दुष्कर कार्य था। ऐसे नाजुक समय में बरकत अली आगे आए। वे स्थानीय मुस्लिम समाज के प्रबुद्ध लोगों का प्रतिनिधिमंडल लेकर योगी आदित्यनाथ से मिले। उन्होंने योगी को आश्वासन दिया कि रैली के आयोजन में आसपास के गांव वाले पूरा सहयोग करेंगे।
बरकत अली और उनके साथियों ने दिन-रात मेहनत करके न केवल मैदान को तैयार करने में मदद की, बल्कि रैली के दौरान सौहार्दपूर्ण माहौल बनाए रखा। इस घटना की चर्चा उस समय के प्रमुख समाचार पत्रों में प्रमुखता से हुई थी और इसने योगी आदित्यनाथ के दिल में बरकत अली के प्रति सम्मान को और गहरा कर दिया।

बीजेपी किसान मोर्चा में मुख्यधारा की जिम्मेदारी
मानबेला आंदोलन और मोदी रैली के सफल आयोजन के बाद बरकत अली का राजनीतिक सफर तेज गति से आगे बढ़ा। वर्ष 2015-16 में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी की प्राथमिक सदस्यता ग्रहण की। उनकी कार्यशैली और निष्ठा को देखते हुए पार्टी ने 2017 में उन्हें बीजेपी किसान मोर्चा की क्षेत्रीय कार्यसमिति का सदस्य बनाया। इसके बाद वर्ष 2018 में उन्हें जिला उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई।
बरकत अली का कहना है कि गोरक्षपीठ और महाराज जी यानी योगी आदित्यनाथ ने कभी भी किसी व्यक्ति की जाति या धर्म देखकर उसकी मदद नहीं की। उन्होंने हमेशा न्याय का साथ दिया है। बरकत अली के अनुसार, मानबेला के गरीब और पिछड़े किसानों को जब हर तरफ से निराशा हाथ लगी थी, तब योगी आदित्यनाथ ही उनके लिए उम्मीद की किरण बने थे। इसी भरोसे ने उन्हें और उनके पूरे परिवार को बीजेपी और गोरक्षपीठ से स्थायी रूप से जोड़ दिया।
भारतीय राजनीति और पसमांदा मुस्लिम समाज के लिए संदेश
गोरखपुर का यह वाकया भारतीय राजनीति के प्रचलित नैरेटिव को चुनौती देता है। बीजेपी का मुस्लिम समाज, विशेषकर पसमांदा वर्ग को अपने साथ जोड़ने का प्रयोग गोरखपुर में बेहद सफल साबित हुआ है। हकीकुननिशां की जीत और बरकत अली का बीजेपी में बढ़ता कद यह दर्शाता है कि स्थानीय मुद्दों, विकास और भरोसे के आधार पर राजनीतिक दूरियों को मिटाया जा सकता है।
गोरखपुर नगर निगम में हकीकुननिशां का चयन केवल एक चुनावी जीत भर नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र में सामाजिक समरसता और विकास की मुख्यधारा से जुड़ने का एक प्रत्यक्ष उदाहरण है। यही वजह है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हर मंच से बरकत अली और उनके परिवार के योगदान की सराहना करते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
प्रश्न 1: हकीकुननिशां कौन हैं और उन्होंने किस सीट से जीत दर्ज की है?
उत्तर: हकीकुननिशां गोरखपुर नगर निगम के वार्ड नंबर 5 (बाबा गंभीरनाथ वार्ड) से भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की नवनिर्वाचित पार्षद हैं। वे बरकत अली की पत्नी हैं।
प्रश्न 2: बरकत अली और योगी आदित्यनाथ के बीच संबंधों की शुरुआत कैसे हुई?
उत्तर: इनके संबंधों की शुरुआत मानबेला जमीन अधिग्रहण आंदोलन के दौरान हुई थी। बरकत अली ने किसानों के मुआवजे की मांग को लेकर योगी आदित्यनाथ से संपर्क किया था, जिसके बाद योगी के प्रयासों से किसानों का मुआवजा 200 करोड़ रुपये बढ़ाया गया।
प्रश्न 3: क्या बरकत अली भारतीय जनता पार्टी के पदाधिकारी हैं?
उत्तर: जी हां, बरकत अली लंबे समय से बीजेपी से जुड़े हैं और वे गोरखपुर में बीजेपी किसान मोर्चा के जिला उपाध्यक्ष रह चुके हैं।