The opposition targeted the government over the expenditure on ministers' residences.
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
कांग्रेस, कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) और आम आदमी पार्टी (आप) ने केंद्र सरकार पर अपनी प्राथमिकताएं दुरुस्त नहीं रखने का आरोप लगाते हुए कहा है कि पिछले वित्त वर्ष में केंद्रीय मंत्रियों के आधिकारिक आवासों के रखरखाव पर रिकॉर्ड 92.35 करोड़ रुपये खर्च किए गए, जबकि देश में महंगाई, बेरोजगारी की समस्या विकराल रूप ले चुकी है तथा नए स्कूलों की जरूरत है।
कॉजपा ने औपनिवेशिक काल के इन बंगलों के रखरखाव के बढ़ते खर्च से संबंधित ‘पीटीआई-भाषा’ की एक खबर पर प्रतिक्रिया देते हुए सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘अपने आलीशान घरों का रखरखाव बंद कीजिए और विद्यालयों की हालत सुधारिए।’’
कॉजपा ने अपनी पोस्ट में कहा, ‘‘92 करोड़ रुपये यानी 10 नए विश्वस्तरीय सरकारी स्कूल। पैसा उपलब्ध है, लेकिन उसे सरकारी विद्यालयों पर खर्च करने की मंशा नहीं है।’’
अभिजीत दीपके ने प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की ‘‘कॉकरोच’’ संबंधी टिप्पणी की व्यंग्यात्मक प्रतिक्रिया के तौर पर मई में कॉजपा की स्थापना की थी। इसके बाद कॉजपा बेरोजगारी और परीक्षाओं में अनियमितताओं जैसे मुद्दों पर केंद्रित एक व्यापक युवा आंदोलन के रूप में उभरी है।
कॉजपा का हालिया अभियान सरकारी विद्यालयों की स्थिति पर केंद्रित है।
सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून के तहत पूछे गए एक सवाल के जवाब में ‘पीटीआई’ को मिली जानकारी के अनुसार, दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों के आधिकारिक आवासों के नवीनीकरण, साज-सज्जा और मरम्मत पर खर्च 2014-15 के 27.47 करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में रिकॉर्ड 92.35 करोड़ रुपये पहुंच गया।
इन आवासों के रखरखाव की जिम्मेदारी संभालने वाले केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) ने 2014-15 से 2025-26 तक 12 वर्ष में इन कार्यों पर कुल 547.68 करोड़ रुपये खर्च किए।